



हिमाचल प्रदेश:30 अगस्त, हिमाचल प्रदेश प्रदेश में किसानों, जनता और अवसंरचना को हुई भीषण तबाही को देखते हुए, भारतीय किसान यूनियन राज्य के सभी विधायकों से अपील करती है कि वे एकजुट होकर मौजूदा विधानसभा सत्र छोड़कर दिल्ली पहुँचें। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि हिमाचल की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और प्रभावित किसानों व आमजन के लिए ₹20,000 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की जाए।
फलों, विशेषकर सेब और नकदी फसलें, या तो पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं या अधिकांश जिलों में सड़कों के सर्वनाश के कारण वे बाजार नहीं पहुँच पा रही हैं। अब समय है कि सभी नेता अपनी पार्टी की राजनीति छोड़कर हिमाचल व उसकी जनता के प्रति “एकजुटता” और “स्थानीयता” दिखाएँ। यही आशा प्रदेश की जनता अपने सभी संसद सदस्यों से भी करती है कि वे प्रदेश के हक में मुखर होकर केंद्र से राहत पैकेज दिलवाने में पहल करें।
प्रदेश में 2023 की आपदा के घाव अभी भरे नहीं थे, उससे भी बड़ी आपदा पुनः आ गई है। प्रदेश के सभी विधायक और सांसद अपना दो माह का वेतन मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में दें।
प्रदेश सरकार और विशेषकर उद्योग मंत्री यह सुनिश्चित करें कि हिमाचल के सारे उद्योग इस वर्ष का कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड सीधे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करें और कोई राशि हिमाचल से बाहर खर्च न हो। सरकार आवश्यक हो तो इसके लिए अध्यादेश ला सकती है। ऐसा होने पर अकेले CSR से ही मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹5,000 करोड़ की राशि आ सकती है।
भारतीय किसान यूनियन के नेता श्री राकेश टिकैत इन विधायकों के साथ दिल्ली में शामिल होंगे। यदि केंद्र सरकार हमारी मांग ठुकराती है तो सभी विधायक हिमाचल भवन के बजाए जंतर मंतर पर धरना दें। भारतीय किसान यूनियन उनके लिए जंतर मंतर पर लंगर सेवा का आयोजन करेगी। नेताओं को सूचित किया जाता है कि जनता उन्हें बारीकी से देख रही है, यदि वे इसमें असफल रहे तो भारतीय किसान यूनियन उनके घर और कार्यालय पर घेराव करेगी।
जारीकर्ता
अनिंदर सिंह पंधेर (नॉटी)
अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन राज्य इकाई
सदस्य, एसकेएम इंडिया