सबकी खबर , पैनी नज़र

LIVE TV

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

March 12, 2026 3:30 pm

शिक्षण संस्थान,का दायित्व समानता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना वहीं दलित छात्रा के लिए उत्पीड़न अपमान का स्थान बन गए।

SFI-HP राज्य कमेटी धर्मशाला के सरकारी कॉलेज में एक अनुसूचित जाति की छात्रा के साथ हुए जातिगत भेदभाव और यौन उत्पीड़न के परिणामस्वरूप हुई मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करती है।*
एसएफआई राज्य कमेटी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि धर्मशाला के एक सरकारी कॉलेज में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति से सम्बंध रखने वाली एक छात्रा को अपने ही शिक्षण संस्थान में अध्यापकों और सहपाठियों द्वारा लगातार जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उसके द्वारा लंबे समय तक मानसिक और यौन उत्पीड़न सहा जाता है , जिसके कारण उसकी मानसिक स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती चली गयी इस हालात में वह अस्पताल में भर्ती कराया जाता है और लगभग दो महीनों तक चिकित्सकीय देखरेख में अवसाद से जूझने के बाद उसकी मृत्यु हो जाती है।
SFI राज्य कमेटी इस पूरे वाक़िए को एक संस्थागत हत्या मानती है जिसके शिक्षा व्यवस्था और पुलिस प्रशासन बराबर ज़िम्मेदार हैं। इन्हीं की संवेदनहीनता, लापरवाही और जातिगत पक्षपात के चलते ये वाकिया घटित हुआ है। शिक्षण संस्थान, जिनका दायित्व समानता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं एक दलित छात्रा के लिए उत्पीड़न और अपमान का स्थान बन गए। यह घटना संस्थागत विफलता को उजागर करती है। यह वाकिया उच्च शिक्षण संस्थानों में लिंग संवेदनशील कमेटी /*GSCASH (Gender Sensitization Committee Against Sexual Harassment)* की ज़रूरत को भी उजागर करता है जो ऐसे वाकियात को घटित होने से रोकने के लिए शिक्षण संस्थान में लोकतांत्रिक तरीके से गठित करी जाती थी। परन्तु हिमाचल प्रदेश के किसी भी शिक्षण संस्थान में लिंग संवेदनशील कमेटी लोकतांत्रिक तरीके से गठित नहीं करी गई है जिसके चलते इस तरह के वाकियात को बढ़ावा मिलता है।
गौरतलब है कि छात्रा के अस्पताल में भर्ती होने से पहले उसके माता-पिता ने आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर FIR दर्ज करने से इंकार कर दिया कि छात्रा के स्वस्थ होने के बाद ही उसका बयान लिया जाएगा। यह न केवल घोर लापरवाही है, बल्कि *SC/ST (Prevention of Atrocities) Act* के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन भी है, जिसके तहत तत्काल FIR दर्ज किया जाना अनिवार्य है। पुलिस की यह निष्क्रियता और टालमटोल साफ तौर पर *जातिगत पक्षपात* और संवेदनहीनता को दर्शाती है, जिसके कारण पीड़िता को समय पर कानूनी संरक्षण और न्याय से वंचित होना पड़ा। 
इसके अतिरिक्त, *Videographic Evidence* भी उपलब्ध हैं, जिनमें छात्रा स्वयं कुछ अध्यापकों के नाम लेकर उन पर जाति-आधारित भेदभाव और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाती हुई दिखाई देती है। इसके बावजूद न तो संस्थान ने और न ही प्रशासन ने कोई त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की, जो इस पूरे मामले में व्यवस्था की गहरी विफलता को उजागर करता है।
SFI-HP राज्य कमेटी ये इस पूरे वाक़िए की कड़े शब्दों में निंदा करती है और इस घटना में संलिप्त सभी व्यक्तियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग करती है। अंततः SFI राज्य कमेटी सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लिंग संवेदनशील कमेटी के लोकतांत्रिक तरीके से गठन की भी मांग करती है।
एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी यह मांग कर रही है कि इस घटना की जाँच जल्द से जल्द की जाए और इस छात्रा के अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
अनिल ठाकुर
(राज्य अध्यक्ष, SFI)
सनी सेक्टा
(राज्य सचिव, SFI)
8679453045