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March 11, 2026 4:13 am

नेहरू राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली, शिमला में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष आवासीय शिविर का समापन समारोह आयोजित

शिमला 31 दिसम्बर 2025,नेहरू राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली, शिमला के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष आवासीय शिविर का विधिवत एवं भव्य समापन समारोह 31 दिसंबर, 2025 को महाविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। इस विशेष शिविर का उद्देश्य युवा स्वयंसेवकों में सामाजिक चेतना, सामुदायिक सेवा की भावना, सहयोग और नेतृत्व के गुणों का विकास करना था।

शिविर के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अजय बनयाल, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, शिमला, उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मुकेश शर्मा ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री किशोर कुमार एवं श्री भूपेश शर्मा ने शिरकत की। महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

शिविर की गतिविधियाँ एवं उद्देश्य:

यह सप्त दिवसीय आवासीय शिविर 25 दिसंबर से 31 दिसंबर, 2025 तक चला। इस दौरान 70 से अधिक एनएसएस स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी की। शिविर के प्रमुख आयामों में शामिल थे:

१.  सामुदायिक सेवा एवं स्वच्छता अभियान: स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर एवं आसपास के फागली क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया, सार्वजनिक स्थलों पर पेंटिंग का कार्य किया तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण किया।
२.स्वास्थ्य जागरूकता: स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से स्वास्थ्य जांच शिविर और एड्स, नशाखोरी, मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।
३.शैक्षणिक सत्र एवं व्यक्तित्व विकास: विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन, संचार कौशल, समय प्रबंधन तथा तनाव प्रबंधन पर व्याख्यान दिए गए।
४.सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सामुदायिक सहभागिता: स्वयंसेवकों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर सांस्कृतिक सामंजस्य बढ़ाने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसके अलावा, वृद्धाश्रम का दौरा करके वहाँ के निवासियों के साथ समय बिताया।
५.राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव: सेमिनार और समूह चर्चाओं के माध्यम से संविधान, राष्ट्रीय एकता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
६.आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण: प्राथमिक चिकित्सा और आपदा के समय बुनियादी बचाव उपायों पर हाथों-हाथ प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह की मुख्य बातें:
समापन समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। एनएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि श्री अजय बनयाल ने अपने संबोधन में कहा कि एनएसएस जैसे कार्यक्रम युवाओं के चरित्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “यह शिविर केवल सात दिन का आयोजन नहीं, बल्कि आपके जीवन में सामाजिक दायित्वों के बीज बोने का एक सशक्त माध्यम रहा है। आज के डिजिटल युग में जब युवा आभासी दुनिया में खोए हुए हैं, ऐसे शिविर उन्हें वास्तविक दुनिया, समाज की चुनौतियों और उनके समाधान से सीधे जोड़ते हैं।” उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा किए गए समाज सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही एक स्वस्थ, शिक्षित और जागरूक समाज के निर्माण की नींव रखते हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मुकेश शर्मा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि संस्कृत महाविद्यालय होने के नाते हमारा दायित्व केवल शास्त्रों का ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा, “‘सेवा परमो धर्मः’ की भावना को हमारे संस्कृत ग्रंथों में महत्व दिया गया है। यह एनएसएस शिविर उसी सिद्धांत का आधुनिक रूप है। हमें गर्व है कि हमारे विद्यार्थी न केवल संस्कृत के विद्वान बन रहे हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अपना योगदान दे रहे हैं।” उन्होंने शिविर के सफल आयोजन के लिए एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा एवं पूरी टीम को बधाई दी।
विशिष्ट अतिथि श्री किशोर कुमार एवं श्री भूपेश शर्मा ने भी स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिविर में प्राप्त अनुभवों को अपने दैनिक जीवन में उतारें और समाज में परिवर्तन के वाहक बनें। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने पर जोर दिया।
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिनेश शर्मा ने शिविर की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस शिविर का लक्ष्य “योगः कर्मसु कौशलम्” (कर्म में कुशलता ही योग है) के सिद्धांत को चरितार्थ करना था। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों ने लगभग 200 घंटे का श्रमदान किया, जिसमें सफाई, पेंटिंग, वृक्षारोपण और जागरूकता कार्यक्रम शामिल थे। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों के उत्साह और समर्पण की प्रशंसा की।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने अपने अनुभव साझा किए। स्वयंसेविका कुमारी प्रियंका ने बताया, “इस शिविर ने हमें कक्षा की चार दीवारी से बाहर निकालकर समाज की वास्तविकताओं से रूबरू कराया। वृद्धाश्रम का दौरा विशेष रूप से मार्मिक था, जिसने हमें बुजुर्गों के प्रति अपने दायित्व का अहसास कराया।” एक अन्य स्वयंसेवक रोहित ने कहा, “आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण बहुत उपयोगी रहा। अब हम आपात स्थिति में खुद को और दूसरों को बचाने के बारे में बेहतर तरीके से जानते हैं।”
समारोह के अंत में शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वयंसेवकों को मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। सभी स्वयंसेवकों को भी सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
समापन समारोह का संचालन एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा ही किया गया। अंत में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुनील कुमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय गान के साथ यह ऐतिहासिक समापन समारोह संपन्न हुआ।
इस सात दिवसीय शिविर ने न केवल स्वयंसेवकों को व्यावहारिक ज्ञान और सेवा का अनुभव दिया, बल्कि उनमें सामूहिक जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व के गुणों का विकास करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेहरू राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली का यह प्रयास युवा शक्ति को दिशा देने और एक बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ है।
विवरण के लिए संपर्क करें:
संजय शर्मा
मीडिया संयोजक
नेहरूराजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली, शिमला
फोन: 85804 77195