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March 22, 2026 9:47 pm

इज़राइल में हाइफ़ा समुद्र तट पर एक लेली (वामपंथी उदारवादी) पत्रकार द्वारा एक सायरेट मटकल (इज़राइली उच्च कमांडो बल) अधिकारी का साक्षात्कार लिया जा रहा था।

Ravi Gaur:
[03/11, 9:32 am] Principal NR Bharti Sir:

लेली ने कमांडो से पूछा, “जब आप आतंकवादी के खिलाफ कार्रवाई करते हैं तो कुछ निर्दोष नागरिक भी मारे जाते हैं। यह तो प्राकृतिक न्याय नहीं है।”

कमांडो ने उससे कहा, “मैं तुम्हें यह साबित कर दूंगा कि यह तुम्हारे प्रकार का “न्याय है।”

लेली ने उससे पूछा, “आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह हमारे प्रकार का न्याय है?”

बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कमांडो उसे समुद्र तट पर सैर के लिए ले गया और चालाकी से उसे चींटियों के टीले पर खड़ा कर दिया।

कुछ ही देर में उसके शरीर पर चढ़ आई चीटियों में से दो-तीन चींटियों ने लेली को काट काट लिया। गुस्से से उसने शरीर पर जितनी चींटियाँ देखीं, सब मार डालीं क्योंकि काटने वाली जगह तीक्ष्णता से जल रही थी।

अब कमांडो मुस्कुरा रहा था।

लेली ने गुस्से में उससे पूछा, “तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो?”

कमांडो ने उससे पूछा, “इनमें से तुम्हें कौन सी चींटियों ने काटा था?”

लेली ने कहा, “मैं कैसे कह सकती हूं कि मुझे काटने वाली इनमें से कौन सी चींटी है? उनमें से बहुत सारी हैं और सभी चींटियाँ एक जैसी ही दिखती हैं।”

कमांडो ने कहा, “तो तुमने इतनी सारी चींटियाँ क्यों मारीं? क्या उन सभी ने तुम्हें काटा?”

लेली : “नहीं।”

कमांडो : “तो फिर” आपका प्राकृतिक न्याय कहां है? आपको केवल उन्हीं चींटियों को मारना चाहिए था जिन्होंने आपको काटा था।”

लेली अवाक थी।

कमांडो : “आशा है कि अब आप समझ गए हैं कि हमारी समस्या क्या है। हम स्वीकार करते हैं कि कुछ हद तक आकस्मिक क्षति हुई है। हम निर्दोष नागरिकों को मारना नहीं चाहते हैं लेकिन यह अपरिहार्य है। अगली बार ऐसी भयानक कहानियों की रिपोर्ट करने से पहले आपको इस चींटी प्रकरण पर विचार करना चाहिए।

साभार।
[03/11, 6:02 pm] Principal NR Bharti Sir: ” सुनहरा संसार ” देहरादून, उत्तराखंड प्रदेश प्रमुख हिमांशु नौरियाल।" बूढ़ा होगा तेरा बाप"

श्री सी. राधाकृष्ण राव, साठ वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुए और अपने पोते-पोतियों के साथ अमेरिका में अपनी बेटी के साथ रहने चले गए। वहां, 62 वर्ष की आयु में, वह पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में सांख्यिकी के प्रोफेसर बन गए और 70 वर्ष की आयु में, वह पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में विभाग के प्रमुख बन गए। 75 वर्ष की आयु में अमेरिकी नागरिकता। 82 वर्ष की आयु में विज्ञान के लिए राष्ट्रीय पदक, एक व्हाइट हाउस सम्मान। आज 102 साल की उम्र में उन्हें सांख्यिकी में नोबेल पुरस्कार मिला। भारत में सरकार उन्हें पहले ही पद्म भूषण (1968) और पद्म विभूषण (2001) से सम्मानित कर चुकी है।

