फागली (शिमला)। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली में राष्ट्रीय सेवा योजना का सप्तदिवसीय विशेष आवासीय शिविर 25 दिसंबर को स्वयंसेवकों के आगमन, पंजीकरण, आवास व्यवस्था और गण-विभाजन (गाग्री, कालिदास, वाल्मीकि, पाणिनि, कपिल) के साथ प्रारंभ हुआ, जबकि 26 दिसंबर को औपचारिक उद्घाटन के बाद योग, श्रमदान, कचरा-वर्गीकरण, पौधों की सुरक्षा, जल-जागरूकता, नशा-निरोध, स्वच्छता विस्तार और बौद्धिक सत्र जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से चल रही हैं। मुख्य अतिथि ने उद्घाटन पर कहा कि समस्याएँ दूरी से नहीं, भागीदारी से हल होती हैं, वहीं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिविर का उद्देश्य सेवा-भाव, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी को व्यवहार में उतारना है। शैक्षणिक दिशा में आचार्य एवं साहित्याचार्य डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि शिविर केवल कार्यक्रम नहीं, युवाओं में स्थायी सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने की प्रक्रिया है। बौद्धिक सत्र में विशेष वक्ता डॉ. वेद प्रकाश ने “ज्योतिष की काल-गणना” पर कहा कि भारतीय समय-परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं; काल-गणना भविष्य-फल की कल्पना नहीं बल्कि समय की वैज्ञानिक संरचना है। दैनिक समीक्षा सत्रों में स्वयंसेवक अपने कार्य-प्रभाव का मूल्यांकन और अगले कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं, जिससे नेतृत्व क्षमता, समय-पालन और व्यवहारिक सीख एक साथ विकसित हो रही है। 25 से 28 दिसंबर तक परिसर एवं आसपास क्षेत्रों में रास्तों की सफाई, कचरा संग्रहण व पृथक्करण, पौधों की सुरक्षा व्यवस्था और जल-स्रोत चेतना अभियान के माध्यम से श्रम के सम्मान और सामूहिक कार्य-संस्कृति को व्यवहार में उतारा गया है। आगे रैली, सर्वेक्षण, सामुदायिक संवाद, जल संरक्षण अभियान, पौधारोपण और सांस्कृतिक संध्या आयोजित होंगी। शिविर में लिया गया स्वयंसेवकों का संकल्प “मेरे भारत के लिए युवा” अब तक के कार्यों में संगठित सेवा-भाव और व्यवहारिक जिम्मेदारी के रूप में दिखाई दे रहा है।



