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March 21, 2026 8:32 pm

सड़क से वंचित काशक गांव में एकमात्र  प्राथमिक  विद्यालय भी बंद*

शिमला 27 अगस्त 2023: हिमाचल प्रदेश सरकार ने दो दिन पहले दो या दो से कम संख्या वाले 117 स्कूल  प्राथमिक विद्यालय और 26 माध्यमिक विद्यालय को बंद  किया । जिसमे चौपाल विधानसभा के  के 5 प्राथमिक विद्यालय जिसमे  कयारी ,अंतरावली, *काशक*, जुब्बली और दरबाड भी शामिल है । इस बीच सूत्रों से  पता चला कि  साठ के दशक से चल रहा उत्तराखंड की सीमा से सटा  गांव काशक, टेलर पंचायत  खंड नेरवा, तहसील नेरवा जिला शिमला  का प्राथमिक विद्यालय भी बंद हो गया । जिससे वहां के लोगों में बहुत रोष  है । गांव के युवक इंजीनियर  देवेंद्र चौहान ने बताया कि यह गांव अति पिछड़ा और दुर्गम है और इस विद्यालय के बंद होने से उनके गांव के गरीब का बच्चा अनपढ़ रह जायेगा । उनका कहना है कि  सरकार एक दो बच्चे वाले  स्कूल अवश्य बंद करे, जहां दूसरा स्कूल पास में है परंतु स्कूल बंद करने से पहले वास्तविकता जाननी चाहिए भौगौलिक परस्थिति और दूरी भी कोई मापदंड होना चाहिए । हर जगह के लिए एक मापदंड लागू नहीं हो सकता । पांचवी तक के बच्चे बहुत छोटे होते है  और पढ़ने के लिए कहीं दूसरी जगह भेजने के लिए परिवार को घर छोड़कर जाना पड़ेगा जिससे घर का काम ठप  हो जायेगा । काशक ग्रामवासी या तो अपने बच्चे पढ़ा पाएंगे या घर का काम कर सकेंगे । परिवार अपने घरवार छोड़कर नहीं जा सकता, उस स्थिति में गरीब का बच्चा शिक्षा ग्रहण नही कर पायेगा। सरकार के इस फैसले से लोग बेहद दुखी है। *गांव में सड़क तो नही थी अब स्कूल भी बंद हो गया है*। काशक एक ऐसा गांव है, जहां दूसरा विद्यालय  टेलर 7 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद स्थित है, और वहां सिर्फ पैदल मार्ग है। काशक गांव के युवक राकेश चौहान, नरेंद्र चौहान, अनिल चौहान, चंदन चौहान और भूपिंदर चौहान ने कहा कि यह गांव आजादी के 75 वर्षों बाद भी बिना सड़क से है। यहां सड़क तक पहुंचने में 10 किलोमीटर पैदल यात्रा  करनी पड़ती है। कई नेता आए और गए  परंतु इस गांव की किसी ने सुध नहीं ली। उत्तराखंड की सीमा पर बसा यह गांव राजनीतिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है। गांव के मुखिया मातबरसिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2003 से लगातार इस गांव के लिए सड़क कार्य करवाने के लिए पूर्व और वर्तमान विधायकों के सैंकड़ों चक्कर लगाए, परंतु किसी पर कोई असर नहीं पड़ा। बहुत निवेदन के बाद वर्ष 2019 में विधायक बलबीर वर्मा ने इस गांव के लिए 15 km सड़क को विधायक प्राथमिकता में डाला परंतु चार वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्य में प्रगति नहीं के बराबर है। लोगों ने गिफ्ट डीड भी दी और सर्वे भी हुए। वर्तमान प्रधान और गांव के युवक इस कार्य के लिए बार बार  कार्यलय और नेताओं के चक्कर लगा रहे है परंतु प्रगति न के बराबर है। ग्रामवासी कहते है कि उन्हें तो लगता है कि यह गांव कभी सड़क से नही जुड़ेगा। ग्रामवासियों को सबसे जायदा मुश्किल नगदी फसल और बीमार व्यक्ति को सड़क तक पहुंचाने में आती है। पंचायत प्रधान कमला चौहान और काशक के मुखिया मातबर  सिंह चौहान ने  सरकार  से आग्रह किया है कि सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे और अति कठिन भौगौलिक परिस्थिति को देखते हुए कशक में दो बच्चों के लिए भीविद्यालय को चलने देना चाहिए, आने वाले समय तो बच्चे होंगे। उन्होंने आगे कहा की स्वर्गीय राजा वीरभद्र जी कहा करते थे कि कठिन भौगौलिक क्षेत्र में एक बच्चे के लिए भी विद्यालय होगा। उन्होंने आशा जताई कि सरकार भी इसी सिद्धांत के तहत कदम उठाएगी और लोगों के हित में अवश्य निर्णय लेगी।