सबकी खबर , पैनी नज़र

July 17, 2026 6:43 pm

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जिला के हर ब्लाक में  बनेंगे माॅडल विलेज- उपायुक्त

शिमला 17 जुलाई, 2026, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग और आतमा प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक आयोजित
केबल टुटू खंड में बनेंगे दो माॅडल विलेज
बाल देखभाल संस्थानों में प्राकृतिक खेती के गुर सीखेंगे बच्चे
जिला में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में माॅडल विलेज स्थापित किए जाएंगे। जिला के हर खंड  में एक गांव ऐसे चिन्हित किया जाएगा। इसके केबल टुटू खंड में दो माॅडल विलेज स्थापित किए जाएंगे। ये फैसला शुक्रवार को नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत जिला शिमला में वार्षिक योजना की समीक्षा के दौरान लिया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि  इन माडल विलेज में कृषि विभाग, उद्यान विभाग, मत्सय पालन विभाग और पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं को संयुक्त लाभ किसानों को पहुंचाने के लिए किया जाएगा। इस कार्य को विभिन्न विभागों की योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास विभाग के पंचायती राज प्रणाली से जोड़ा जाएगा ताकि पंचायती राज प्रणाली के जन प्रतिनिधियों की सहभागिता अधिक से अधिक सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने कहा कि नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत विकसित होने वाले मॉडल विलेज प्राकृतिक खेती के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। इन गांवों में किसान प्रशिक्षण, अनुभव साझा करने तथा नवीन कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान की व्यवस्था होगी। यह पहल आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत बनेंगे मॉडल विलेज
भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला में मॉडल विलेज (आदर्श ग्राम) विकसित किए जाएंगे। इन मॉडल विलेजों में किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मॉडल विलेज में किसानों के खेतों पर प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट विकसित किए जाएंगे, जहां जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग और अन्य प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इससे आसपास के किसान भी इन तकनीकों को सीखकर अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि किसानों की आय दौगुना करने और आत्मनिर्भर हिमाचल के संकल्प में प्राकृतिक खेती का अहम योगदान है। ऐसे में अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ सके और अपनी आर्थिकी मजबूत करे। इस दिशा में सभी विभागों को एकजुट होकर कार्य पर जोर देना होगा। दिन प्रतिदिन प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों में आम लोगों को उत्साह बढ़ रहा है।
बैठक में आतमा परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा भी गई।
7000 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ेगे
जिला शिमला में इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष में 2025-26 में 50 चिन्हित क्लस्टरों में लगभग 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिससे 7,000 किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले में लगभग 4.21 करोड़ रुपये  किए गए। अब जिला में 18 नए क्लस्टर बनाएं जाएंगे। ऐसे में जिला में क्लस्टर की संख्या 68 होगी। इन पर 4 करोड़ 27 लाख रूपये खर्च किए जाएंगे। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले में 33 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित किए गए हैं तथा 136 से अधिक प्रशिक्षित कृषि सखियों ( काम्यूनिटी रिर्सोस पर्सन) को किसानों तक तकनीकी मार्गदर्शन और प्राकृतिक खेती से जुड़े आवश्यक जैविक इनपुट उपलब्ध कराने के लिए तैनात किया गया है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये की सहायता दो वर्षों तक प्रदान की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला शिमला के 6,720 किसानों को इस प्रोत्साहन राशि से लाभान्वित किया गया है। अब तक जिले में 6,720 से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। साथ ही प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के लिए आरएचआरएस एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा तथा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रोहड़ू को प्रशिक्षण संस्थानों के रूप में जोड़ा गया है, जहां किसानों और कृषि सखियों को जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र सहित अन्य प्राकृतिक खेती तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कृषि सखियों को प्रति माह 5,000 रुपये मानदेय
योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर से दो अनुभवी प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का चयन कृषि सखी सीआरपी के रूप में किया जाता है। वहीं प्रत्येक तीन क्लस्टरों के लिए एक बायो-रिसोर्स सेंटर स्थापित किया जाता है, जो किसानों को जैविक इनपुट उपलब्ध कराने और तकनीकी जानकारी के प्रसार का कार्य करता है। कृषि सखियों एवं बीआरसी संचालकों का अंतिम चयन जिला स्तरीय मिशन समिति  की अनुशंसा के आधार पर किया जाता है।
योजना के अंतर्गत कृषि सखियों को प्रति माह 5,000 रुपये मानदेय (15 कार्य दिवसों के लिए) प्रदान किया जाता है, जबकि प्रत्येक बायो-रिसोर्स सेंटर की स्थापना हेतु 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
बच्चों को  प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण
जिला के 12 बाल देखभाल केंद्रों में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए  संस्थानों में प्राकृतिक खेती के लिए स्थान चिन्हित किया जाएगा, जिन संस्थानों में स्थान नहीं होगा वहां पर ग्रोईग बैग में प्राकृतिक खेती के बारे में सिखाया जाएगा। इन स्थानों में आतमा प्रोजेक्ट के सहायक तकनीकी प्रबंधक एंव खंड तकनीकी प्रबंधक को अनिवार्य रूप से जाना होगा। बच्चों को जीवामृत के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि स्वयं प्राकृतिक उत्पादों को तैयार कर सके और कृषि के प्रति रूचि को विकसित कर सके।
ये रहे मौजूद
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा, एडीएम लाॅ एंड आर्डर पंकज शर्मा, परियोजना निदेशक (आतमा) देवी चंद कश्यव, उप निदेशक परियोजना जीत सिंह ठाकुर, जिला परियोजना निदेशक  अमित ठाकुर, नरेश चैहान,  रिसर्च सेंटर मशोबरा  में सहायक निदेशक नरेश ठाकुर,  केवीके केेंद्र राहेड़ू डा उषा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।