सबकी खबर , पैनी नज़र

August 6, 2026 9:42 pm

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फ्री होल्ड पॉलिसी पर मुखर हुए अनिल विज, बोले— जरूरत पड़ी तो जनता के साथ धरने पर बैठूंगा

कैबिनेट में रुकवाया प्रस्ताव, मुख्यमंत्री से सभी पक्षों की बैठक बुलाने की अपील; कहा— पहले जनहित, फिर सरकार
चंडीगढ़:पवन चोपड़ा,हरियाणा की राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अम्बाला छावनी की प्रस्तावित फ्री होल्ड (लैंड) पॉलिसी को लेकर अपनी ही सरकार के सामने खुलकर असहमति जताई। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों की पंचायत को संबोधित करते हुए विज ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जनता की भावनाओं के अनुरूप नीति में संशोधन नहीं किया और लोगों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा, तो वह सरकार के साथ नहीं बल्कि अम्बाला छावनी की जनता के साथ धरने-प्रदर्शन में खड़े दिखाई देंगे।
उन्होंने कहा कि उनका पहला प्रयास आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्तावित नीति में व्यापक बदलाव कर इसे जनहितैषी बनवाने का होगा। यदि सरकार जनता की बात नहीं सुनती, तो लोगों को कानूनी लड़ाई के साथ-साथ लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
कैबिनेट में रुकवाया था फ्री होल्ड प्रस्ताव
अनिल विज ने खुलासा किया कि हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अम्बाला छावनी की फ्री होल्ड पॉलिसी मंजूरी के लिए लाई गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जिस क्षेत्र से वह सात बार विधायक चुने गए हैं, वहां की इतनी महत्वपूर्ण नीति तैयार करते समय उनसे कोई राय तक नहीं ली गई।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने नीति को मंजूरी दिलाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि पहले इस विषय पर विस्तृत बैठक बुलाई जाए, जिसमें उन्हें और नीति तैयार करने वाले सभी अधिकारियों को शामिल किया जाए। सभी पक्षों की राय सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। उनके विरोध के बाद यह एजेंडा फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
‘पूरी छावनी का मुद्दा, केवल सदर तक सीमित नहीं’
विज ने कहा कि यह मामला केवल सदर बाजार का नहीं बल्कि पूरे अम्बाला छावनी क्षेत्र के लाखों लोगों के संपत्ति अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने लोगों से किसी भ्रम में न रहने और एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
1977 के समझौते से जुड़ा है पूरा विवाद
अपने संबोधन में विज ने अम्बाला छावनी की भूमि व्यवस्था का इतिहास भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 5 फरवरी 1977 तक पूरा क्षेत्र कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन था। बाद में लगभग 1063 एकड़ भूमि नगर पालिका क्षेत्र में शामिल की गई। समझौते के तहत हरियाणा सरकार को भूमि का स्वामित्व मिलना था और बदले में सेना को 150 एकड़ जमीन उपलब्ध करानी थी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2000 के बाद उनके प्रयासों से यह शर्त पूरी कराई गई।
रजिस्ट्री व्यवस्था बनी लोगों की परेशानी का कारण
विज ने कहा कि पहले संपत्तियों की सामान्य रजिस्ट्री होती थी, लेकिन बाद में केवल भवन की रजिस्ट्री और जमीन का स्वामित्व सरकार के नाम दर्ज होने लगा। इसके कारण बैंक ऋण, नक्शा पास कराने, उत्तराधिकार और संपत्ति हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में हजारों लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तैयार हुई नई नीति
उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने फ्री होल्ड पॉलिसी तैयार करने का आश्वासन दिया था। इसी के आधार पर वर्तमान प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन इसमें कई ऐसे प्रावधान शामिल कर दिए गए हैं, जो आम नागरिकों के हितों के खिलाफ हैं।
इन शर्तों पर जताई कड़ी आपत्ति
अनिल विज ने कहा कि प्रस्तावित नीति का कानूनी विशेषज्ञों के साथ अध्ययन करने पर कई गंभीर कमियां सामने आईं। उनके अनुसार—
पूरी जमीन का भुगतान कलेक्टर रेट के आधार पर करना होगा।
आवेदन के साथ ही 25 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी।
शेष राशि एक वर्ष के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा।
भुगतान नहीं होने पर सरकार संपत्ति पर कब्जा कर उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेच सकती है।
फ्री होल्ड के लिए मूल दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि डेढ़ सौ वर्ष पुराने दस्तावेज अधिकांश परिवारों के पास उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में हजारों लोग अपने अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।
गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा सबसे बड़ा आर्थिक बोझ
विज ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास 1000 गज जमीन है और कलेक्टर रेट 60 हजार रुपये प्रति गज है, तो उसे करोड़ों रुपये जमा कराने होंगे। इतनी बड़ी राशि देना आम और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए संभव नहीं है। यह नीति राहत देने के बजाय आर्थिक संकट पैदा करेगी।
जनता से संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील
उन्होंने लोगों से शहर स्तर पर एक मजबूत संघर्ष समिति बनाने की अपील करते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अदालत में कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी और लोकतांत्रिक आंदोलन भी किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि यह किसी राजनीतिक दल की नहीं बल्कि आम नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की लड़ाई है।
‘जरूरत पड़ी तो सरकार के खिलाफ भी जनता के साथ खड़ा रहूंगा’
अपने संबोधन के सबसे चर्चित बयान में अनिल विज ने कहा कि यदि सरकार ने जनता की आवाज नहीं सुनी तो वह सरकार के बजाय अम्बाला छावनी की जनता के साथ धरने, प्रदर्शन और आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे पहले जनता का हित है और वह उसके लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे।
अब अगली कैबिनेट बैठक पर टिकी निगाहें
फ्री होल्ड पॉलिसी पर अनिल विज के इस सार्वजनिक विरोध ने हरियाणा की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें अगली कैबिनेट बैठक पर हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि सरकार मंत्री विज की आपत्तियों को स्वीकार कर नीति में संशोधन करती है या यह मुद्दा अदालत और सड़कों तक पहुंचकर बड़े जनआंदोलन का रूप लेता है।