राव कहते हैं: “भारत में रिटायरमेंट के बाद कोई नहीं पूछता. सहकर्मी भी सत्ता का सम्मान करते हैं, विद्वता का नहीं”। 102 वर्ष की आयु में अच्छी शारीरिक स्थिति में रहते हुए नोबेल प्राप्त करना संभवतः पहला उदाहरण है। एक घटना जिसे हम सभी को ध्यान में रखना चाहिए ! आयु एक संख्या मात्र है। काम करने की इच्छा और उत्कृष्टता हमेशा मायने रखती है।

श्री राधा कृष्ण राव भारत के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक जालंत उदाहरण है की कैसे जिंदगी में आयु कुछ मायने नहीं रखती और अगर आप दिल से जवान है और दिमाग दिमाग से जवान है तो आपके लिए कुछ भी पाना संभव है। भारत के ऐसे सपूत को मेरा शत-शत नमन, प्रणाम और सैल्यूट।

मेरा भारत महान।
[03/11, 9:07 pm] Principal NR Bharti Sir: 4 नवम्बर/पुण्य-तिथि
हिन्दी समय सारिणी के निर्माता मुकुन्ददास ‘प्रभाकर’

भारत में रेल का प्रारम्भ अंग्रेजी शासनकाल में हुआ था। अतः उसकी समय सारिणी भी अंग्रेजी में ही प्रकाशित हुई। हिन्दीप्रेमियों ने शासन और रेल विभाग से बहुत आग्रह किया कि यह हिन्दी में भी प्रकाशित होनी चाहिए; पर उन्हें यह सुनने का अवकाश कहाँ था। अन्ततः हिन्दी के भक्त बाबू मुकुन्ददास गुप्ता ‘प्रभाकर’ ने यह काम अपने कन्धे पर लिया और 15 अगस्त, 1927 को पहली बार हिन्दी समय सारिणी प्रकाशित हो गयी।

प्रभाकर जी का जन्म 1901 में काशी में हुआ था। पिताजी की इच्छा थी कि वे मुनीम बनें, इसलिए उन्हें इसकी शिक्षा लेने के लिए भेजा; पर प्रभाकर जी का मन इसमें नहीं लगा। अतः उन्होंने इसे छोड़ दिया। 1921-22 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में इण्टर की पढ़ाई करते समय ‘असहयोग आन्दोलन’ का बिगुल बज गया। ये पढ़ाई छोड़कर आन्दोलन में कूद गये।

प्रभाकर जी को निज भाषा, भूषा और देश से अत्यधिक प्रेम था। हिन्दी के प्रति मन में अतिशय अनुराग होने के कारण वे साहित्यकारों से मिलते रहते थे। आगे चलकर उन्होंने हिन्दी की सेवा के लिए ‘साहित्य सेवा सदन’ नामक संस्था बनाकर बहुत कम मूल्य पर श्रेष्ठ साहित्य प्रकाशित किया।

जब रेलवे की हिन्दी समय सारिणी की चर्चा हुई, तो बड़ी-बड़ी संस्थाओं ने इस काम को हाथ में लेने से मना कर दिया। यह देखकर प्रभाकर जी ने इस चुनौती को स्वीकार किया। इसकी प्रेरणा उन्हें महामना मदनमोहन मालवीय और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन से मिली। जब इस सारिणी का प्रकाशन होने लगा, तो लोगों ने उनकी प्रशंसा तो खूब की; पर आर्थिक सहयोग के लिए कोई आगे नहीं आया। परिणाम यह हुआ कि चार साल में प्रभाकर जी को 30 हजार रु. का घाटा हुआ। यह राशि आज के 30 लाख रु. के बराबर है।

पर संकल्प के धनी बाबू मुकुन्ददास प्रभाकर जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे यह घाटा उठाते रहे और हिन्दी समय सारिणी का प्रकाशन करते रहे। 1935 में उन्होंने पहली बार हिन्दी में अखिल भारतीय रेलवे समय सारिणी का प्रकाशन किया। जब माँग और काम बढ़ने लगा, तो उन्होंने अपना एक निजी मुद्रण केन्द्र (प्रेस) लगा लिया। अब उन्होंने अन्य साहित्यिक प्रकाशन बन्द कर दिये और एकमात्र रेल की समय सारिणी ही छापते रहे।

