शिमला हिमदेव न्यूज़ 01 फरवरी 2023: कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा राहुल गाँधी के नेतृत्व में तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू होकर 136 दिनों के बाद श्रीनगर में जाकर समाप्त हो गई। यद्यपि यात्रा से राहुल गाँधी तथा कांग्रेस की छवि को पुनर्जीवित करने में सकारात्मक भूमिका निभाई है, परंतु यात्रा की सफलता का मूल्यांकन अभी करना जल्दबाजी होगा। यात्रा का एक मात्र उद्देश्य केवल राहुल गाँधी की छवि को उभारना ही नहीं बल्कि इस का एक अन्य उदेश्य हाल ही में होने वाले 9 राज्यों के विधान सभाओं के चुनावों में एक सकारात्मक माहौल बनाना तथा कार्यकर्ताओं में एक ऊर्जा और जोश भरना भी है । इन 9 राज्यों में से अभी केवल दो राज्यों में ही काँग्रेस की सरकार है, यात्रा की सफलता राज्यों के चुनावों के नतीजो में देखने को मिलेगी, यदि काँग्रेस अधिकतर राज्यों में जीत दर्ज करती है तो यह जीत पार्टी के लिए उत्साह तथा 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव के लिए एक सकारात्मक भूमिका तैयार कर सकती है तथा बी.जे .पी. को चुनौती पेश कर सकती है । यदि हम पिछले दो लोकसभा चुनावों की बात करे तो काँग्रेस का प्रदर्शन जिस रूप में स्वतंत्रता के बाद एक दल के प्रभुत्व के रूप में देखने को मिलता था,तथा पार्टी अधिकतर चुनाव जीतने में कामयाब रहती थी, पिछले 2 लोकसभा चुनाव में 2014 के बाद एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका निभाने में असफ़ल रही है । अतः इस खोई हुई पार्टी की छवि को पाने के लिए यात्रा एक अच्छा प्रयास है,लेकिन यात्रा का लाभ राजनीतिक रूप से और भी अधिक लिया जा सकता था यदि बी.जे .पी. ,नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह को नफरत की दुकान के बजाय अधिक से अधिक मुद्दा बेरोजगारी, गरीबी, स्वास्थ्य तथा अन्य विकासात्मक पहलुओं को बनाया जाता, क्योंकि राजनीतिक यात्रा की सफलता चुनावों में ही देखने को मिलती है, तथा यह यात्रा आज़ादी से पहले तथा आज़ादी के बाद की यात्रायों से कई मायनों में भिन्न है ।
लीलाधर ( पी.एच.डी)(एच.पी.यु. छात्र)

