शिमला, चंडीगढ़ ,जालन्धर , गुरुग्राम सहित ज़िला स्तर पर 1 से 10 वर्षीय बच्चों के स्क्रीनिंग कैम्प द्वारा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर के लगातार बढ़ते बच्चों की संख्या कम करने का रहेगा प्रयास ।
गत सप्ताह फाउंडेशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर जसविंदर सिंह ने एम्स मोहाली की ताजी रिसर्च का हवाला देते हुए बच्चों को स्क्रीन टाइम कम करने के जागरूकता अभियान की शुरुआत शिमला व चंडीगढ़ से की थी, इसी दौरान डॉ जसविंदर में जनता की मांग पर अब फ्री कैंप लगाकर ऑटिज्म, ऐ डी एच डी व सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्चों की मदद का बीड़ा उठाया है । गौरतलब है कि गुरु नानक फाउंडेशन के फाउंड डॉक्टर जसविंदर सिंह जालंधर में ई बायोकेयर्स संस्थान में पिछले कई वर्षों से हर्बल फ्लावर रेमेडीज की रिसर्च में जुटे हुए हैं लाखों की संख्या में देश विदेश के ऑटिस्टिक बच्चों की मदद कर चुके हैं ।
उल्लेखनीय है कि यदि आपके बच्चों में भी तेज़ आवाज़ों से परेशानी होना छुए जाने की इच्छा न होना खाद्य पदार्थों की कुछ बनावटों से नापसंदगी दूसरों के साथ संवाद करने में परेशानी होना ऐसे शब्द बोलना जिनका कोई मतलब न हो अक्सर सुने जाने वाले शब्दों को दोहराना, लेकिन उन्हें समझ न पाना शब्दों में गलत अक्षरों पर ज़ोर देना लंबे समय तक वस्तुओं को अपने साथ रखना हाथों, उंगलियों या शरीर के अन्य अंगों को बार-बार हिलाना खिलौनों के साथ अजीब तरीके से खेलना अन्य बच्चों की तुलना में अधिक बार रोना या गुस्सा करना नई चीज़ों को जानने के प्रति उत्साह की कमी गले लगाने में मज़ा न आना जैसे कोई लक्षण दिखाई दे तो ऑटिज़्म के स्क्रीनिंग के लिये विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलने की सलाह दी जाती है।








