सबकी खबर , पैनी नज़र

July 19, 2026 12:05 am

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नशे से एचआईवी, हेपेटाईटिस बी और सी के मामले बढ़ना चिंता का विषय- उपायुक्त

शिमला 18 जुलाई, 2026, मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित
मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में एचआईवी, एड्स से जुड़े अभियानों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त ने कहा कि जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति के तहत जिला सामुदायिक संसाधन समूह कार्य कर रहा है। इसके तहत विभिन्न एनजीओ के माध्यम से प्रभावितों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ प्रभावितों को जोड़ते हुए स्वरोजगार के साधन विकसित करने के लिए मंच प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एड्स छुआछूत की बीमारी नहीं है और संक्रमित व्यक्तियों के साथ सहानुभूति और सहयोग आवश्यक है। इस प्रकार यह समिति स्वस्थ, जागरूक और सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।जिला एड्स प्रोग्राम अधिकारी डॉ. तहसीन ने बताया कि जिला में राष्ट्रीय एडस नियत्रंण संगठन की ओर से पीपॅल लिविंग एचआईवी का अनुमानित लक्ष्य 546 रखा गया है । इसमें से 441 लोगों की पहचान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कर ली है। ऐसे में अभी 105 लोगों की पहचान करना शेष हे। जिला में बीते वित्तीय वर्ष में 119 मामले एचआईवी के पाॅजिटिव दर्ज किए गए। इनमें 88 पुरूष, 30 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 17 मामले अभी तक सामने आएं हैं इनमें 12 पुरूष, 3 महिलाएं और 2 ट्रांसजेंडर है। जिला में 729 एचआईवी टेस्टिंग की गई है। इन टेस्ट में से केवल चार ही ट्रांसजेंडर आए।
बैठक में  बताया  गया कि  95:95:95: लक्ष्य के अंतर्गत 95 प्रतिशत एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को अपनी संक्रमण स्थिति की जानकारी हो, उनमें से 95 प्रतिशत नियमित एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) प्राप्त करें तथा उपचार प्राप्त कर रहे 99 प्रतिशत लोगों में वायरस का स्तर नियंत्रित (Viral Suppression) रहे। इस लक्ष्य की प्राप्ति से एचआईवी संक्रमण की रोकथाम और एड्स उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।
जिला में 7 इंटीग्रेटड काउंसलिंग टेस्टिंग सैंटर स्थापित किए गए है। इनमें आईजीएमसी, कमला नेहरू अस्पताल शिमला, ठियोग, रोहडू, रामपुर और सुन्नी अस्पताल में सैंटर शामिल है। यहां पर एचआईवी कन्फर्मेंशन टेस्ट किए जाते हैं।
नशे से एचआईवी, हेपेटाईटिस बी और सी के मामले बढ़ना चिंता का विषय- उपायुक्त*
अनुपम कश्यप ने कहा कि नशे के आदी युवाओं में एचआईवी के लक्षण देखने को मिल रहे है। सिरिंज का इस्तेमाल करके नशा लेने वाले युवा एचआईवी ग्रसित हो रहे हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय है कि सिरिंज के माध्यम से एचआईवी फैल रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि एचआईवी टेस्ट समय-समय पर करवाना चाहिए। इसके अलावा नशे के आदी युवा भी फैलते एचआईवी को लेकर सर्तक रहे। अब तो बच्चों में हेपेटाईटिस बी और सी के मामले में बढ़ रहे है , जो बच्चे सिरिंज के माध्यम से नशा लेते है। बच्चों के अभिभावक पूरी निगरानी रखे कि आपके बच्चे के पास सिरिंज आदि तो नहीं है। एचआईवी का अगर सही समय पर पता चल जाए और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार परहेज और दवा ली जाए तो व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि माता पिता, रिश्तेदारों, समाज के सभी हितधारकों को समझना होगा कि नशा एक बीमारी है। इसका सही इलाज तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग अपनी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए नशे को छोड़ने वाले बच्चे, युवाओं आदि को पूर्ण सहयोग करें। ऐसे में परिवार की भूमिका बहुत बड़ी हो जाती है। उपायुक्त ने कहा कि आईजीएमसी शिमला का ओएसटी केंद्र नशा मुक्ति, सामाजिक पुनर्वास और जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। यह केंद्र नशे की लत से प्रभावित लोगों को नया जीवन देने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
आईजीएमसी शिमला में ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) केंद्र
मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ यशपाल रांटा ने कहा कि  इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में संचालित ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) केंद्र नशीले ओपिओइड पदार्थों जैसे चिट्टा, हेरोइन और स्मैक की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा दे रहा है। यह केंद्र राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (छ।ब्व्) तथा हिमाचल प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
इस केंद्र में ओपिओइड पर निर्भर व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्श, मनोसामाजिक सहायता तथा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रतिस्थापन दवाओं के माध्यम से उपचार प्रदान किया जाता है। उपचार का उद्देश्य मरीज की नशीले पदार्थों पर निर्भरता कम करना, वापसी के लक्षणों ( Withdrawal Symptoms) को नियंत्रित करना तथा उसे सामान्य और स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाना है।
ओएसटी केंद्र एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि उपचार से इंजेक्शन द्वारा नशा करने की प्रवृत्ति में कमी आती है। यहां मरीजों को नियमित स्वास्थ्य जांच, परामर्श, दवा वितरण और फॉलो-अप की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
ये रहे मौजूद
बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, स्पार्क एनजीओ प्रोजेक्ट मैनेजर दीपिका विमल, मेडिकल अफसर डॉ. भारती, आशी संस्था के प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।