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February 26, 2026 4:39 am

गया में तर्पण क्यों है इतना खास, जानिए क्या कहते हैं पुराण| Hindi News, Bihar

Gaya: Pitru Paksha 2021: गयाजी में इस वक्त श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया जारी है. पुराणों में गया को पंचम तीर्थ कहा गया है. यहां पिंडदान करने से पितरों को संपूर्ण मुक्ति मिल जाती है. व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसको अपने कर्मों के अनुसार योनि प्राप्त होती है. अगर उनके कर्म अच्छे हैं तो अच्छे कर्मों के कारण देव योनि प्राप्त होती है. व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसको अपने कर्मों के अनुसार योनि प्राप्त होती है. इसका अभिप्राय यह है कि अच्छे कर्मों के कारण देव योनि प्राप्त होती है.

पुराणों में श्राद्ध और तर्पण के विषय में काफी कुछ कहा गया है. पुराणों में पितृ पक्ष के दौरान गयाजी में श्राद्ध का वर्णन अनेक दिव्य ऋषि मुनियों के द्वारा और पुराणों के अंतर्गत श्राद्ध के महत्व का वर्णन किया गया है और पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का सबसे अधिक महत्व माना गया है. किस पुराण में क्या व्याख्या दी गई है, डालते हैं एक नजर-

ब्रह्म पुराण
ब्रह्म पुराण के अनुसार जो प्राणी शाक आदि के माध्यम से अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध एवं तर्पण करता है, इससे उसके संपूर्ण कुल की वृद्धि होती है और उसके वंश का कोई भी प्राणी दुखी नहीं होता तथा उसे कोई कष्ट नहीं पहुंच पाता है.

पितृ का पोषण करता है जल
यदि पूरी श्रद्धा के साथ श्राद्ध किया गया है तो पिंडों पर गिरने वाली पानी की बूंदे भी पशु पक्षी की योनियों में पड़े हमारे पितरों का पूर्ण रूप से पोषण करती है और जिस वंश में कोई बालक बाल्यावस्था में ही मृत्यु को प्राप्त हो गया हो वे भी मार्जन के जल से पूर्ण रूप से तृप्त हो जाते हैं.

पिंड के रूप में भोजन अर्पण
ब्रह्म पुराण के ही अनुसार ही पितरों के लिए उचित समय और विधि द्वारा जो वस्तु भी ब्राह्मणों को यथा पूर्वक दी जाए वह श्राद्ध का भाग्य कहलाती है. श्राद्ध एक ऐसा जरिया है जिसके द्वारा हम अपने पितरों को संतुष्ट करने के लिए तथा उनकी तृप्ति के लिए उन्हें भोजन, अन्न, जल आदि पहुंचाते हैं. पितरों को जो भोजन दिया जाता है वह एक पिंड के रूप में अर्पित किया जाता है.

कूर्म पुराण का वर्णन
वहीं कूर्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा भाव से श्राद्ध करता है उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है. उसे दोबारा संसार चक्र में नहीं भटकना पड़ता था और उसे मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है और उसका पुनर्जन्म नहीं होता.

गरुण पुराण की व्याख्या
गरुड़ पुराण में भी इस बात को वर्णित किया गया है कि यदि पितृ पूजन किया जाए और उनसे हमारे पितृ संतुष्ट हो तो अपने वंशजों के लिए आयु संतान यश कीर्ति बल वैभव तथा धन की प्राप्ति का वरदान देते है.

मार्कंडेय पुराण में भी जिक्र
मार्कंडेय पुराण कहता है कि यदि आपके पितृ आपके द्वारा दिए गए श्राद्ध से तृप्त हो चुके हैं तो वह आपको आयु की वृद्धि, संतान की प्राप्ति, धन लाभ, विद्या में सफलता, सभी प्रकार के सुख, राज्य और मोक्ष प्रदान करने के लिए अपना आशीर्वाद देते हैं.

 

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