ऐग्रीकल्चर एजुकेशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण विषय…
बीएससी ऐग्रीकल्चर में प्रवेश में कुछ वर्षों से एक बड़ी समस्या आ रही थी। स्कूल शिक्षा में कृषि के छात्रों के सामने थी अपात्रता की समस्या। 12वीं में अलग-अलग विषय संयोजन ऐग्रीकल्चर, बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिज़िक्स, मैथ्स तथा अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियमों के कारण, अलग-अलग पात्रता के कारण कई योग्य छात्र और छात्राएँ, जो ऐग्रीकल्चर, बीएससी ऐग्रीकल्चर की शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे, वो पिछड़ जाते थे।
पिछले कुछ दिनों से विद्यार्थियों और उनके पेरेंट्स ने अलग-अलग माध्यमों से अपनी ये चिंता व्यक्त की थी। सोशल मीडिया पर भी विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा जाहिर की थी और कुछ लोगों ने भी अपनी इस चिंता को बताया था। इसके बाद मैंने DG-ICAR को और उनकी टीम को ये निर्देश दिया कि इस समस्या का समाधान अत्यंत आवश्यक है ताकि कृषि के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी अनावश्यक रूप से न पिछड़ें।
मैं DG-ICAR और उनकी टीम को बधाई देता हूँ कि उन्होंने यूनिवर्सिटी और उनके बेसिस से चर्चा करके इस समस्या का समाधान निकाला है।
कृषि विश्वविद्यालयों की जितनी भी ऐग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज़ हैं देश में, क्योंकि सेंट्रल यूनिवर्सिटी तो तीन हैं। बाकी राज्य सरकारें ऐग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी चलाती हैं। उन सभी ऐग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में 20% जो स्नातक की सीटें हैं वो ICAR द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से भरी जाएँगी और कृषि विद्यार्थी और उनके पेरेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी।








