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March 14, 2026 3:41 am

एसडीएम नाहन द्वारा जारी निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए पत्रकारों केकुछ तथाकथित समूह द्वारा अवैध तरीके से चुनाव संपन्न करवाया गया।

सिरमौर प्रेस क्लब के चुनाव को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को इस चुनाव में कथित बाहरी पत्रकारों की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्ष पद के लिए राकेश नंदन और महासचिव पद के लिए
प्रताप सिंह ने नामांकन दाखिल किया था। बावजूद इसके, कार्यकारिणी को
सर्वसम्मति से चुने जाने का दावा किया गया, जो संदेह के घेरे में है।
चुनाव की प्रक्रिया को लेकर पत्रकारों के बीच असंतोष साफ नजर आ रहा है,
खासकर जब राज्य स्तर पर फर्जी पत्रकारों के खिलाफ अभियान जारी है। अब
देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाया है और क्या कोई
ठोस कार्रवाई की जाती है।
सिरमौर में फर्जी पत्रकारों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है, जिससे
पत्रकारिता की साख पर सवाल उठने लगे हैं। चंद सोशल मीडिया पर सक्रिय
पत्रकारों ने अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए ऐसे हथकंडे अपनाए
हैं, जिससे असली पत्रकारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस संदर्भ में सिरमौर के उपायुक्त सुमित खिमटा को 2 फरवरी को लिखित रूप
से पूरे मामले से अवगत करवाया गया था, लेकिन 20 फरवरी तक कोई ठोस कदम
नहीं उठाया गया। हैरानी की बात यह है कि चुनाव वे पत्रकार करवा रहे थे,
जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है । बावजूद इसके प्रशासन ने
चुप्पी साधे रखी।
निवर्तमान अध्यक्ष शैलेंद्र कालरा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा ऐतराज
जताते हुए कहा कि महज एक वेबसाइट खोलकर या सोशल मीडिया पेज बनाकर लोग खुद
को पत्रकार घोषित कर रहे हैं। एसडीएम के निर्देश की अवहेलना यह साफ
दर्शाती है कि निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए नियमों को दरकिनार किया
जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार ने सचिवालय में सोशल मीडिया
पेज और वेब पोर्टल के आधार पर खुद को पत्रकार बताने वालों पर प्रतिबंध
लगा दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब यह व्यवस्था राज्य स्तर
पर लागू हो सकती है, तो जिलों में इसे लागू करने में प्रशासनिक उदासीनता
क्यों बरती जा रही है? सवाल यह भी है कि जांच पूरी होने का इंतजार क्यों
नहीं किया गया? यही बात सभी को खटक रही है।