
जिसने देखा है इमारत को बनते हुए
वही जानता है महत्व
बुनियाद के पत्थरों का
आज जो देखते हैं हम ऊंची ऊंची
गगनचुंबी इमारतें
सबका भार उठा रखा है
इन बुनियाद के पत्थरों ने
लेकिन कोई इस पर ध्यान नहीं देता
सब खो जाते हैं
इमारत की बाहरी चकाचौंध में
वो तो दबा रहता है मिट्टी के नीचे
कोई देख नहीं पाता उसे
जोड़ता है इमारत को ज़मीन से
और भार भी सहता है उसका
ऐसे ही होते हैं
हर सफल व्यक्ति की
सफलता के पीछे भी
बुनियाद के पत्थर
जिन्हें कोई देखता नहीं है
मूल्यों की ताकतवर दीवार बनाते हैं जो
तैयार करते हैं हमें लड़ने को
ज़िंदगी की मुश्किलों से
जीतने को आँधियों तूफ़ानों से
ख़ुद रहकर अदृश्य ज़माने की नज़रों से
हमेशा हमारी सफलता की दुआ करते हैं
ये बुनियाद के पत्थर
और कोई नहीं हमारे माँ बाप हुआ करते हैं।
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