मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सम्मेलन संपन्न
शिमला: निदेशालय जनगणना कार्य, हिमाचल प्रदेश द्वारा आज मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना के द्वितीय चरण के संचालन हेतु प्रधान जनगणना अधिकारियों की राज्य स्तरीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में आगामी जनगणना गतिविधियों की तैयारियों, प्रशासनिक रणनीतियों तथा अंतर-विभागीय समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। इस बैठक में सचिव सामान्य प्रशासन सह राज्य जनगणना समन्वयक, निदेशक जनगणना कार्य, हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपायुक्त/नगर आयुक्त सह प्रधान जनगणना अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का औपचारिक शुभारंभ करते हुए निदेशक जनगणना कार्य, श्रीमती दीप शिखा शर्मा ने मुख्य सचिव महोदय का स्वागत किया। उन्होंने अवगत कराया कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना का पहला चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। इसके साथ ही, उन्होंने हिमाच्छादित क्षेत्रों में आयोजित किए जाने वाले द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) की संपूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन हिमाच्छादित क्षेत्रों में यह चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक संचालित किया जाएगा। आम नागरिकों की सुविधा एवं आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्व-गणना का विकल्प भी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा।
बैठक के दौरान जनगणना के सफल संचालन से जुड़ी बारीकियों तथा सभी तकनीकी व प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। निदेशक ने वित्तीय नियमों, प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देशों, उपयोग में लाए जाने वाले आधुनिक डिजिटल माध्यमों (मोबाइल ऐप एवं मॉनिटरिंग पोर्टल) तथा गणनाकर्मियों व पर्यवेक्षकों के चरणबद्ध प्रशिक्षण मॉड्यूल की विस्तृत जानकारी साझा की।
मुख्य सचिव महोदय ने प्रथम चरण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए सभी प्रधान जनगणना अधिकारियों, जिला प्रशासनों और उनकी टीमों को बधाई दी। आगामी चरण के संदर्भ में कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए उन्होंने अधिकारियों को आंकड़ों की उच्च गुणवत्ता और शत-प्रतिशत सटीकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य की भावी सामाजिक-आर्थिक विकास योजनाओं के निर्माण, दूरगामी नीति निर्धारण और केंद्र व राज्य स्तर पर बजटीय आवंटन का मुख्य आधार जनगणना के प्रामाणिक आंकड़े ही होते हैं। अतः इस राष्ट्रीय दायित्व को पूर्ण निष्ठा, सतर्कता और समयबद्धता के साथ निष्पादित किया जाए।








