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August 4, 2026 9:47 pm

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श्रम मंत्री अनिल विज ने कसी नकेल, लंबित जांच पर अफसरों को किया तलब

जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक की जांच के आदेश लंबित रखने से विज खफा

पहले चरण में 1500 करोड़ की कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद अब पूरे रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

चंडीगढ़: हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड में वर्षों से चली आ रही कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर श्रम मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक के मामलों की जांच लंबे समय से लंबित रहने पर विज ने बुधवार, 5 अगस्त को श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लंबित जांच की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, यदि वर्ष 2007 से जुलाई 2023 तक श्रमिक पंजीकरण और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की व्यापक जांच की जाती है तो कथित अनियमितताओं का दायरा हजारों करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पहले चरण की जांच में मिले थे गंभीर संकेत
श्रम मंत्री अनिल विज के निर्देश पर अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच सभी जिलाधीशों के माध्यम से पूरे हरियाणा में विशेष जांच कराई गई थी। इस जांच में मुख्य रूप से श्रमिकों के पंजीकरण और 90 दिनों के निर्माण कार्य के प्रमाणों का सत्यापन कराया गया। सूत्रों के अनुसार, इस जांच में करीब 1500 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं के संकेत मिले थे, जिसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया।

जिलाधीशों की रिपोर्ट के बाद बनी थी हाई लेवल कमेटी
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति की पांच से अधिक बैठकें भी हुईं, लेकिन बाद में पंकज अग्रवाल की सीबीआई द्वारा बैंक घोटाले के मामले में गिरफ्तारी के बाद जांच प्रक्रिया प्रभावित हो गई। अब माना जा रहा है कि सरकार इस समिति का पुनर्गठन कर सकती है।

वर्क स्लिप और पंजीकरण पर उठे सवाल
बोर्ड में पंजीकरण के लिए 18 से 58 वर्ष की आयु, वार्षिक 60 रुपये सदस्यता शुल्क तथा निर्माण कार्य में कम से कम 90 दिन काम करने का प्रमाण आवश्यक है। पहले चरण की जांच में केवल श्रमिकों के पंजीकरण और 90 दिन के कार्य संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई गई थी।

सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान बड़ी संख्या में प्रस्तुत वर्क स्लिप संदिग्ध पाई गईं। कई मामलों में रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर सामने आया, जिससे पूरे सत्यापन तंत्र पर सवाल खड़े हो गए।

डीबीटी भुगतान और सत्यापन प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को राशि सीधे बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी गई। अब यह भी जांच का विषय है कि यदि पंजीकरण और दस्तावेजों में गड़बड़ी हुई तो लाभार्थियों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। विभागीय अधिकारियों और संबंधित तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

22 से अधिक योजनाओं का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा
हरियाणा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड के माध्यम से श्रमिकों के लिए 22 से अधिक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं। करोड़ों रुपये की सहायता विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वितरित होती रही है। ऐसे में अब इन योजनाओं के लाभ वितरण और पात्रता की भी विस्तृत समीक्षा किए जाने की संभावना है।

अब अफसरों से मांगा जाएगा हिसाब
सूत्रों के अनुसार श्रम मंत्री अनिल विज ने जनवरी 2007 से जुलाई 2023 तक की जांच के आदेश पहले ही जारी कर दिए थे और कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए। इसके बावजूद जांच लंबित रहने पर उन्होंने अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।

प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि विज लंबित जांच में हुई देरी के कारणों पर सीधे जवाब मांगेंगे और जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए सख्त निर्देश जारी कर सकते हैं। यदि जांच आगे बढ़ती है तो श्रमिक कल्याण बोर्ड से जुड़े वर्षों पुराने मामलों की कई नई परतें खुल सकती हैं।