सबकी खबर , पैनी नज़र

October 24, 2026 10:10 am

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भारत के ये राज्य यूरोप सहित इन देशों की मिटा रहे भूख, कृषि प्रोडक्ट्स के निर्यात में लगाई बंपर छलांग

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भी पूर्वोत्तर के किसानों के प्रोडक्ट्स को इन देशों में ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है. एपीडा का कहना है कि पूर्वोत्तर में उगाए जाने वाले कीवी की यूरोप में बहुत डिमांड है. सिर्फ उत्तर भारत के किसान ही नहीं बल्कि, पूर्वोत्तर राज्यों के किसान भी जमकर फसलों का उत्पादन कर रहे हैं. यहां के किसान अपने देश के पेट भरने के साथ- साथ विदेशियों की भी भूख मिटा रहे है. यही वजह है कि पूर्वोत्तर के राज्यों ने पिछले छह वर्षों में कृषि उत्पादों के निर्यात में 85% से अधिक की छलांग लगाई है. इसकी पुष्टि खुद वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को की. रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यात 2016-17 में 2.52 मिलियन डॉलर से 2021-22 में 17.2 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.
खास बात यह है कि असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और मेघालय के किसानों द्वारा उपजाए गए फसलों की मांग बांग्लादेश, भूटान, मध्य पूर्व, ब्रिटेन और यूरोप में सबसे ज्यादा हो रही है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भी पूर्वोत्तर के किसानों के प्रोडक्ट्स की इन देशों में ब्रांडिंग और मार्केटिंग करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है. एपीडा का कहना है कि पूर्वोत्तर में उगाए जाने वाले कीवी की यूरोप में बहुत डिमांड है. इसके अलावा यहां के जोहा चावल पुलाव और काले चावल की भी सेंपल पेश कर ब्रांडिंग की जा सकती है. इससे किसानों को और ज्यादा मुनाफा होगा. बागवानी उत्पादों पर वैल्यूएशन भी करते हैं एपीडा ने क्षेत्र के 80 नवोदित उद्यमियों एवं निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) जैसी कई अन्य परियोजनाओं को शुरू करने की भी योजना बनाई है. मंत्रालय का कहना है कि विभाग के अधिकारी, समय- समय पर फूड प्रोसेसिंग में स्किल डवलपमेंट के लिए किसानों को ट्रेनिंग भी देते हैं. साथ ही बागवानी उत्पादों पर वैल्यूएशन भी करते हैं.क्षमता का भरपूर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है
केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मैसूर (CFTRI) भारतीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान (IIFPT) के सहयोग से पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में पांच दिनों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करने जा रहा है. एपीडा अपनी कृषि निर्यात नीति के तहत राज्यों को कृषि उपज निर्यात की क्षमता का भरपूर उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. इसका उद्देश्य खरीदारों के लिए निर्माता समूहों और प्रोसेसर से सीधे उत्पादों को सुरक्षित करने के लिए एक मंच बनाना है. ऐसे में अगर सब सही रहा तो पूर्वोत्तर के किसानों के माल यूरोप में छा जाएंगे.