सबकी खबर , पैनी नज़र

June 12, 2026 11:27 pm

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एसएफआई एचपीयू इकाई द्वारा फीस वृद्धि के खिलाफ समर हिल चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन एवं चक्का जाम

शिमला, 12 जून 2026, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आज विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में लागू किए गए फीस वृद्धि के फैसले के विरोध में समर हिल चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने समर हिल चौक पर चक्का जाम कर विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, छात्रावासों तथा शोधार्थियों ने भाग लिया और फीस वृद्धि के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।
एसएफआई का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लागू की गई फीस वृद्धि पूरी तरह से छात्र विरोधी है तथा यह उच्च शिक्षा को आम छात्रों की पहुंच से दूर करने का प्रयास है। संगठन का मानना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है और यहां पढ़ने वाले अधिकांश छात्र मध्यम एवं गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में फीस में की गई भारी बढ़ोतरी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डालने का काम करेगी।
धरने को संबोधित करते हुए एसएफआई के उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह फैसला शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है जिसे मुनाफे के आधार पर चलाया जाए, बल्कि यह प्रत्येक छात्र का संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से लगातार फीस बढ़ाई जा रही है, उससे आने वाले समय में विश्वविद्यालय में गरीब, ग्रामीण और मेहनतकश तबके के विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी देखने को मिलेगी।
उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थियों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन वर्तमान प्रशासनिक नीतियां विश्वविद्यालय को केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग तक सीमित करने का प्रयास कर रही हैं। यह न केवल सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है बल्कि शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की अवधारणा पर भी गंभीर प्रहार है।
एसएफआई के नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मूलभूत समस्याओं को हल करने में पूरी तरह विफल रहा है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों के अनेक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, पुस्तकालयों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं तथा विभिन्न विभागों में आधारभूत ढांचे की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इन समस्याओं को दूर करने के बजाय प्रशासन फीस वृद्धि का बोझ छात्रों पर डाल रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
धरने को संबोधित करते हुए एसएफआई महिला उप समिति संयोजक कॉमरेड अंकिता ने कहा कि एसएफआई किसी भी कीमत पर इस छात्र विरोधी फैसले को लागू नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द से जल्द फीस वृद्धि के इस फरमान को वापस नहीं लिया, तो संगठन अपने आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आने वाले समय में एसएफआई लगातार धरना-प्रदर्शन, रैलियां और जन अभियान चलाकर छात्रों को संगठित करेगी तथा प्रशासन को इस फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर करेगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह समझना होगा कि छात्र समुदाय की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो एसएफआई व्यापक छात्र आंदोलन खड़ा करेगी। संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में कुलपति कार्यालय के घेराव सहित बड़े आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देशभर में नई शिक्षा नीति और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के कारण सरकारी विश्वविद्यालयों में फीस लगातार बढ़ाई जा रही है। इससे गरीब और वंचित तबकों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि का फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका एसएफआई पुरजोर विरोध करती है।
छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय समस्याओं का समाधान छात्रों पर आर्थिक बोझ डालकर नहीं किया जा सकता। सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना चाहिए तथा शिक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाना चाहिए। यदि सरकार वास्तव में शिक्षा के विकास के प्रति गंभीर है तो उसे विश्वविद्यालयों को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, न कि छात्रों से अधिक फीस वसूलनी चाहिए।
एसएफआई ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस वृद्धि के निर्णय को तुरंत प्रभाव से वापस ले, छात्र हितों से जुड़े सभी निर्णयों में छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करे तथा विश्वविद्यालय की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए। संगठन ने यह भी मांग की कि शिक्षा के निजीकरण और व्यवसायीकरण की नीतियों पर रोक लगाई जाए तथा सभी छात्रों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शन के अंत में एसएफआई नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल फीस वृद्धि के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा के अधिकार को बचाने का संघर्ष है। संगठन ने विश्वविद्यालय के सभी छात्रों से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने और शिक्षा बचाने की लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। नेताओं ने कहा कि जब तक फीस वृद्धि का फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक एसएफआई का आंदोलन जारी रहेगा और छात्रों की आवाज को हर स्तर पर बुलंद किया जाएगा।