सबकी खबर , पैनी नज़र

July 3, 2026 6:20 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

July 3, 2026 6:20 pm

एचपीयू में सहायक प्रोफेसर (कॉमर्स) भर्ती पर एसएफआई का बड़ा खुलासा: अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदन और एम.कॉम. पूर्ण किए बिना अभ्यर्थी को मिली नियुक्ति?

“एचपीयू में सहायक प्रोफेसर (कॉमर्स) भर्ती पर एसएफआई का बड़ा खुलासा: अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदन और एम.कॉम. पूर्ण किए बिना अभ्यर्थी को मिली नियुक्ति नियुक्ति रद्द करने, एफआईआर दर्ज करने और तत्कालीन कुलपति की भूमिका की न्यायिक जांच की मांग”

शिमला, 3 जुलाई। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने कुलपति को कुलसचिव के माध्यम से एक विस्तृत शिकायत-पत्र सौंपते हुए विज्ञापन संख्या Rectt.17/2019 दिनांक 30.12.2019 के अंतर्गत एच.पी.यू. डिपार्टमेंट ऑफ इवनिंग स्टडीज़ में सहायक प्रोफेसर (कॉमर्स) की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के अपने नियमों, विभागीय निर्णयों तथा वैधानिक प्रावधानों के विपरीत हुई, जिससे हजारों पात्र अभ्यर्थियों के संवैधानिक एवं समान अवसर के अधिकार प्रभावित हुए हैं। एसएफआई ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, नियुक्ति निरस्त करने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

एसएफआई ने बताया कि 30 दिसंबर 2019 को जारी विज्ञापन संख्या Rectt.17/2019 के माध्यम से डिपार्टमेंट ऑफ इवनिंग स्टडीज़ में सहायक प्रोफेसर के चार पद (UR-1, UR(DSP)-1, OBC-1 एवं SC-1) विज्ञापित किए गए थे।

शिकायत के अनुसार विपिन कुमार भुलाल ने SC (Open) श्रेणी के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन संख्या 605048210 के माध्यम से 24 जनवरी 2020 को आवेदन किया। विज्ञापन की स्पष्ट शर्तों के अनुसार आवेदन की हार्ड कॉपी 15 फरवरी 2020 तक विश्वविद्यालय में प्राप्त होना अनिवार्य थी। किंतु विश्वविद्यालय की भर्ती शाखा के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उक्त आवेदन 26 फरवरी 2020 को डायरी संख्या 269 के अंतर्गत प्राप्त हुआ। एसएफआई ने सवाल उठाया है कि जब आवेदन निर्धारित अंतिम तिथि के बाद प्राप्त हुआ, तब उसे प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त क्यों नहीं किया गया तथा किस अधिकारी के आदेश पर उसे भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आवेदन की अंतिम तिथि तक संबंधित अभ्यर्थी के पास कॉमर्स विषय में परास्नातक (M.Com.) की अनिवार्य डिग्री उपलब्ध नहीं थी। आवेदन-पत्र के अनुसार वह उस समय इग्नू से एम.कॉम. की पढ़ाई कर रहा था। यद्यपि उसके पास MBA एवं Ph.D. की उपाधियाँ थीं, किंतु विज्ञापित विषय कॉमर्स में आवश्यक परास्नातक योग्यता उपलब्ध नहीं थी। एसएफआई का कहना है कि ऐसे अभ्यर्थी को पात्र घोषित करना भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

एसएफआई ने शिकायत में उल्लेख किया है कि 6 अक्टूबर 2020 को एचपीयू बिजनेस स्कूल की अकादमिक समिति ने निर्णय लिया था कि प्रबंधन विषय के शिक्षण पदों के लिए केवल Management Graduates/Doctorates ही पात्र होंगे तथा किसी अन्य विषय को Management का Allied Subject नहीं माना जाएगा। यह निर्णय 7 अक्टूबर 2020 को Dean of Studies को विधिवत भेजा गया।

