सबकी खबर , पैनी नज़र

July 16, 2026 10:53 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

July 16, 2026 10:53 pm

एसएफआई ने एचपीयू में 2019 की शिक्षक नियुक्तियों की माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच की मांग उठाई


16/07/2026, आज स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के डेलिगेशन कैंपस सचिव और कैंपस सह सचिव ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव के माध्यम से कुलपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर विज्ञापन संख्या Rectt.-17/2019 दिनांक 30.12.2019 के अंतर्गत सहायक प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर हुई नियुक्तियों में प्रथम दृष्टया परिलक्षित गंभीर अनियमितताओं तथा यूजीसी विनियम, 2018 के संभावित उल्लंघनों की माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच करवाने की मांग की है।
एसएफआई ने कहा कि संगठन लंबे समय से विश्वविद्यालय में पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विधिसम्मत नियुक्ति प्रक्रिया की मांग करता रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त मूल अभिलेखों एवं दस्तावेजों के विस्तृत अध्ययन के आधार पर संगठन ने समय-समय पर विश्वविद्यालय प्रशासन को कई ज्ञापन सौंपे, जिनमें नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित गंभीर तथ्यों को उजागर किया गया था। इसके बावजूद आज तक किसी भी मामले में प्रभावी एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई विश्वविद्यालय इकाई, विश्वविद्यालय में पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विधिसम्मत नियुक्ति प्रक्रिया की पक्षधर रही है। इसी उद्देश्य से एसएफआई द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत विश्वविद्यालय से प्राप्त मूल अभिलेखों एवं दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया गया। उक्त परीक्षण के आधार पर समय-समय पर विश्वविद्यालय प्रशासन को अनेक ज्ञापन एवं अभ्यावेदन प्रस्तुत किए गए, जिनमें नियुक्ति प्रक्रिया में पाई गई गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। दुर्भाग्यवश आज तक उन तथ्यों पर कोई प्रभावी एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2025 में स्पष्ट रूप से यह टिप्पणी की है कि विश्वविद्यालय द्वारा कुछ नियुक्तियां असत्यापित (Unverified) प्रमाण-पत्रों, अनुभव प्रमाण-पत्रों एवं शोध प्रकाशनों के आधार पर की गईं। संवैधानिक संस्था की इस गंभीर टिप्पणी ने संपूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के आगे के परीक्षण के दौरान एसएफआई के संज्ञान में कुछ अन्य गंभीर मामले भी आए हैं, जो पूर्व में प्रस्तुत मामलों के अतिरिक्त हैं। इन मामलों में उपलब्ध अभिलेख प्रथम दृष्टया यह संकेत देते हैं कि निर्धारित अंतिम तिथि के पश्चात जारी अथवा प्रस्तुत किए गए प्रमाण-पत्रों को स्वीकार किया गया, अथवा ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया जो यूजीसी विनियम, 2018 के अंतर्गत आवश्यक अर्हता एवं अनुभव पूर्ण नहीं करते थे। इन परिस्थितियों में केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच समिति बनाई जाए ताकि निम्नलिखित मामले को संज्ञान में लाए जा सके 13  प्रकरण संख्या–1 सहायक प्रोफेसर (कम्प्यूटर साइंस) – ईडब्ल्यूएस श्रेणी पंजीकरण संख्या : 403867083 उक्त आवेदन विश्वविद्यालय के भर्ती अनुभाग में डायरी संख्या 691 दिनांक 25.02.2020 को प्राप्त हुआ, जबकि हार्ड कॉपी प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15.02.2020 निर्धारित थी। रिकॉर्ड के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह परिलक्षित होता है कि अभ्यर्थी ने ऑनलाइन आवेदन पत्र में ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र का न तो विवरण अंकित किया और न ही जारीकर्ता प्राधिकारी अथवा निर्गमन तिथि का उल्लेख किया, जबकि इसके लिए पृथक कॉलम उपलब्ध थे। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30.01.2020 थी। बाद में आवेदन के साथ प्रमाण-पत्र संख्या 2547/2019 दिनांक 03.08.2019 संलग्न पाया गया। