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April 27, 2026 7:46 pm

कसुम्पटी क्षेत्र के चियोग में 5.50 करोड़ से बनेगा स्कूल का नया भवन, 16 करोड़ से स्थापित होगा 66 केवी सब-स्टेशन

शिमला 27 अप्रैल, 2026, मुख्यमंत्री ने की चियोग स्कूल को सीबीएसई बनाने की घोषणा, एफआरए के तहत स्वीकृत सड़कों के लिए मिलेगा समुचित धन
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सृदृढ़ करने में अहम भूमिका निभायेंगी ग्रीन पंचायतें
भाजपा करती है विरोध की राजनीति, हम डरते नहीं: सीएम

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला ज़िला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के चियोग में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, चियोग के नए भवन के लिए 5.50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्कूल में अगले वर्ष से सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र में बिजली की समस्या का समाधान करने के लिए 66 के.वी. सब-स्टेशन के निर्माण के लिए 16 करोड़ रुपये देने की घोषणा की, जिसे एक साल के भीतर बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। उन्होंने कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के लिए एफआरए के तहत स्वीकृत बंगापानी से चडैल, चियोग से जठाई, धलैऊ से जनुनाला, चियोग से मेहाना, धलैऊ से धार, फागू से सरिवन तथा जुब्बड़ से कढरब सड़कों के लिए समुचित धन उपलब्ध करवाने की घोषणा की। उन्होंने धरेच सिंचाई परियोजना के लिए धन उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।
श्री सुक्खू ने अपने छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए कहा कि आज कई मेरे साथी यहां उपस्थित हैं, जिन्होंने जीवन के हर पड़ाव पर उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि शिमला नगर निगम से वह पार्षद बने और यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं और प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से उन्हें आज प्रदेश की बागडोर संभालने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने महज राजनीतिक लाभ के लिए विधानसभा चुनावों से छह महीने पहले पांच हज़ार करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांट दीं। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार की ग़लत नीतियों के कारण हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ने के बाद देश में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए तथा पहली कक्षा से अंग्रेज़ी मीडियम में पढ़ाई आरंभ की। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में लाए गए सुधारों के कारण आज हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। आज प्रदेश में 151 सीबीएसई स्कूल भी खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा ‘‘भाजपा विरोध की राजनीति करती है लेकिन हम विरोध से नहीं डरते। प्रदेश के सभी सीबीएसई स्कूलों में 30 जून तक सभी विषयों के अध्यापक उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। जहां पर अन्य विषयों के साथ-साथ संगीत और योग के अध्यापक भी उपलब्ध होंगे, ताकि बच्चों का संपूर्ण विकास हो सके और उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके। आज हिमाचल प्रदेश पूर्ण रूप से साक्षर प्रदेश बन गया है।“
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय विधायक एवं मंत्री अनिरुद्ध सिंह क्षेत्र के विकास के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। पहली बार कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र के धरेच में स्थापित 500 किलोवाट के सौर ऊर्जा संयंत्र ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जिससे केवल पंचायत को ही प्रतिवर्ष लगभग 14 लाख रुपये मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रीन पंचायतें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रुप में अपनाया है। ऐसे बच्चों के लिए कानून बनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत विधवाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का ख़र्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा डॉ. वाई.एस. परमार ऋण योजना के तहत बच्चों को शिक्षा के लिए एक प्रतिशत की दर से 20 लाख रुपये का क़र्ज़ उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में निर्मित एक हज़ार करोड़ रुपये के भवन खाली पड़े हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि इन खाली भवनों में कुछ सरकारी कार्यालय शिफ्ट किए जा सकें। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी के रूप में 54 हज़ार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि वर्तमान राज्य सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17 हज़ार करोड़ रुपये मिले हैं, जो चार गुना कम है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस बार केंद्र सरकार ने आरडीजी बंद करके प्रदेश के लोगों का यह अधिकार छीन लिया है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्तमान राज्य सरकार को दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा, जिनमें जान-माल का भारी नुक़सान हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक आम परिवार का दर्द समझता हूं। अधिकारी कहते थे घर बनाने के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा नहीं दे सकते क्योंकि क़ानून ही ऐसा है। लेकिन हमने इन परिवारों को फिर से बसाने के लिए पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घर पर सात लाख रुपये की राशि दी। प्रदेश में आकर प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की, लेकिन हमें अभी तक यह पैसा नहीं मिला है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए भी राज्य सरकार ने प्रयास किए, जबकि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस क्षेत्र की सुध नहीं ली। हम 20-20 साल पुरानी मशीनों को एम्स दिल्ली की तर्ज़ पर आधुनिक मशीनों से बदल रहे हैं। प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की जा चुकी है, जिससे प्रदेश में ही लोगों को वर्ल्ड क्लास इलाज उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रही है। मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत रिकॉर्ड 110 करोड़ का सेब ख़रीदा गया है। गाय के दूध का रेट बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि भैंस के दूध का रेट 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को बंद कर दिया है, जिससे पंचायतों में कार्य प्रभावित होंगे।
उन्होंने इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 50 हज़ार रुपये स्वीकृत किए तथा इस समारोह में भाग लेने वाले चार महिला मंडलों को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की। 
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने जय ईश्वरी माता मंदिर में पूजा अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस अवसर पर कहा कि साढ़े तीन साल में कुसुम्पटी क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रही। उन्होंने उद्घाटनों और शिलान्यास के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चियोग बाईपास कांग्रेस सरकार की देन है और कांग्रेस सरकार ही प्रदेश में समग्र विकास करवाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार के समय में यहां का विकास जानबूझ कर रोका गया लेकिन ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मुख्यमंत्री बनते ही यहां के विकास की गति में तेज़ी आई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद हमारी सरकार हिमाचल प्रदेश को विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीन पंचायतें बनाने की शुरुआत शिमला ज़िला के धरेच से हुई है और आज 500 किलोवाट की सौर ऊर्जा परियोजना का लोकार्पण कर दिया गया है।
इस अवसर पर राज्य नशा निवारण बोर्ड के उप-संयोजक संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, एसपी गौरव सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।