सबकी खबर , पैनी नज़र

May 26, 2026 12:25 pm

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पहाड़ों पर शुल्क लगाकर सरकार ने युवाओं से प्रकृति का अधिकार छीना, त्रियुंड मॉडल जनविरोधी और व्यापारीकरण की शुरुआत:–नैंसी अटल

सरकार पहाड़ों को कमाई का साधन बना रही है, जनता की धरोहर को निजी हाथों में देना अस्वीकार्य निर्णय:–अभाविप*

आज त्रियुंड, कल पूरे हिमाचल के ट्रैक बिकेंगे, सरकार की यह नीति प्रदेश की पहचान और विरासत के खिलाफ कदम:–नैंसी अटल

शिमला 06-04-2026, हिमाचल प्रदेश की प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने बयान जारी करते हुए कहा कि कांगड़ा के प्रसिद्ध त्रियुंड ट्रैक पर एंट्री शुल्क और कैंपिंग शुल्क लागू करना तथा उसके प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी निर्णय है। प्रदेश सरकार एक ओर वन मित्रों की भर्ती कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल की प्राकृतिक धरोहरों को निजी ऑपरेटरों के हवाले कर रही है, जो स्पष्ट रूप से नीति में विरोधाभास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि त्रियुंड जैसे ट्रैक पर ₹100 एंट्री शुल्क और ₹275 प्रतिदिन टेंट शुल्क लगाना आम छात्रों, युवाओं और मध्यमवर्गीय पर्यटकों के लिए अनावश्यक आर्थिक बोझ है। हिमाचल के पहाड़, जंगल और प्राकृतिक स्थल किसी निजी कंपनी की संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की साझा धरोहर हैं। सरकार का यह कदम इन धरोहरों के व्यावसायीकरण की दिशा में खतरनाक संकेत देता है।
नैंसी अटल ने यह भी कहा कि निजीकरण के चलते पर्यावरण संरक्षण के बजाय मुनाफाखोरी को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे त्रियुंड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अति-पर्यटन, कचरा और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ेगा। साथ ही, एंट्री समय सीमित करना और नियंत्रण बढ़ाना युवाओं की प्राकृतिक स्थलों तक सहज पहुंच को बाधित करता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इस निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए, त्रियुंड ट्रैक का प्रबंधन पुनः सरकारी स्तर पर रखा जाए तथा स्थानीय युवाओं और वन मित्रों को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी और जनहितैषी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अन्यथा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेशभर में इस जनविरोधी नीति के खिलाफ आंदोलन करने को बाध्य होगी।
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जारीकर्ता
नैंसी अटल अभाविप हिमाचल प्रदेश प्रदेश मंत्री
9805661596