सबकी खबर , पैनी नज़र

October 23, 2026 10:15 pm

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उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा:एक्सपर्ट

शिमला: “उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। यह बीमारी न केवल हड्डियों को कमजोर बनाती है, बल्कि फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ाकर व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से कूल्हे, रीढ़ की हड्डी और कलाई में फ्रैक्चर होने पर दैनिक जीवन की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, समय रहते जोखिम कारकों की पहचान, उचित पोषण और नियमित शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं। “
मैक्स हॉस्पिटल, मोहाली में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. तरनदीप सिंह गिल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने के साथ उनकी आंतरिक संरचना कमजोर हो जाती है, जिससे मामूली चोट लगने पर भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. गिल ने कहा कि बढ़ती उम्र ऑस्टियोपोरोसिस का एक प्रमुख जोखिम कारक है। महिलाओं में मेनोपॉज  के बाद इस बीमारी का खतरा विशेष रूप से बढ़ सकता है। हालांकि, यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उम्र और लिंग की परवाह किए बिना हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को बढ़ाने वाले अन्य कारकों में मामूली चोट के बाद पहले फ्रैक्चर हो चुका होना, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या कूल्हे की हड्डी टूटने का इतिहास, शरीर का कम वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, कैल्शियम और विटामिन डी का अपर्याप्त सेवन, धूम्रपान तथा अत्यधिक शराब का सेवन शामिल हैं। इन जोखिम कारकों की मौजूदगी में समय रहते चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।
हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उपायों पर चर्चा करते हुए डॉ. गिल ने कहा कि उचित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधियां, स्वस्थ जीवनशैली और संपूर्ण स्वास्थ्य का हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने सलाह दी कि लोगों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही, नियमित रूप से वजन सहन करने वाले व्यायाम और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ वजन बनाए रखना और गिरने से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है। बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से संतुलन बनाए रखने, सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने और गिरने की आशंका को कम करने वाले उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।
डॉ. गिल ने जोर देते हुए कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस को बढ़ती उम्र का अपरिहार्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हड्डियों का स्वास्थ्य जीवन के हर चरण में महत्वपूर्ण है और इसकी देखभाल के लिए समय रहते उचित कदम उठाना जरूरी है। विशेष रूप से उन लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए, जिनमें इस बीमारी से जुड़े जोखिम कारक मौजूद हैं या जिन्हें पहले मामूली चोट के बाद फ्रैक्चर हो चुका है।
उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक जांच से ऑस्टियोपोरोसिस के बढ़ते जोखिम की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे व्यक्ति की जरूरत के अनुसार उचित सलाह, जीवनशैली में बदलाव और आवश्यक उपचार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। जागरूकता, नियमित देखभाल और समय पर चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से हड्डियों की मजबूती बनाए रखने तथा फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।