सबकी खबर , पैनी नज़र

August 5, 2026 6:06 pm

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क्रिश्चियन नर्सिंग कॉलेज कुल्लू में छात्रों के शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप गंभीर, SFI ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

कुल्लू/शिमला: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने जिला कुल्लू स्थित क्रिश्चियन नर्सिंग कॉलेज में अध्ययनरत 100 से अधिक छात्रों द्वारा कॉलेज प्रशासन पर लगाए गए आर्थिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न, मूलभूत सुविधाओं के अभाव, अनियमितताओं तथा छात्रों की आवाज दबाने के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है।

SFI के पास कॉलेज में अध्ययनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत शिकायत में कई गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा बिना पूर्व सूचना के मनमाने जुर्माने लगाए जाते हैं तथा एक ही पाठ्यक्रम में अलग-अलग छात्रों से अलग-अलग शुल्क वसूला जाता है। छात्रों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार कॉलेज की वेबसाइट पर GNM और B.Sc. Nursing के सरकारी एवं मैनेजमेंट कोटा के लिए अलग-अलग शुल्क दर्शाए गए हैं, जबकि सरकारी कोटे के छात्रों से भी अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का आरोप है।

छात्रों का यह भी आरोप है कि स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी उनसे शुल्क लिया जाता है तथा उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज़ कॉलेज प्रशासन द्वारा अपने पास रखे जाते हैं। छात्रों का कहना है कि जब कोई विद्यार्थी किसी अन्य संस्थान में जाना चाहता है तो उसे मूल दस्तावेज़ एवं डिग्री रोकने की धमकी दी जाती है। SFI ने इन आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हॉस्टल की स्थिति पर भी गंभीर सवाल

छात्रों ने हॉस्टल की दयनीय स्थिति को लेकर भी शिकायत की है। उनके अनुसार बरसात के दौरान कमरों की छत एवं दीवारों से पानी टपकता है, सीवरेज पाइपों के कारण परिसर में दुर्गंध रहती है तथा स्वच्छ पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं है।

छात्रों ने कॉलेज में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार कई बार भोजन अधपका एवं अस्वच्छ पाया गया तथा दाल और सब्जियों में बाल एवं कीड़े मिलने की घटनाएं सामने आई हैं।

SFI ने कहा कि नर्सिंग जैसे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पाठ्यक्रम में अध्ययनरत छात्रों के स्वास्थ्य और पोषण के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बेहद गंभीर विषय है। कॉलेज प्रशासन को छात्रों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध करवाना चाहिए।

छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी अस्वीकार्य

SFI ने कहा कि महिला नर्सिंग कॉलेज में छात्राओं के लिए स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पेयजल और सैनिटरी पैड के उचित निस्तारण जैसी मूलभूत सुविधाओं का होना अनिवार्य है। छात्रों ने शिकायत में इन सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाया है।

छात्राओं का आरोप है कि मासिक धर्म के दौरान गंभीर पीड़ा होने के बावजूद उन्हें अवकाश नहीं दिया जाता तथा अनुपस्थित रहने पर जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा छात्राओं से भारी फर्नीचर उठवाने तथा सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

SFI ने कहा कि छात्राओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

छात्रों को शिकायत करने से रोकने के आरोप चिंताजनक

छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रशासन की अनुमति लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्याएं उठाने पर भी उन्हें धमकाया जाता है। शिकायत के अनुसार छात्रों को सरकारी अधिकारियों अथवा संबंधित विभागों से संपर्क करने पर शैक्षणिक कार्रवाई और मूल दस्तावेज़ रोकने की धमकी दी गई है।

SFI का स्पष्ट मत है कि किसी भी छात्र को अपनी समस्या रखने, शिकायत दर्ज करने या संबंधित सरकारी विभाग से न्याय मांगने से डराया-धमकाया नहीं जा सकता। यदि छात्रों को शिकायत करने पर दंडित या प्रताड़ित किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर मामला होगा।

कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली की भी हो जांच

छात्रों ने कॉलेज में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता तथा निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि निरीक्षण के समय अस्थायी रूप से प्राचार्य प्रस्तुत किया जाता है तथा निरीक्षण अधिकारियों के सामने छात्रों को क्या कहना है, इसके लिए पहले से निर्देश दिए जाते हैं।

SFI ने कहा कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है। संबंधित नियामक संस्थाओं को कॉलेज की मान्यता, प्राचार्य एवं शिक्षकों की योग्यता, फीस संरचना, हॉस्टल सुविधाओं, छात्रों के मूल दस्तावेज़ रखने की प्रक्रिया तथा अन्य सभी नियमों की जांच करनी चाहिए।

SFI की प्रमुख मांगें

SFI हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी मांग करती है कि:

1. क्रिश्चियन नर्सिंग कॉलेज कुल्लू के खिलाफ छात्रों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
2. कॉलेज की फीस एवं अन्य शुल्कों की पूरी जांच कर अनियमित वसूली पाए जाने पर छात्रों को राशि वापस की जाए।
3. छात्रों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज़ एवं डिग्री को रोकने अथवा रोकने की धमकी देने के आरोपों की जांच की जाए और छात्रों के दस्तावेज़ तत्काल उपलब्ध करवाए जाएं।
4. हॉस्टल, भोजन, पेयजल, शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था का स्वतंत्र निरीक्षण करवाया जाए।
5. कॉलेज में प्राचार्य एवं शिक्षकों की नियुक्ति तथा उनकी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की जांच की जाए।
6. छात्रों को अपनी शिकायत संबंधित सरकारी विभागों एवं नियामक संस्थाओं के समक्ष रखने की पूर्ण स्वतंत्रता और सुरक्षा दी जाए।
7. शिकायत करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक या शैक्षणिक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
8. छात्रों की शिकायतों की सुनवाई के लिए संबंधित विभाग द्वारा छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल बैठक आयोजित की जाए।
9. मामले की जांच पूरी होने तक छात्रों की पहचान और शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता सुनिश्चित की जाए।

SFI हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने कहा कि शिक्षा के नाम पर छात्रों का आर्थिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और उनके अधिकारों का दमन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी शिक्षण संस्थानों को भी कानून, नियामक मानकों और छात्रों के अधिकारों का पालन करना होगा।

SFI छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती है, तो SFI संबंधित विभागों एवं नियामक संस्थाओं के समक्ष मामला उठाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होगी।