इसके पश्चात 4 नवंबर 2020 को वाणिज्य विभाग की Department Council ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि M.Com. एवं M.Phil. (Commerce) के अध्यापन हेतु Commerce का कोई Allied Subject नहीं है। यह निर्णय 5 नवंबर 2020 को Dean of Studies को लिखित रूप से भेज दिया गया। एसएफआई का कहना है कि यह निर्णय संबंधित भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पात्रता के परीक्षण से पहले विश्वविद्यालय के आधिकारिक अभिलेखों का हिस्सा बन चुका था।

संगठन का आरोप है कि इन दोनों विभागीय निर्णयों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया के दौरान MBA को Commerce का Allied Subject मानते हुए संबंधित अभ्यर्थी को पात्र घोषित कर दिया गया, जबकि उसी समय विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में Commerce का कोई Allied Subject स्वीकार नहीं किया गया था। एसएफआई के अनुसार यह विश्वविद्यालय के आधिकारिक अभिलेखों में गंभीर विरोधाभास को दर्शाता है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि 17 से 21 जून 2021 के बीच चयन समिति द्वारा साक्षात्कार आयोजित किए गए तथा 21 जून 2021 को तत्कालीन कुलपति द्वारा नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। एसएफआई ने आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की धारा 11(i) के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति का वैधानिक अधिकार Executive Council में निहित है, जबकि धारा 12-C(7) के अनुसार कुलपति अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग नियुक्ति करने के लिए नहीं कर सकते। इसलिए संगठन ने तत्कालीन कुलपति द्वारा Executive Council की शक्तियों के कथित अतिक्रमण की न्यायिक जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

एसएफआई ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में भर्ती संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी किया गया है, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

संगठन ने आगे कहा कि 16 जुलाई 2022, अर्थात नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने के लगभग एक वर्ष बाद, कुलसचिव द्वारा एक अधिसूचना जारी कर Management एवं Commerce को Allied Subjects घोषित किया गया। एसएफआई का कहना है कि नियुक्ति के समय ऐसी कोई अधिसूचना अस्तित्व में नहीं थी। बाद में 06 जनवरी 2023 को माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा CWP No. 5794/2022 (Dr. Virender Kaushal & Others vs. State of H.P. & Others) में पारित आदेश के अनुपालन में विश्वविद्यालय ने 26 जून 2023 को उक्त अधिसूचना वापस ले ली।

एसएफआई ने कहा कि यदि अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदन को स्वीकार किया गया, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के अभाव के बावजूद अभ्यर्थी को पात्र घोषित किया गया, विभागीय निर्णयों की अनदेखी की गई तथा नियुक्ति वैधानिक प्रक्रिया से हटकर की गई, तो यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा मामला है, जिसकी निष्पक्ष एवं आपराधिक जांच आवश्यक है।

एसएफआई की प्रमुख मांगें

1. सहायक प्रोफेसर (कॉमर्स) की उक्त नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त (Quash) की जाए।

2. पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की जाए।

3. यह सार्वजनिक किया जाए कि निर्धारित अंतिम तिथि के बाद प्राप्त आवेदन को किस अधिकारी के आदेश से स्वीकार किया गया तथा उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

4. वाणिज्य विभाग की Department Council द्वारा Commerce का कोई Allied Subject न होने का निर्णय लेने के बावजूद संबंधित अभ्यर्थी को पात्र घोषित करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं उत्तरदायी व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

5. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की धारा 11(i) के तहत नियुक्ति करने संबंधी Executive Council की वैधानिक शक्तियों के तत्कालीन कुलपति द्वारा कथित अतिक्रमण के संबंध में स्वतंत्र न्यायिक जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

6. विश्वविद्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक अनियमितताओं का आर्थिक बोझ विद्यार्थियों पर न डाला जाए तथा हाल ही में की गई फीस वृद्धि तत्काल वापस ली जाए।

अंत में एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इस शिकायत पर समयबद्ध, निष्पक्ष एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं करता, तो संगठन छात्र समुदाय के साथ व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन चलाएगा तथा पूरे प्रकरण को राज्य सरकार, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तथा अन्य सक्षम संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाओं के समक्ष भी उठाएगा।