*✴️कलियुगाब्द – 5128*
*✴️संवत – रौद्र*
*✴️संवत्सर राजा – गुरु*
*✴️संवत्सर मंत्री – मङ्गल*
*✴️दिनांक – 21 जुलाई 2026*
*✴️दिन – मंगलवार*
*✴️विक्रम संवत् – 2083*
*✴️अयन – दक्षिणायन*
*✴️ऋतु – वर्षा*
*✴️मास – श्रावण*
*✴️पक्ष – शुक्ल*
*✴️तिथि – अष्टमी प्रातः 05:16 जुलाई 22 तक, तत्पश्चात् नवमी*
*✴️नक्षत्र – चित्रा रात्रि 08:49 तक तत्पश्चात् स्वाती*
*✴️योग – सिद्ध शाम 06:25 तक तत्पश्चात् साध्य*
*✴️राहुकाल – दोपहर 03:54 से शाम 05:34 तक*
*✴️सूर्योदय – 05:53*
*✴️सूर्यास्त – 07:14*
*✴️दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*✴️ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:27 से प्रातः 05:10 त*
*✴️अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:07 से दोपहर 01:00 तक*
*✴️निशिता मुहूर्त – मध्यरात्रि 12:12 से मध्यरात्रि 12:55 तक*
*✴️व्रत पर्व विवरण – मासिक दुर्गाष्टमी*
*✴️विशेष – अष्टमी को नारियल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🌞चातुर्मास्यव्रत महिमा🌞*
*✴️25 जुलाई 2026 शनिवार से चातुर्मास प्रारंभ।*
*✴️आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन उपवास करके मनुष्य भक्तिपूर्वक चातुर्मास्य व्रत प्रारंभ करे। एक हजार अश्वमेघ यज्ञ करके मनुष्य जिस फल को पाता है, वही चातुर्मास्य व्रत के अनुष्ठान से प्राप्त कर लेता है।*
*✴️इन चार महीनों में ब्रह्मचर्य का पालन, त्याग, पत्तल पर भोजन, उपवास, मौन, जप, ध्यान, स्नान, दान, पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं।*
*✴️व्रतों में सबसे उत्तम व्रत है – ब्रह्मचर्य का पालन। ब्रह्मचर्य तपस्या का सार है और महान फल देने वाला है। ब्रह्मचर्य से बढ़कर धर्म का उत्तम साधन दूसरा नहीं है। विशेषतः चतुर्मास में यह व्रत संसार में अधिक गुणकारक है।*
*✴️मनुष्य सदा प्रिय वस्तु की इच्छा करता है। जो चतुर्मास में अपने प्रिय भोगों का श्रद्धा एवं प्रयत्नपूर्वक त्याग करता है, उसकी त्यागी हुई वे वस्तुएँ उसे अक्षय रूप में प्राप्त होती हैं। चतुर्मास में गुड़ का त्याग करने से मनुष्य को मधुरता की प्राप्ति होती है। ताम्बूल का त्याग करने से मनुष्य भोग-सामग्री से सम्पन्न होता है और उसका कंठ सुरीला होता है। दही छोड़ने वाले मनुष्य को गोलोक मिलता है। नमक छोड़ने वाले के सभी पूर्तकर्म (परोपकार एवं धर्म सम्बन्धी कार्य) सफल होते हैं। जो मौनव्रत धारण करता है उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करता।*
*✴️चतुर्मास में काले एवं नीले रंग के वस्त्र त्याग देने चाहिए। नीले वस्त्र को देखने से जो दोष लगता है उसकी शुद्धि भगवान सूर्यनारायण के दर्शन से होती है। कुसुम्भ (लाल) रंग व केसर का भी त्याग कर देना चाहिए।*
*✴️आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रीहरि के योगनिद्रा में प्रवृत्त हो जाने पर मनुष्य चार मास अर्थात् कार्तिक की पूर्णिमा तक भूमि पर शयन करें । ऐसा करने वाला मनुष्य बहुत से धन से युक्त होता और विमान प्राप्त करता है, बिना माँगे स्वतः प्राप्त हुए अन्न का भोजन करने से बावली और कुआँ बनवाने का फल प्राप्त होता है। जो भगवान जनार्दन के शयन करने पर शहद का सेवन करता है, उसे महान पाप लगता है। चतुर्मास में अनार, नींबू, नारियल तथा मिर्च, उड़द और चने का भी त्याग करें । जो प्राणियों की हिंसा त्याग कर द्रोह छोड़ देता है, वह भी पूर्वोक्त पुण्य का भागी होता है।*
