सबकी खबर , पैनी नज़र

May 3, 2026 6:37 pm

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में दो दिवसीय उत्सव ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ का होगा आगाज

शिमला: 03 मई, 2026, ‎हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कल से गूंजेंगे लोक संस्कृति के स्वर; SFI के दो दिवसीय उत्सव ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ का होगा आगाज
‎भारत की विविध संस्कृति, लोक परंपराओं और छात्र एकजुटता को समर्पित उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ कल से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU), शिमला के प्रांगण में शुरू होने जा रहा है। भारतीय छात्र संघ (SFI) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय उत्सव अपनी विशिष्टता और वैचारिक गहराई के लिए पूरे क्षेत्र में पहचाना जाता है।
‎अनेकता में एकता का जीवंत मंच आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक कलाएं विलुप्त हो रही हैं, वहीं SFI का यह मंच पुरानी वाद्ययंत्रों, पारंपरिक पोशाकों और लुप्त होती लोक कलाओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास करता है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों की सांस्कृतिक झलक के साथ-साथ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे अन्य राज्यों के छात्र भी अपनी लोक संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं। यह मंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ‘अनेकता में एकता’ के उस विचार को पुख्ता करता है जो भारत की असली पहचान है।
‎लोकतांत्रिक माहौल और वैचारिक प्रतिरोध SFI का मानना है कि आज के समय में जब देश में विभाजनकारी ताकतें हावी होने का प्रयास कर रही हैं, ऐसे में ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ जैसे आयोजन छात्रों के बीच एक स्वस्थ और लोकतांत्रिक माहौल को जिंदा रखते हैं। यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संकुचित दायरे से बाहर निकलकर एक समावेशी समाज की कल्पना को साकार करता है।
‎मुख्य अतिथि और विशेष आकर्षण उत्सव के पहले दिन के आगाज में देश के मशहूर लेखक, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता गौहर रज़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी उपस्थिति छात्रों के लिए न केवल प्रेरणादायक होगी, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कला के माध्यम से सामाजिक बदलाव पर भी चर्चा को विस्तार देगी।
‎इस दो दिवसीय आयोजन में हिमाचल के पारंपरिक नृत्य जैसे नाटी, अन्य राज्यों के लोक नृत्य, संगीत और नाटक मुख्य आकर्षण रहेंगे, जो विश्वविद्यालय परिसर को एक लघु भारत के रूप में तब्दील कर देंगे।