सबकी खबर , पैनी नज़र

October 7, 2026 6:08 pm

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SIR के नाम पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के खिलाफ SFI HPU का धरना प्रदर्शन

शिमला, 7 अक्टूबर 2026:आज स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा पिंक पेटल चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन देशभर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए SFI इकाई के सह-सचिव कॉमरेड किशोर ने कहा कि SIR के नाम पर मतदाता सूचियों से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने की प्रक्रिया ने देशभर में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता का नाम लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक अधिकार और राजनीतिक भागीदारी का आधार है। यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसके मतदान के अधिकार पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि SFI मतदाता सूची के शुद्धिकरण के उद्देश्य का विरोध नहीं करता, लेकिन ऐसी किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और नागरिकों को पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है। SFI का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटने से लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।
कॉमरेड किशोर ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति का भी उल्लेख किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से संबंधित कई निर्णयों, जिनमें Form-6 से संबंधित मुद्दा भी शामिल है, पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 से संबंधित बदलाव भी गंभीर चर्चा का विषय बने हैं। रिपोर्टों के अनुसार Form-6 से जुड़े SIR declaration को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज की थी और बाद में चुनाव आयोग ने संबंधित व्यवस्था को वापस लिया। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR से संबंधित एक अलग declaration जोड़ा गया था।
SFI ने मांग की कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों की प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की जाए, नागरिकों को अपना नाम दोबारा दर्ज कराने और आपत्ति दर्ज करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णयों और आपत्तियों को सार्वजनिक किया जाए।
SFI इकाई ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास सर्वोपरि है। मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में नागरिकों के मतदान के अधिकार और संवैधानिक मूल्यों की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए।