सांसद संत सीचेवाल ने राज्यसभा में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून की मांग की
पंजाब में पवित्र ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं से सिख संगत में गहरा रोष*
समाना में चल रहे मोर्चे की भी उठाई आवाज*
नई दिल्ली/ चंडीगढ़ – 19 मार्च 2026, लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सदन में स्पेशल मेंशन के दौरान धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसे राज्यसभा द्वारा स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने सरकार से मांग की कि देश में पवित्र ग्रंथों के अपमान को रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाए,ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
उन्होंने सदन को बताया कि देश में बेअदबी की घटनाओं के स्पष्ट राष्ट्रीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन एनसीआरबी के अनुसार हर साल सैकड़ों मामले धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़े सामने आते हैं। संत सीचेवाल ने पंजाब में 2015 के बरगाड़ी बेअदबी कांड और 1986 के नकोदर बेअदबी कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के कारण आज भी सिख समुदाय में गहरा आक्रोश है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय विरोध कर रही सिख संगत पर पुलिस फायरिंग में शहीद हुए लोगों को अब तक न्याय नहीं मिल सका है।
संत सीचेवाल ने समाना में चल रहे मोर्चे का जिक्र करते हुए कहा कि लोग बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक ग्रंथ केवल किताबें नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत हैं। सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को जीवित गुरु के रूप में माना जाता है।उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल मानवता को शर्मसार करती हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने सिफारिश की कि सच्चाई सामने लाने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, जो निष्पक्ष और तेजी से जांच कर दोषियों की पहचान करे। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को इंसाफ मिल सके और समाज में धार्मिक मर्यादा बनी रहे।
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संत सीचेवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब, गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथों के पन्नों की जिस प्रकार बेअदबी की गई, वह अत्यंत दुखद है। इससे लोगों की भावनाएं गहराई से आहत होती हैं और पंजाब में अशांति फैलती है। उन्होंने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, इसलिए यहां विशेष सतर्कता की आवश्यकता है ताकि कोई भी तत्व माहौल खराब न कर सके।