*✴️चातुर्मास्य में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करें । परनिंदा को सुनने वाला भी पापी होता है।*
*परनिंदा महापापं परनिंदा महाभयं।*
*परनिंदा महद् दुःखं न तस्याः पातकं परम्।।*
*✴️‘परनिंदा महान पाप है, परनिंदा महान भय है, परनिंदा महान दुःख है और पर निंदा से बढ़कर दूसरा कोई पातक नहीं है।’ *(स्कं. पु. ब्रा. चा. मा. 4.25)*
*🌞गणेश जी को ही क्यों दिया जाता है शादी का पहला निमंत्रण, इन देवताओं को भी दे सकते हैं 🌞*
*✴️हिंदू धर्म में विवाह से पहले शादी का सबसे पहला निमंत्रण किन्हीं खास देवी देवता या फिर कुलदेवी को दिया जाता है. ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे का खास महत्व और नियम क्या है।*
*✴️हिंदू धर्म शास्त्रों में शादी-विवाह को लेकर कई तरह के रीति-रिवाज माने जाते हैं. इन्हीं में एक परंपरा शादी के कार्ड के पहले निमंत्रण को लेकर भी है. अक्सर हम सभी ने देखा या किया होगा कि शादी का पहला कार्ड गणेश जी को दिया जाता है या गणेश जी के मंदिर में रखा जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है?*
*✴️ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है. वहीं, हिंदू धर्म में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से ही किया जाता है. शास्त्रो में गणेश जी को प्रथम पूजनीय भी माना गया है. इसलिए विवाह का पहला निमंत्रण भी भगवान गणेश को दिया जाता है ताकि विवाह का कार्य बिना किसी विघ्न के पूरा हो सके.*
*✴️ज्योतिषियों के अनुसार शादी का सबसे पहला निमंत्रण रिद्धि और सिद्धि के कारक भगवान गणेश को देते हैं. दरअसल ऐसा करने से भगवान गणेश अवश्य ही विवाह में अदृश्य रूप में शामिल होते हैं. जिससे कि उनकी कृपा से विवाह में कोई बाधा नहीं आती है. भ्गावान गणेश को निमंत्रण देने समय इस मंत्र का जाप अवश्य करें.*
*✴️वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ .*
*निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥*
*✴️ज्योतिषियों के अनुसार यदि नजदीक में भगवान गणेश का मंदिर ना हो तो विवाह का पहला कार्ड भगवान विष्णु या फिर शिव को भी दिया जा सकता है. यह व्यक्ति की सुविधा पर निर्भर करता है. भगवान विष्णु को शादी का निमंत्रण देने समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करें.*
*✴️मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुणध्वजः.मङ्गलम् पुण्डरी काक्षःमङ्गलाय तनो हरिः॥*
*✴️ज्योतिषियों का मानना है कि विवाह का निमंत्रण वर वधू को देना चाहिए. यदि उनकी अनुपस्थिति हो तो वर वधू के माता पिता भी भगवान को निमंत्रण दे सकते हैं. इस दौरान विधि विधान से पूजा करना चाहिए. जिसके बाद विवाह के सफलतापूर्वक संपन्न होने की कामना करें और फिर शादी का कार्ड भगवान को सौंप दें.*
*✴️बता दें कि कई जगहों पर कुल देवी देवताओं को शादी का कार्ड सबसे पहले निमंत्रण के तौर पर दिया जाता है जिसके बाद ही देवी देवताओं को शादी का कार्ड देते हैं. एक और खास बात कि देवी देवताओं को विवाह का निमंत्रण देने के बाद पितरों को भी विवाह का आमंत्रण अवश्य दें।*
*🌞दैनिक राशिफल🌞*