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि यदि उक्त प्रमाण-पत्र आवेदन की अंतिम तिथि से पूर्व वास्तव में उपलब्ध था, तो उसका विवरण ऑनलाइन आवेदन में क्यों नहीं दिया गया। अतः प्रमाण-पत्र की वास्तविक उपलब्धता, उसकी प्रामाणिकता तथा चयन प्रक्रिया में उसकी स्वीकार्यता की वैधानिकता की स्वतंत्र न्यायिक जांच आवश्यक प्रतीत होती है। प्रकरण संख्या–2 सहायक प्रोफेसर (जूलॉजी) – ईडब्ल्यूएस श्रेणी पंजीकरण संख्या : 329922278 उक्त आवेदन डायरी संख्या 2438 दिनांक 28.02.2020 को भर्ती शाखा में प्राप्त हुआ, जबकि अंतिम तिथि 15.02.2020 थी। अभिलेखों के अनुसार अभ्यर्थी ने ऑनलाइन आवेदन में ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र का कोई विवरण अंकित नहीं किया। बाद में आवेदन के साथ दो ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र संलग्न पाए गए, जिनमें एक 31.01.2020 तथा दूसरा 09.10.2020 का है। दोनों प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30.01.2020 के पश्चात जारी हुए प्रतीत होते हैं। यदि ऐसा है तो प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि ऐसे प्रमाण-पत्रों को चयन प्रक्रिया में किस विधिक आधार पर स्वीकार किया गया तथा अन्य अभ्यर्थियों के साथ समानता के सिद्धांत का पालन किस प्रकार किया गया। इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच अत्यंत आवश्यक है। प्रकरण संख्या–3 सहायक प्रोफेसर (कम्प्यूटर साइंस – पीजीडीसीए) – ओबीसी (ओपन) पंजीकरण संख्या : 284809749 उक्त आवेदन डायरी संख्या 744 दिनांक 25.02.2020 को भर्ती शाखा में प्राप्त हुआ। अभिलेखों के अनुसार अभ्यर्थी ने ओबीसी प्रमाण-पत्र दिनांक 20.12.2017 संलग्न किया, जो भर्ती प्रयोजन हेतु अद्यतन नहीं था। इसके पश्चात 03.02.2020 का नया प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, जो ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी हुआ। इसके अतिरिक्त उपलब्ध दस्तावेजों से यह भी परिलक्षित होता है कि अभ्यर्थी ने वर्ष 2019 में यूजीसी-नेट उत्तीर्ण किया। यदि ऐसा है तो प्रथम दृष्टया यह जांच का विषय है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक उसके पास सहायक प्रोफेसर पद हेतु पात्रता प्राप्त करने के बाद वास्तविक अनुभव कितना था तथा शॉर्टलिस्टिंग के समय उसे अनुभव के कितने अंक प्रदान किए गए। यदि अनुभव के अंक निर्धारित मानकों के विपरीत प्रदान किए गए हों तो यह समान अवसर एवं निष्पक्ष चयन के सिद्धांत का गंभीर उल्लंघन होगा। अतः इस मामले की भी न्यायिक जांच आवश्यक है। प्रकरण संख्या–4 सहायक प्रोफेसर (ऑर्गेनिक केमिस्ट्री) – ओबीसी (ओपन) पंजीकरण संख्या : 177324523 उक्त आवेदन डायरी संख्या 3436 दिनांक 28.02.2020 को भर्ती शाखा में प्राप्त हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार अभ्यर्थी ने प्रारंभ में 30.07.2017 का ओबीसी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया, जो भर्ती के समय अद्यतन नहीं था। बाद में 26.11.2020 को जारी नया प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, जो न केवल ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बल्कि चयन प्रक्रिया के काफी बाद का है। यदि चयन समिति द्वारा निर्धारित कट-ऑफ तिथि के पश्चात जारी प्रमाण-पत्र को स्वीकार किया गया हो, तो यह भर्ती नियमों एवं समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है अथवा नहीं, इसकी स्वतंत्र न्यायिक जांच अत्यंत आवश्यक है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मामला भी गंभीर परीक्षण की मांग करता है। प्रकरण संख्या–5 सहायक प्रोफेसर (सिविल इंजीनियरिंग) – ओबीसी (ओपन) पंजीकरण संख्या : 412629136 उक्त आवेदन विश्वविद्यालय के भर्ती अनुभाग में डायरी संख्या 3680 दिनांक 24.02.2020 को प्राप्त हुआ, जबकि हार्ड कॉपी प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15.02.2020 निर्धारित थी। