सबकी खबर , पैनी नज़र

October 7, 2026 12:54 am

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हरियाणा में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर अब नहीं होगी ढिलाई: नेक्स्ट जेन ई-चालान से कार्रवाई होगी समयबद्ध और जवाबदेह     

तीन दिन में नोटिस, 45 दिन में चालान पर निर्णय; शिकायतों का 30 दिन में निस्तारण                  27 स्क्रैपिंग सेंटरों के जरिए पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग और प्रदूषण नियंत्रण को बढ़ावा

चंडीगढ़*पवन चोपड़ा, हरियाणा पुलिस ने यातायात नियमों की पालना, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेक्स्ट जेन ई-चालान प्रणाली को प्रदेशभर में लागू कर दिया है। इस तकनीक आधारित व्यवस्था के तहत यातायात उल्लंघनों पर कार्रवाई न केवल अधिक पारदर्शी और डिजिटल होगी, बल्कि चालान जारी होने से लेकर उसके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और जवाबदेह रहेगी।
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक  अजय सिंघल ने पुलिस मुख्यालय, पंचकूला में प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों, पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। डीजीपी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तकनीक आधारित पुलिसिंग को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदला जाए और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
नेक्स्ट जेन ई-चालान: पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, समयबद्ध और जवाबदेह
बैठक में एडीजीपी  विकास अरोड़ा ने प्रदेश में यातायात प्रबंधन और प्रवर्तन को लेकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा 20 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुरूप हरियाणा में 16 जून 2026 से नेक्स्ट जेन ई-चालान प्रणाली लागू की गई है। नई व्यवस्था के तहत यातायात उल्लंघन के बाद तीन दिनों के भीतर नोटिस भेजा जाएगा और वाहन चालक को 45 दिनों के भीतर चालान स्वीकार करने अथवा उसे चुनौती देने का अवसर मिलेगा। निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई नहीं करने पर चालान स्वतः स्वीकार माना जाएगा। यदि वाहन चालक चालान के विरुद्ध शिकायत दर्ज करता है तो उसका निस्तारण 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में शिकायत का निस्तारण नहीं होने पर शिकायत स्वतः स्वीकार मानी जाएगी। हर जिले में एक नोडल अधिकारी तथा दो शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
शिकायत खारिज होने की स्थिति में वाहन चालक चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा कराकर न्यायालय में चुनौती दे सकता है, जबकि स्वीकार किए गए चालान का भुगतान 90 दिनों के भीतर करना होगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167(12) के तहत लंबित चालान के निस्तारण तक संबंधित वाहन के पंजीकरण अथवा चालक के लाइसेंस से जुड़े कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है और वाहन को पोर्टल पर “Not to be Transacted” के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। नियम 167(13) के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पुलिस अधिकारियों को मोटर वाहन हिरासत में लेने का भी अधिकार है। यह व्यवस्था यातायात प्रवर्तन को कागजी प्रक्रिया से निकालकर डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।           यातायात नियमों के उल्लंघन पर बड़े पैमाने पर एनफोर्समेंट
बैठक में पुलिस अधीक्षक पुष्पा खत्री ने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा वर्ष 2026 में यातायात नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है। इस दौरान बिना नंबर प्लेट के 1,40,851, लेन ड्राइविंग के 3,03,435, ड्रंकन ड्राइविंग के 37,332, गलत दिशा में वाहन चलाने के 2,68,360, बिना हेलमेट के 9,75,160, बिना PUC के 77,413 तथा ओवर-स्पीडिंग के 3,67,118 मामलों में कार्रवाई की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हरियाणा पुलिस सड़क सुरक्षा को केवल प्रवर्तन का विषय न मानकर अनुशासित और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के निर्माण के रूप में देख रही है। विशेष रूप से बिना हेलमेट, ओवर-स्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और ड्रंकन ड्राइविंग जैसे गंभीर उल्लंघनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
ट्रैफिक जाम पर ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ को बढ़ावा
डीजीपी अजय सिंघल ने अधिकारियों को यातायात जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रिवेंटिव और डेटा-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम, डिजिटल मैपिंग और गूगल मैप्स जैसे उपलब्ध तकनीकी माध्यमों के जरिए जाम संभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जाए। जिन स्थानों पर नियमित रूप से जाम की स्थिति बनती है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पहले से पुलिस बल की तैनाती, ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि समस्या उत्पन्न होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय जाम को पहले ही रोकने की रणनीति अपनाई जा सके।
पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग से प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
बैठक में एनसीआर क्षेत्र में बीएस-3 और इससे नीचे के वाहनों के संचालन से संबंधित प्रतिबंधों तथा सरकार की वाहन स्क्रैपिंग नीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।एडीजीपी ट्रैफिक ने बताया कि प्रदेश में पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग के लिए 27 स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। पात्र वाहन मालिक अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराकर निर्धारित स्क्रैप मूल्य, वाणिज्यिक कर में छूट तथा नया वाहन खरीदने पर नियमानुसार मिलने वाली रियायतों का लाभ उठा सकते हैं। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाहन स्क्रैपिंग नीति के बारे में आमजन को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि **स्वच्छ हवा, सुरक्षित सड़कें और सुव्यवस्थित यातायात—तीनों एक आधुनिक और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

डीजीपी अजय सिंघल ने दिए निर्देश: तकनीक, डेटा और प्रिवेंटिव पुलिसिंग से बनेगी सुरक्षित एवं स्मार्ट यातायात व्यवस्था

डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य यातायात व्यवस्था को केवल नियमों के पालन तक सीमित न रखते हुए तकनीक, डेटा और प्रिवेंटिव पुलिसिंग के माध्यम से सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यातायात उल्लंघनों पर प्रभावी एवं निष्पक्ष कार्रवाई के साथ-साथ जाम की समस्या, सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नेक्स्ट जेन ई-चालान प्रणाली से प्रवर्तन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं तकनीक आधारित निगरानी से पुलिस को संभावित ट्रैफिक जाम एवं अन्य समस्याओं की पहले से पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। डीजीपी ने अधिकारियों से कहा कि हरियाणा पुलिस आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय से ऐसी पुलिसिंग व्यवस्था विकसित करे, जिसमें सड़क सुरक्षा, नागरिक सुविधा और कानून का प्रभावी अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।