सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बताया—डीबीटी से पारदर्शी वितरण, हिमाचल सहित सभी राज्यों में छात्रवृत्ति लाभार्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध
सोलन। शिमला संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक एवं प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया। सांसद ने केंद्र सरकार से पूछा कि इन योजनाओं के अंतर्गत देश, राज्य एवं जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनों, स्वीकृत छात्रवृत्तियों, लाभार्थियों की संख्या, निधि आवंटन तथा विशेष रूप से शिमला लोकसभा क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
इस प्रश्न का उत्तर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा में दिया। मंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति तथा प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं लागू की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में भेजा जाता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और धनराशि समय पर लाभार्थियों तक पहुंच रही है।
मंत्री ने बताया कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में केंद्र एवं राज्यों के बीच सामान्यतः 60:40 के अनुपात में वित्तीय भागीदारी होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश सहित कुछ विशेष राज्यों के लिए प्री मैट्रिक योजना में 90:10 का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आवेदन, सत्यापन, स्वीकृति एवं अस्वीकृति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाती है।
लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, शिमला जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में 2,668, 2023-24 में 2,668, 2024-25 में 2,870 तथा 2025-26 में 2,856 लाभार्थियों को योजना का लाभ मिला। वहीं प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 2022-23 में 2,104, 2023-24 में 2,104, 2024-25 में 2,539 तथा 2025-26 में 2,049 विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया गया।
सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छात्रवृत्ति योजनाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाया गया है, जिससे पात्र विद्यार्थियों को समयबद्ध तरीके से लाभ मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन योजनाओं से हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला संसदीय क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को आगे भी लाभ मिलता रहेगा।








