शिमला: 11 मई 2026,
प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लंबित पड़ी कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) को लागू करने की माँग को लेकर आज संयुक्त कार्य समिति (JAC) के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश के पाँचों राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने शैक्षणिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियाँ पूर्ण रूप से बंद रहीं तथा विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएँ आयोजित नहीं की गईं।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभी 48 विभागों में शिक्षकों ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कार्य बहिष्कार किया। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावित रहीं। संयुक्त कार्य समिति के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन शिक्षकों के सम्मान, अधिकारों तथा प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लंबे समय से विश्वविद्यालय शिक्षकों की जायज़ माँगों की लगातार अनदेखी कर रही है। CAS को लागू न करने के कारण लगभग तीन हजार विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
संयुक्त कार्य समिति ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की। शिक्षकों ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तेज किया जाएगा।
आंदोलन को संबोधित करते हुए डॉ. जोगिंदर सकलानी ने कहा कि प्रदेश सरकार का रवैया पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है और सरकार उच्च शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षक प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है और इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
डॉ. राजेश ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी करके प्रदेश सरकार स्वयं अपना नुकसान कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का जागरूक वर्ग है और सरकार यदि उनकी समस्याओं को लगातार नज़रअंदाज़ करती रही तो इसका राजनीतिक प्रभाव भी भविष्य में देखने को मिल सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सत्ता में वापसी के लिए शिक्षकों की अनदेखी सरकार को महँगी पड़ सकती है।
डॉ. सुनील ने कहा कि CAS को लागू न करना शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न है। उन्होंने कहा कि वर्षों से शिक्षक अपनी पदोन्नति और सेवा लाभों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक देरी के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित निर्णय लिए जाते तो आज शिक्षकों को आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।
संयुक्त कार्य समिति के प्रतिनिधि एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं तथा उन्होंने अपने छात्र जीवन में अनेक छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया है। इसलिए उन्हें प्रदेश के शिक्षकों की वेदना और संघर्ष को समझना चाहिए।
डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि शिक्षक सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपने वैधानिक अधिकारों की बहाली चाहते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षकों की जायज़ माँगों की लगातार उपेक्षा की गई तो यह आंदोलन आने वाले समय में और व्यापक रूप धारण करेगा। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि शिक्षकों की नाराज़गी ही भविष्य में इस सरकार के पतन का कारण बन जाए।
डॉ. अंकुश ने भी आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि CAS केवल पदोन्नति का विषय नहीं बल्कि शिक्षकों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह शिक्षकों की भावनाओं को समझते हुए इस विषय में शीघ्र निर्णय ले।
संयुक्त कार्य समिति ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय शिक्षकों के लिए CAS को लागू नहीं करती। शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब शिक्षकों का मनोबल ऊँचा हो और उन्हें समय पर उनके अधिकार प्राप्त हों।
आज के आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के सैकड़ों शिक्षकों ने भाग लिया तथा सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी माँगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और अधिक तीव्र किया जाएगा।








