शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि लाखों लोगों की जान बचाने वाले, लोगो में इलाज करवाने का हौसला देने वाले हिम केयर को मुख्यमंत्री द्वारा घोटाला कहना सिर्फ और सिर्फ बेशर्मी है। सरकार को यह बात आज भी चुभती है कि लोगों की जुबान पर भाजपा की दर्जनों योजनाएं रटी हुई है लेकिन इस सरकार के मंत्रियों के पास भी तीन साल बाद बताने के लिए कोई ढंग की तीन योजनाएं नहीं है। इसलिए लोगों को जिंदगी देने वाली योजनाओं को बंद करने की साज़िशे कर रही है। जिन योजनाओं ने लोगों की जिंदगी बदली उन्हें बंद कर यह सरकार भले ही राजनैतिक बदले की कार्रवाई करे लेकिन प्रदेश के लोग सरकार को माफ़ नहीं करेंगे। हमारी सरकार में ही हिम केयर और आयुष्मान के तहत साढ़े पांच लाख से ज्यादा लोगों का इलाज हुआ जिस पर 500 करोड से ज्यादा रुपए खर्च हुए।
मुख्यमंत्री एक ‘वेलफ़ेयर स्टेट’ का मतलब और उसका भाव नहीं समझ सकते हैं। वह कभी हिम केयर के उन लाभार्थियों से नहीं मिले। जिन्होंने अपनी आर्थिक हालत को देखते हुए इलाज करवाने के बजाय बीमारी छुपाने का फैसला किया। लेकिन हिम केयर ने उन्हें नई जिंदगी दी। तीन साल के कार्यकाल में जब उनके पास दिखाने के लिए अपनी नाकामियों के अलावा कुछ नहीं तो सरकार साजिशों पर उतर आई है। ‘कर-कर्ज़ और मित्रों पर ही मेहरबानी’ के मॉडल से चलने वाली सरकार देने के बजाय लेने, खोलने के बजाय बंद करने के काम में लगी है। मुख्यमंत्री यह समझ नहीं पा रहे हैं कि अपनी किसी की खींची लकीर मिटाने से बेहतर है कि अपनी लकीर बड़ी की जाए। अफ़सोस कि उनसे जब कोई लकीर ख़ुद खींची नहीं जा सकी तो औरों की खींची लकीर को मिटाने में ही अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री क्या कहते हैं उन्हें ख़ुद पता नहीं चलता है। मुख्यमंत्री ने 25 मार्च को सदन में कहा कि हमने 972 करोड़ खर्च किए, उसके पाँच मिनट बाद बोला कि 750 करोड़ रुपर खर्च किए। 19 मार्च को सदन में बोला कि 1072 करोड़ खर्च किए? भाजपा ने सिर्फ 450 करोड़ खर्च किए। तीनो बातें मुख्यमंत्री ने सदन में इसी सत्र में ही कही हैं, अब सवाल यह हैं कि उनकी कौन सी बात सही है? मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि हिम केयर का कुल बकाया कितना है? जिसके कारण आज लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है। हकीकत यह है कि सुक्खू सरकार ने आते ही हिम केयर के इलाज के लिए सिर्फ सरकार अस्पतालों में ही हिम केयर से इलाज का फरमान जारी कर दिया। इस सरकार में लोगों के इलाज के बजाय इलाज के लिए भटकने की खबरें ही हर दिन नज़र आ रही हैं। दवा और सर्जिकल आइटम्स की सप्लाई करने वाले सैकड़ों करोड़ के भुगतान वेंडर को नहीं मिलने से सप्लाई रोकी गई। अस्पतालों में सर्जिकल टाइम्स नहीं है इसलिए लोगों के ऑपरेशन टालने पड़े। गर्भवतियों को लगने वाले पाँच रुपए के इंजेक्शन भी अस्पतालों में नहीं मिलने की ख़बरें आम बात हो गई। इसके बाद भी सरकार कह रही है कि हमने 1072 करोड़ रुपए खर्च किए। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री ने आखिर वह घोटाला साढ़े तीन सालों से क्यों होने दिया? अगर कोई गड़बड़ी हुई तो मुख्यमंत्री नेतीन साल तक यह होने क्यों दी? इतने दिनों में घोटाला करने वालों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? जिस तरह की राजनीति मुख्यमंत्री कर रहे हैं, उससे हिमाचल का भला होने वाला नहीं हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि संस्थान बंद करने के मिशन को पूरा करने के बाद अब मुख्यमंत्री अब योजनाओं को बंद करने के अभियान चला रहे हैं। स्वावलंबन के बाद अब शगुन और कन्यादान योजना भी बंद हुई। ग़रीब बेटियों के लिए शगुन औरकन्यादान योजना का महत्व मुख्यमंत्री को समझ आता तो वह इसे पहले निष्क्रिय और अब बंद नहीं करते। हमारी सरकार में हमने कन्यादान योजना की राशि 31 से बढ़ाकर 51 हज़ार की और शगुन योजना शुरू की। लेकिन वर्तमान सरकार ने दोनों योजनाएं बंद करने की घोषणा कर दी है।