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार अभ्यर्थी द्वारा प्रारम्भ में ओबीसी श्रेणी का ऐसा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसकी वैधता भर्ती प्रयोजन हेतु समाप्त हो चुकी थी। तत्पश्चात 07.02.2020 को जारी नया ओबीसी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, जो ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30.01.2020 के पश्चात जारी हुआ। यदि निर्धारित अंतिम तिथि के पश्चात जारी प्रमाण-पत्र को चयन समिति द्वारा स्वीकार किया गया हो, तो यह भर्ती विज्ञापन की शर्तों एवं समान अवसर के सिद्धांत की दृष्टि से गंभीर परीक्षण का विषय है। अतः इस संपूर्ण प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाना न्यायोचित एवं आवश्यक प्रतीत होता है। प्रकरण संख्या–6 एसोसिएट प्रोफेसर (कम्प्यूटर साइंस – आईसीडीईओएल) पंजीकरण संख्या : 19963378 उक्त आवेदन भर्ती शाखा में डायरी संख्या 4179 दिनांक 01.03.2020 को प्राप्त हुआ। अभिलेखों के अनुसार चयनित अभ्यर्थी ने यूजीसी-नेट उत्तीर्ण नहीं किया था तथा उन्हें 03.07.2013 को पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई। यूजीसी विनियम, 2018 के अनुसार ऐसे अभ्यर्थी की सहायक प्रोफेसर पद हेतु पात्रता पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने की तिथि से मानी जाती है। इस आधार पर 03.07.2013 से 30.01.2020 (ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि) तक कुल पात्र अनुभव 6 वर्ष, 6 माह एवं 27 दिन बनता है। जबकि एसोसिएट प्रोफेसर पद हेतु यूजीसी विनियम, 2018 के अनुसार न्यूनतम 8 वर्ष का शिक्षण एवं/अथवा शोध अनुभव अनिवार्य है। यदि उक्त अनुभव की गणना उपर्युक्त प्रकार से सही पाई जाती है, तो प्रथम दृष्टया चयनित अभ्यर्थी आवश्यक न्यूनतम पात्रता पूर्ण नहीं करते प्रतीत होते हैं। इस विषय में न्यायिक जांच कराकर यह निर्धारित किया जाना आवश्यक है कि चयन किस आधार पर किया गया तथा यदि नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। प्रकरण संख्या–7 एसोसिएट प्रोफेसर (प्रबंधन – यूबीएस) पंजीकरण संख्या : 772059182 उक्त आवेदन भर्ती शाखा में 01.03.2020 को प्राप्त हुआ। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार अभ्यर्थी ने 18.09.2012 को यूजीसी-नेट उत्तीर्ण किया, जबकि नेट प्रमाण-पत्र 15.01.2013 को जारी हुआ। पीएच.डी. उपाधि 16.05.2013 को प्राप्त हुई। यूजीसी विनियम, 2018 के अनुसार सहायक प्रोफेसर पद हेतु पात्रता नेट उत्तीर्ण करने की तिथि से मानी जाती है। अतः 18.09.2012 से 30.01.2020 तक कुल पात्र अनुभव 7 वर्ष, 4 माह एवं 12 दिन बनता है। यह अनुभव भी एसोसिएट प्रोफेसर पद हेतु आवश्यक 8 वर्ष की न्यूनतम पात्रता से कम है। अतः इस नियुक्ति की वैधानिकता, अनुभव की गणना तथा चयन प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराकर यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके अनुरूप वैधानिक कार्रवाई की जानी आवश्यक है। प्रकरण संख्या–8 एसोसिएट प्रोफेसर (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग) पंजीकरण संख्या : 859576490 उक्त आवेदन भर्ती शाखा में डायरी संख्या 4566 दिनांक 26.02.2020 को प्राप्त हुआ। अभिलेखों के अनुसार चयनित अभ्यर्थी ने यूजीसी-नेट उत्तीर्ण नहीं किया था तथा 18.03.2013 को पीएच.डी. उपाधि प्राप्त की। यूजीसी विनियम, 2018 के अनुसार सहायक प्रोफेसर पद हेतु पात्रता पीएच.डी. प्राप्त करने की तिथि से मानी जाती है। इस आधार पर 18.03.2013 से 30.01.2020 तक कुल पात्र अनुभव 6 वर्ष, 10 माह एवं 12 दिन बनता है, जो एसोसिएट प्रोफेसर पद हेतु निर्धारित 8 वर्ष के अनिवार्य अनुभव से कम है। अतः प्रथम दृष्टया यह नियुक्ति भी न्यायिक परीक्षण की अपेक्षा रखती है तथा यह जांच आवश्यक है कि चयन समिति ने अनुभव की गणना किस आधार पर की प्रार्थना उपरोक्त तथ्यों, उपलब्ध अभिलेखों तथा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर मांग कर रहे हैं
एस ०एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश द्वारा चेतावनी देते हुए कहा कि यह जो सरकार की तानाशाही है जो रजिस्ट्रार को को विश्वविद्यालय से ट्रान्सफर किया गया लेकिन हम आपको यह बताना चाहते हैं कि आप विश्वविद्यालय कुलसचिव को बदल सकते हैं पर जो हमारे पास डॉक्यूमेंट हैं आप उनको कैसे बदलोगे
एस ०एफ आई ने कुलसचिव से कहा कि दिए गए ज्ञापन पत्रों पर जल्द से संज्ञान ले
धन्यवाद
*विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश कुमार*
*इकाई उपाध्यक्ष आशीष चौहान*