इस दौरान उन्हें अत्यन्त शारीरिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़े; क्यांेकि समय सारिणी के कारण प्रेस सदा घाटे में ही चलती थी। अनेक वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकारों ने उन्हें प्रोत्साहित किया; पर प्रोत्साहन से पेट तो नहीं भरता। शासन ने भी उन्हें कोई सहयोग नहीं दिया। फिर भी वे सदा प्रसन्न रहते थे, चूँकि हिन्दी समय सारिणी के प्रकाशन से उन्हें आत्मसन्तुष्टि मिलती थी। वे इस काम को राष्ट्र और राष्ट्रभाषा की सेवा मानते थे।

प्रभाकर जी को दक्षिण भारत में भी इस काम से पहचान मिली। 1930 में अनेक हिन्दी संस्थाओं ने उनका अभिनन्दन किया। वे भाषा-विज्ञानी भी थे। उन्होंने एक वर्ष तक मासिक ‘हिन्दी जगत्’ पत्रिका का भी प्रकाशन किया। वे हिन्दी को विश्व भाषा बनाना चाहते थे; पर आर्थिक समस्या ने उनकी कमर तोड़ दी। निरन्तर 50 साल तक घाटा सहने के बाद 4 नवम्बर, 1976 को हिन्दी में रेलवे समय सारिणी के जनक बाबू मुकुन्ददास गुप्ता ‘प्रभाकर’ की जीवन रूपी रेल का पहिया सदा के लिए रुक गया।
[03/11, 9:07 pm] Principal NR Bharti Sir: 4 नवंबर
महत्त्वपूर्ण घटनाएँ –

1822 – दिल्ली में जल आपूर्ति योजना का औपचारिक रूप से शुभारंभ।
1911 – अफ्रीकी देश मोरक्को और कांगो को लेकर फ्रांस तथा जर्मनी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर।
1924 – वायोमिंग की नेली टेलो रॉस संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रथम महिला गवर्नर चुनी गई।
1954 – दार्जिलिंग में हिमालयन पर्वतारोहण की संस्थान की स्थापना की गई।
1997 – सियाचीन बेस कैम्प में सेना की आफ़ सिग्नल ने विश्व का सर्वाधिक ऊँचा एस.टी.डी. बूथ स्थापित किया।
2000 – संयुक्त राष्ट्र संघ में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने व विखंडनीय पदार्थों के उत्पादन पर रोक संबंधी जापान का प्रस्ताव भारत के विरोध के बावजूद पारित।
2002 – चीन ने आसियान देशों के साथ मुक्त व्यापार क्षेत्र संधि पर हस्ताक्षर किये।
2008 – बराक ओबामा अफ्रीकी मूल के पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने।

जन्मदिवस

1618 – मुग़ल शासक औरंगज़ेब का जन्म हुआ।
1845 – भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी वासुदेव बलवन्त फड़के का जन्म हुआ।
1876 – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान् क्रांतिकारी भाई परमानन्द का जन्म हुआ।
1889 – स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल का जन्म 1889 में हुआ।
1894 – कोकण के गांधी अप्पा साहेब पटवर्धन का जन्म हुआ।
1897 – वनस्पति विज्ञान में पीएचडी करने वाली पहली भारतीय महिला जानकी अम्मल का जन्म हुआ।
1911 – साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी सुदर्शन सिंह चक्र का जन्म हुआ।
1929 – भारत की पहली प्रसिद्ध महिला गणितज्ञ (मानसिक परिकलित्र)शकुन्तला देवी का जन्म हुआ।
1934 – जन्मजात शिक्षक शंतनु रघुनाथ शेवड़े का जन्म हुआ।

पुण्यतिथि

1970 – प्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित शम्भू महाराज का निधन।
1976 – हिन्दी समयसारिणी के निर्माता मुकुंद दास प्रभाकर का निधन।
2015 – पूर्वोत्तर भारत के मित्र मधुकर लिमये का निधन।