सबकी खबर , पैनी नज़र

July 16, 2026 11:05 pm

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सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने किया सुरक्षित फफूंदनाशी छिड़काव का प्रदर्शन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस पर

एरोपोनिक्स तकनीक हेतु दो कंपनियों के साथ एमओयू

शिमला।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर  केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के वैज्ञानिकों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करते हुए सुरक्षित फफूंदनाशी छिड़काव तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. संजीव शर्मा एवं डॉ. आलोक कुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, ने कुफरी (शिमला) में  सुरक्षित फफूंदनाशी छिड़काव की विधियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि पौध संरक्षण रसायनों का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग बेहतर फसल उत्पादन के साथ-साथ किसानों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर  सीपीआरआई ने एरोपोनिक्स तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दो निजी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल गुणवत्तायुक्त एवं रोगमुक्त आलू बीज के बड़े पैमाने पर उत्पादन, एरोपोनिक्स तकनीक के व्यावसायीकरण तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे उन्नत बीज उत्पादन तकनीकों के व्यापक प्रसार तथा देश में आलू उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
इन एमओयू का आदान-प्रदान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर एवं श्री भागीरथ चौधरी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, आईसीएआर के उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान) डॉ. एस. के. सिंह तथा सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
सुरक्षित फफूंदनाशी छिड़काव के प्रदर्शन के दौरान वैज्ञानिकों ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के सही उपयोग, स्प्रेयर के उचित संचालन एवं कैलिब्रेशन, अनुशंसित मात्रा में घोल तैयार करने, सुरक्षित छिड़काव तकनीकों तथा उपयोग के बाद कीटनाशी एवं फफूंदनाशी कंटेनरों के पर्यावरण अनुकूल निस्तारण की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छिड़काव के दौरान सावधानियां अपनाकर रसायनों के अनावश्यक संपर्क, स्प्रे ड्रिफ्ट तथा पर्यावरण प्रदूषण को काफी हद तक रोका जा सकता है। प्रतिभागियों ने इस व्यावहारिक प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे किसानों में सुरक्षित पौध संरक्षण तकनीकों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का 98वां स्थापना दिवस 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, आईसीएआर नेतृत्व, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा कृषि क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। सुरक्षित फफूंदनाशी छिड़काव के सफल प्रदर्शन और एरोपोनिक्स तकनीक से जुड़े रणनीतिक समझौतों के माध्यम से आईसीएआर-सीपीआरआई ने एक बार फिर आलू अनुसंधान, सुरक्षित एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों के विकास, नवाचार तथा किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है ।