*21 जुलाई, 2026, मंगलवार*
*✴️मेष राशि : समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलता। अपने बारी का इंजतार करें। संतान के सहयोग से कार्य पूरे होंगे। नए लोगों से संपर्क बनेगा जो भविष्य में लाभदायक रहेगा। वाहन सुख संभव है।*
*✴️वृष राशि : जो लोग दूसरे के लिए मांगते हैं, उन्हें कभी अपने लिए नहीं मांगना पड़ता। माता के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। किसी के बहकाने से सपने संबंध तोडऩे से बचें। पैर में चोट लग सकती है। समाज में नाम होगा।*
*✴️मिथुन राशि : जिन लोगों का सहयोग आप ने किया था आज वे ही आप से मुंह फेर रहे हैं। बीमारी में दवाई असर नहीं करेगी। बेहतर होगा अपना डॉक्टर बदलें या किसी योग्य व्यक्ति से सलाह लें। नए भवन में जाने के योग हैं।*
*✴️कर्क राशि : अपने स्वभाव में परिवर्तन लाना बहुत जरूरी है। कार्यस्थल पर योजना लाभप्रद रहेगी। पड़ोसियों की मदद लेनी पड़ सकती है। क्रोध की अधिकता से परिजन ना खुश होंगे। शेयर बाजार में निवेश से लाभ होगा।*
*✴️सिंह राशि : किसी के बहकावे में आप बहुत जल्द आ जाते हैं। समय रहते जरूरी कार्य पूरे करें। निजी जीवन में दुसरों को प्रवेश न दें। पिता के व्यवहार से मनमुटाव होगा। जीवनशैली में परिवर्तन के योग हैं। पुरानी दुश्मनी के चलते विवाद संभव हैं।*
*✴️कन्या राशि : सोचे कार्य समय पर होने से मन प्रसन्न रहेगा। अपने वाक् चातुर्य से सभी काम आसानी से करवा लेंगे। कार्यस्थल पर अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगे। प्रेम-प्रसंग के चलते मन उदास होगा।*
*✴️तुला राशि : आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। जीवनशैली में आए परिवर्तन से खुश होंगे। आजीविका के नए स्रोत स्थापित होंगे। पारिवारिक सोहार्द बना रहेगा। मांगलिक समारोह में सक्रिय भूमिका रहेगी।*
*✴️वृश्चिक राशि : अपने हिसाब से जिंदगी जीना पसंद करेंगे। जो लोग आप के कार्यों की सराहना करते थे, वे आपका विरोध करेंगे। भूमि-भवन संबंधी विवादों का अंत होगा। पिता के व्यवसाय में रुचि कम रहेगी।*
*✴️धनु राशि : समय रहते अपने कार्य पूर्ण करें। पारिवारिक लोगों का सहयोग न मिलने से कार्य प्रभावित होंगे। घर में वास्तु अनुरूप परिवर्तन करें तो पारिवारिक तनाव खत्म होगा। फैक्ट्री में प्रवेश द्वार पर पंचमुखी हनुमानजी की तस्वीर लगायें, चमत्कारिक लाभ होगा।*
*✴️मकर राशि : व्यस्तता के कारण सेहत को न भूलें। अपने जीवनसाथी से नम्रता से बात करें और आपकी दोनों की वार्तालाप में स्नेह झलके न कि बनावटी बातें करें। वाणी में मधुर रहें। यात्रा के योग हैं।*
*✴️कुम्भ राशि : सेहत को नजरअंदाज न करें। आनावाश्यक किसी को परेशान करना अच्छी बात नहीं है। मेहमानों की खातिरदारी करना पड़ेगी। अपने संपर्कों से रुके कार्य पूरे होंगे। बहनों के विवाह की चिंता रहेगी।*
*✴️मीन राशि : जल्दबाजी में किये फैसलों से भारी नुकसान हो सकता है। परिवार में आप की बातों को सुना जायेगा। धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता होगी। जीवनसाथी के स्वास्थ में सुधार होगा। परीक्षा परिणाम अनुकूल होंगे।*
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*✴️ll जय श्री राम ।।”✴️*
*आचार्य विजय*
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