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April 17, 2026 4:14 am

दिल का खेल सुरेंद्र शर्मा शिव

दिल के इस खेल में
जाना पड़ता है जेल में
हो जाती है ज़िंदगी मुश्किल
रिहाई भी नहीं मिलती बेल में

मुक़दमा करता है वही
जज भी होता है वही
हो क़िस्मत अच्छी गर
पैरवी भी करता है वही

हो जाता है तू बेचारा बहुत
खो जाता है उसकी याद में
कोई खाने के लिए पूछे तो
कहता है खाऊँगा मैं बाद में

है मज़ा भी और सज़ा भी बहुत
दिल के इस खेल में
है नहीं सिर्फ़ तन्हाई और जुदाई
जन्नत भी है इस जेल में

हो गया है अगर प्यार तुम्हें उससे
अभी तो गए हो तुम बस जेल में
उसको भी हो जाए प्यार जब तुमसे
जीत मिल जाएगी तुम्हें इस खेल में

करता है हर कोई दुआ हर पल ये
मिल जाए उसे भी ठिकाना इस जेल में
हो जाता है वो शक्स मालामाल जिसे
उम्रकैद की सज़ा मिल जाए इस जेल में

नेता हो, अभिनेता हो या आम जन
हर कोई जाना चाहता है इस जेल में
है नहीं कोई भेदभाव यहां पर हर किसी को बराबर सहूलियतें मिलती हैं इस जेल में।