
दिनांक :- 04/07/2026 आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी नें NEET पेपर लीक के खिलाफ और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया।
Sfi राज्य कमेटी नें शिमला उपायुक्त कार्यलय से NEET पेपर लीक के खिलाफ रैली निकली और धरना प्रदर्शन किया इस धरने में बात रखते हुए SFI राज्य सचिव सन्नी सेकटा नें कहा कि पूरे देश नें NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्र धरना प्रदर्शन कर रहें है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहें। जब से नीट का पेपर लीक हुआ है उस समय से अब तक 20 से ज्यादा छात्रों नें आत्महत्या कर दी है। इसके लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार है इसलिए उनको अपने पद से इस्तीफा देना होगा।
इन्होंने बात रखते हुए कहा की पिछले 10 सालों में अभी तक 89 पेपर लीक हो चुके है और 49 पेपर को फिर से करवाया गया है यह देश की भाजपा सरकार पर सवाल खड़ा करता है इसके लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है और इसके साथ NTA भी जिम्मेदार है जो कई समय से इन परीक्षाओ को ठीक से नहीं करवा पाया है इसलिए SFI यह मांग कर रही है की NTA की तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।
एसएफआई मांग कर रही है कि NTA उन उम्मीदवारों की अटेंडेंस जारी करे जो 21 जून 2026 को हुए NEET-UG री-एग्जाम में शामिल हुए थे। 3 मई को हुए NEET-UG एग्जाम में लगभग 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। NTA ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। हालांकि, देश भर के कई सेंटरों से खबर आई कि एग्जाम के लिए अप्लाई करने वाले उम्मीदवारों और एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या में बिना किसी वाजिब वजह के अंतर था।
जंहा पिछली बार के एग्जाम में 22 लाख छात्र शामिल हुए थे, वहीं NTA ने अपने बयान में कहा है कि री-एग्जाम में “20 लाख से ज़्यादा उम्मीदवार” शामिल हुए। इससे उन हालात को लेकर चिंता पैदा होती है जिनमें लगभग 2 लाख उम्मीदवार एग्जाम में शामिल नहीं हुए।
पिछला एग्जाम रद्द होने से उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर बुरा असर पड़ा, जिससे लगभग 21 छात्रों को अपनी जान देनी पड़ी। पेपर लीक और NTA व MHRD की लगातार गड़बड़ियों की वजह से बड़ी संख्या में छात्रों को भारी मानसिक और मनोवैज्ञानिक परेशानी झेलनी पड़ी है। इस स्थिति ने हाशिए पर रहने वाले वर्गों के छात्रों को आर्थिक और मानसिक परेशानी की ओर धकेलकर उन्हें अलग-थलग कर दिया है। हालांकि, भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की चुप्पी अभी भी बनी हुई है।
केंद्र सरकार को यह साफ़ करना चाहिए कि री-नीट एग्जाम के लिए बायोमेट्रिक जांच की ज़िम्मेदारी एक ऐसी कंपनी को कैसे दी गई – “इनोवेटिव व्यू” (Innovative View) जिसे उत्तर प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में ब्लैकलिस्ट किया गया था। इससे पता चलता है कि केंद्र में सत्ताधारी संघ परिवार को छात्रों की कोई परवाह नहीं है। यह धोखाधड़ी करने वाली एजेंसियों और BJP के बीच गहरे संबंध को भी दिखाता है।
इसके साथ एसएफआई देश में प्रदर्शनकारी छात्रों को ‘आतंकवादी’ बताने वाले धर्मेंद्र प्रधान के बयानों की निंदा करती है। जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों को “आतंकवादियों की B-टीम” कहा है। ऐसे समय में जब लाखों छात्र और उनके परिवार बार-बार होने वाली परीक्षा की गड़बड़ियों, पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं के कारण परेशान हैं, ऐसी टिप्पणियां जवाबदेही और सहानुभूति की कमी को दर्शाती हैं। छात्रों की चिंताओं को दूर करने और परीक्षा प्रणाली के विफल होने की जिम्मेदारी लेने के बजाय, मंत्री ने न्याय की मांग करने वालों पर हमला करना चुना है।
छात्रों के अधिकारों के लिए विरोध करना आतंकवाद नहीं है – यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है। हाल के वर्षों में 90 से अधिक पेपर लीक की खबरें आई हैं और 22 लाख से अधिक छात्र और उनके परिवार भारी मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं; ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय को छात्रों को बदनाम करने के बजाय अपनी विफलताओं का जवाब देना चाहिए।
हम तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती, हर प्रभावित छात्र को न्याय नहीं मिल जाता और इस संकट के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता। इसके साथ एसएफआई राज्य कमेटी मांग करती है की पीड़ित परिवार को 5 करोड़ का मुआवजा प्रदान करें जिन्होंने पेपर लीक के कारण अपने बच्चो की जान गवाई है।







