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March 17, 2026 9:39 pm

हिमाचल निर्माता डाॅ. यशवंत सिंह परमार की महत्वपूर्ण भूमिका

हिमाचल निर्माता डाॅ. यशवंत सिंह परमार जी की जयंती के शुभ अवसर पर समस्त हिमाचलवासियों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। आज हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्यों की श्रेणी के विकास के मामले में अग्रणी है। हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी पहाड़ी राज्यों की तुलना में बेहतर है। ये कहा जाए कि इसके पीछे हिमाचल निर्माता डाॅ. यशवंत सिंह परमार की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
नए राज्य के गठन के साथ सरकार की प्राथमिकताओं का निर्धारण करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय रहता है। परमार साहब ने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को मद्दे नजर रखते हुए कृषि और बागवानी को प्रदेश के विकास का आधार बनाने का लक्ष्य रखा और आने वाली सभी सरकारों ने इस प्राथमिकता पर बल दिया। परिणामस्वरूप आफ सीजन वैजिटेबल पैदा करने वाला देश का सबसे बड़ा राज्य हिमाचल बना। सेब उत्पादन के मामले में व गुठलीदार फलों के उत्पादन में हिमाचल में क्रांति आई, पुष्प उत्पादन हजारों किसानों का रोजगार बना। परिणामस्वरूप, हमारे किसानों और बागवानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई। विधानसभा में डाॅ. परमार जी द्वारा दिए गए वक्तव्यों का अध्ययन करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि परमार जी की सोच कृषि और बागवानी के विकास, हिमाचल वासियों की स्थिति को बेहतर बनाने का लक्ष्य उनके ज़हन में था, जो आज चरितार्थ हो रहा है। भूमि सुधार कानूनो के प्रति परमार साहब की बहुत सटीक सोच थी ताकि छोटे किसानों की भूमि सुरक्षित रहे और वो विकसित हो। इसी दृष्टि से धारा 118 को हिमाचल प्रदेश में लागू किया गया।
आवागमन के साधनों के विकास में सड़को की अहम भूमिका है। यह परमार साहब की कार्यशैली में था और सड़कें हिमाचल की भाग्य रेखाएं है, ये न केवल विचार हेतु ही विषय था अपितु सभी सरकारों ने सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता प्रदान की। सड़कों के निर्माण में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रारंभ होने पर क्रांति आई। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरूआत की और आज हिमाचल प्रदेश की लगभग 40 हजार किलोमीटर सड़को में से 20 हजार किलोमीटर सड़कें केवल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनी है। नरेन्द्र भाई मोदी सरकार में नेशनल हाईव और फोरलेन हाईवे की ओर अधिक ध्यान कंेद्रित करने से आवागमन में क्रांति आने वाली है। आवश्यकता है हर गांव को बारह मासी पक्की सड़क से जोड़ने की, जिस पर अभी हिमाचल को बहुत काम करना होगा।
डाॅ. यशवंत सिंह परमार ने स्वयं गुलामी के कालखंड में सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त की और वो प्रत्येक हिमाचली को शिक्षित देखना चाहते थे और यही वजह है कि परमार साहब के नक्शे कदम पर चलते हुए सभी सरकारों ने दूर-दराज के क्षेत्रों में निरंतर स्कूलों को खोला जिसका परिणाम हुआ कि हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर पूरे देश में पहले और दूसरे स्थान पर आती है। विद्यालय खोलने के मामले में एक अपवाद है, वो है वर्तमान सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार, जो निरंतर विद्या के मंदिरों को बंद करने में जुटी हुई है।
डाॅ. परमार जी की सोच के कारण आज हम फक्र के साथ कह सकते हैं कि भारत में काम करने वाले बेहतरीन डाॅक्टर, बेहतरीन इंजीनियर, बेहतरीन ब्यूरोक्रेट्स, बेहतरीन टैक्नोक्रेट्स, बेहतरीन राजनीतिज्ञ, बेहतरीन श्रमिक व बेहतरीन शिक्षक हिमाचल प्रदेश ने प्रदान किए हैं, प्रत्येक हिमाचलवासी को जिन पर गर्व है।
डाॅ. यशवंत सिंह परमार हिमाचली भाषा, हिमाचली बोली और हिमाचली संस्कृति के उपासक रहे। उन्होनें सदैव अपने वक्तव्यों में ये कहा कि हमें अपनी लोक संस्कृति को, हमें आपने खानपान को, हमें अपने पहरावे को सहेज कर रखना है, संभाल कर रखना है। परिणामस्वरूप हिमाचली नृत्य, हिमाचली कला, हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा मिला और आजादी के 75 साल बाद भी हिमाचल की लोक संस्कृति न केवल जीवित है अपितु निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। वो अंतर्राष्ट्रीय लवी का मेला हो, वो महामाई रेणुका जी का मेला हो, वो कुल्लू का दशहरा हो, वो मण्डी की शिवरात्रि हो, सुजानपुर की होली हो, पालमपुर की होली हो, चम्बा का मिंजर मेला हो, माता शूलिनी का मेला हो सभी परंपरागत मेले हिमाचली सांस्कृति धरोहरों को संजोये हुए हैं।
आज हम उस महान शख्सियत डाॅ. यशवंत सिंह परमार को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आशा करते हैं कि हिमाचल निरंतर विकास की ऊंचाईयों को छुएगा।