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March 4, 2026 1:46 am

हिमाचल प्रदेश के 35 हितधारकों ने परामर्श कार्यशाला में भाग लिया औषधीय पौधों के विभिन्न आयामों पर हुई चर्चा

शिमला 24 मार्च 2025, वा..शि..-हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला ने हितधारकों, हेतु औषधीय पौधों पर हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन 24 मार्च, 2025 को संस्थान में किया गय । डॉ॰ वनीत जिष्टू, वैज्ञानिक-ई, विस्तार प्रभाग प्रमुख एवं प्रशिक्षण कोओर्डिनेटर/समन्वयक ने कहा कि  कार्यशाला हितधारकों के विचार जानने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से की गयी।

उन्होंने कहा कि जड़ी बूटियां उगाते समय उनका रिकॉर्ड संचित करना बहुत आवश्यक है इससे ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लिए उन्हें सहायता मिलेगी । कटाई एवं संग्रहण के समय का रिकॉर्ड करना भी रखना भी बहुत आवश्यक है। इसके अलावा उन्होने मांग और आपूर्ति के बीच अंतर विषय पर विस्तार से चर्चा की । उन्होने कहा कि विक्रेता बाज़ार होनी चाहिए परंतु यहां क्रेता का बाज़ार है अर्थात खरीदने वाला कीमतें निर्धारित करता है उन्होंने आगे कहा कि ग्रुप में कई कार्य करके विक्रेता बाज़ार बनाई जा सकती है। संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि लोग जड़ी बूटियों को उनके परिपक्व होने से पहले ही जंगलों से निकाल लेते हैं औषधीय पौधे बीस भादों के बाद ही निकालने चाहिए । उस समय उनके गुण सर्वाधिक होते हैं उनके  दोहन का समय बहुत महत्वपूर्ण है जंगलों से जड़ी बूटी समय कुछ पौधे जरूर छोड़ने चाहिए ताकि उनकी उपलब्धता बनी रहे । औषधीय पौधे उपलब्ध न होने पर उसकी जगह मिलावटी तत्व अथवा उनके परिपक्व होने से पहले के उत्पाद से काम चलाने के कारण आयुर्वेद दवाइयां से लोगों का भरोसा उठ रहा है । इस कार्यशाला से हितधारक जागरूक होकर अच्छी क्वालिटी की जड़ी बूटियां उपलब्ध करवा पाएंगे जिससे दवाइयों की गुणवत्ता सुधरेगी। डॉ. लाल सिंह, निदेशक हिमालयन रिसर्च ग्रुप ने कहा एक बीघा भूमि पर कडू कि खेती करके तीन से चार वर्ष इंतजार के बाद अस्सी हजार से एक लाख के लगभग प्रतिवर्ष आय प्राप्त कि जा सकती है। चिरायता अठारह महीने में 30 से 35 हजार रुपए तक की आय प्रतिवर्ष देता है । इनमें खाद की आवश्यकता भी नहीं है और बंदर और अन्य जानवर भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाते। डॉ सिंह ने आगे कहा कि जड़ी बूटी आदि कुछ भी पैदा करें परंतु यह सुनिश्चित करना चाहिय कि उससे जीवन यापन के लिए आए होनी ही चाहिए । खेती उत्पादन से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया में बहुत से खर्च मौजूद होते हैं उन सभी का गणना की जानी चाहिए अगर औषधीय पौधों को 20 भादो के बाद उचित समय पर हार्वेस्ट किया जाए तो प्राप्त सामग्री की मात्रा भी अधिक होगी और उसमें औषधीय गुण भी अधिक होंगे भंडारण की उचित आवश्यक व्यवस्था बहुत जरूरी है जैसे कुटकी कई बार बोरे में भरकर रखते हैं जिसमें नमी के कारण फफूंद आक्रमण से उनकी औषधीय गुण समाप्त हो जाते हैं और वह उपयोग लायक नहीं रहते। जब कभी भी औषधीय पौधों की मांग आती है तो आपूर्तिकर्ता कुछ भी गुणवत्ता वाले अथवा विकल्प सामग्री उपलब्ध करवा देते हैं । औषधीय पौधों का नमी और संक्रमण से बचाव बहुत आवश्यक है अक गुणवत्ता बनी रहे । श्री कैलाश शर्मा, औषधीय पौधे व्यापारी ने कहा कि औषधीय पौधे व्यापारीयों के लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता है ताकि वह सही से भंडारण करके जब भी आवश्यकता पड़े तो आवश्यक औषधिय पौधों  को उपलब्ध करवाया करवा सकें अन्यथा जैसे ही मांग आती हैं तो उपलब्ध न होने पर गुणवत्ता से समझौता करके कुछ भी सामग्री की आपूर्ति कर देते है जब मौसम होता है उसमें औषधीय की कीमत अच्छी नहीं मिलती। डॉक्टर जीसू ने कहा कि डिमांड और सप्लाई के बीच गैप के बारे में उन्होंने बात की स्टेकहोल्डर की विभिन्न समस्याओं के बारे में भी बताया डॉ राजेश चौहान जैक ने स्टेकहोल्डर की विभिन्न समस्याओं के बारे में बात की और स्टेकहोल्डर के लिए जैक के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। कार्यशाला में सभी प्र्तिभागियों के प्रश्नों  का विशेषज्ञों ने समाधान किया और उनकी समस्याओं पर चर्चा की । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से  35 हितधारकों ने भाग लिया।