सेब की खेती के सफल ट्रॉयल के बाद लगाए तीन हजार पौधे
शिमला (हिमदेव न्यूज़) 20 अप्रैल 2023: जशपुर जिले में अब सेब की बागवानी हो रही है। कभी यहां के किसान धान के अलावा किसी और फसल की खेती के बारे में सोचते भी नहीं थे। अब किसानों की सोच बदली है। उनका रुझान बागवानी फसलों की ओर बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के तुलनात्मक ठंडे जिले जशपुर में सेब उगाया जा रहा है। इस नए प्रयोग में राज्य सरकार भी किसानों को भरपूर सहयोग कर रही है। इसकी का परिणाम है कि 100 किसानों ने प्रति एकड़ के हिसाब से 30 हरमन-99 एवं अन्ना किस्म सेब के तीन हजार पौधे लगाए हैं।
खुशनुमा मौसम के कारण तरह-तरह की खेती के लिए जशपुर की पहचान बन चुकी है। इस वर्ष नाबार्ड जनजाति विकास निधि(टीडीएफ) की सहायता से नाबार्ड बाड़ी विकास कार्यक्रम अंतर्गत जशपुर जिले के मनोरा एवं जशपुर विकासखंड में फलदार पौधे के पौधरोपण के लिए 500 आदिवासी किसानों के साथ काम हो रहा है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में मनोरा विकासखंड के 3 ग्राम करदना, छतोरी एवं सैला के 100 किसानों की 100 एकड़ जमीन में प्रति एकड़ के हिसाब से 30 हरमन-99 एवं अन्ना किस्म सेब के तीन हजार पौधे लगाए गए हैं। 50 नाशपती कश्मीरी नख का माह-फरवरी 2023 में पौधरोपण किया जा चुका है। अगले वर्ष भी द्वितीय चरण के अंतर्गत 100 किसानों की बंजर जमीन में सेब और नाशपती का पौधरोपण किया जाएगा।
जिले की बंजर और खाली जमीन पर होगा सेब का उत्पादन सेब अन्ना हरमन- 99 वेरायटी का सेब जशपुर की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है। चाहे वह जमीन पथरीली, दोमट या फिर लाल ही क्यों न हो। पौधों का विकास भी अच्छी तरह से हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है की जिले में पैदा होने वाले सेब उसी टेस्ट, कलर और साइज का होगा, जैसा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में होता है। सेब की खेती की लागत इकाई प्रति हेक्टेयर 2 लाख 46 हजार 250 रुपए है। इसकी खेती को करने के इच्छुक किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। नाबार्ड और उद्यानिकी विभाग के द्वारा किसानों को मुफ्त में पौधे िदए जाते हैं। इसके अलावा खाद और सिंचाई के उपकरणों में पर्याप्त सब्सिडी भी दी जाती है। सेब की खेती के लिए नवंबर से फरवरी का समय सबसे बेहतर
सेब की खेती के लिए नवंबर से फरवरी तक पौधे लगाने का सही समय होता है। कृषि विवि पूसा कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद बताते हैं कि सेब की उन्नत खेती सामान्यतः ठंडे राज्यों में होती है। मैदानी क्षेत्र के लिए हरिमन 99 और अन्ना प्रजाति को विकसित की गई है। किसानों को हिमाचल प्रदेश से हरिमन 99 और अन्ना वेराइटी का पौधा दिलाया जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने सेबी की नई प्रजाति विकसित की है। साल 2019 से इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से प्रोत्साहित किया जा रहा है।







