सोलन, 12 अगस्त 2026, शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अपनी नई ‘बुक नुक’ पहल की शुरुआत के साथ ‘नेशनल लाइब्रेरियन डे’ मनाया। यह एक कम्युनिटी-बेस्ड ओपन लाइब्रेरी कॉन्सेप्ट है, जिसका मकसद कैंपस में पढ़ने, ज्ञान साझा करने और संसाधनों के सस्टेनेबल इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इस पहल का उद्घाटन शूलिनी यूनिवर्सिटी की चीफ लर्निंग ऑफिसर प्रो. आशू खोसला ने किया। ‘बुक नुक’ को एक छोटी, आसानी से एक्सेस की जा सकने वाली ओपन लाइब्रेरी के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जहाँ यूनिवर्सिटी कम्युनिटी के सदस्य पढ़ने के लिए किताब ले सकते हैं और किसी और के लिए किताब छोड़ सकते हैं। यह पहल शेयरिंग, भरोसे और कम्युनिटी लर्निंग के सिद्धांतों पर आधारित है, जिससे किताबें कई पाठकों तक पहुँचती हैं और लगातार सीखने की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।इस मौके पर प्रो. आशू खोसला ने कहा, “किताब तभी सच में सार्थक होती है जब उसका ज्ञान शेयर किया जाए। ‘बुक नुक’ एक आसान लेकिन असरदार आइडिया है जो पढ़ने के ज़रिए लोगों को एक साथ लाता है और हमें एक-दूसरे के साथ ज्ञान शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करता है। मुझे उम्मीद है कि यह पहल हमारे स्टूडेंट्स और स्टाफ़ को ज़्यादा पढ़ने, ज़्यादा शेयर करनेऔर सीखने को रोज़मर्रा की कैंपस ज़िंदगी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करेगी।”
यूनिवर्सिटी ने इस पहल के पहले चरण के तौर पर दो ‘बुक नुक’ का उद्घाटन किया। और कैंपस में ऐसी कई अन्य जगहें बनाने की योजना है, जिनमें पाइन कोर्ट के पास CRC, G-H ब्लॉक, हॉस्टल, E-ब्लॉक और AI बिल्डिंग शामिल हैं, जंहा स्टूडेंट्स और स्टाफ़ के लिए किताबें आसानी से उपलब्ध हो सकें।योगानंद नॉलेज सेंटर (YKC) के डायरेक्टर, रिटायर्ड कर्नल टीपीएस गिल ने कहा कि इस पहल से सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) और ज़िम्मेदारी से चीज़ों के इस्तेमाल का मज़बूत संदेश मिलता है। किताबों को शेल्फ या घरों में बेकार पड़े रहने देने के बजाय, ‘बुक नुक’ उन्हें एक नया जीवन देता है, जिससे वे एक पाठक से दूसरे पाठक तक पहुँच पाती हैं। ‘बुक नुक’ खुद पुरानी मशीनों को दोबारा इस्तेमाल करके बनाए गए हैं, जो ‘रिड्यूस, रीयूज़ और रीसायकल’ (कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और रीसायकल) के सिद्धांतों को दर्शाते हैं और साथ ही सस्टेनेबिलिटी को पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के साथ जोड़ते हैं।इस पहल को यूनिवर्सिटी की कई टीमों और लोगों का समर्थन मिला। आयोजकों ने चांसलर प्रो. पी.के. खोसला का उनकी दूरदर्शी सोच के लिए और वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला का उनके लगातार प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। विनोद चोपड़ा, रिटायर्ड ब्रिगेडियर एसडी मेहता (डायरेक्टर ऑपरेशन्स) और उनकी टीम, सुरेश शर्मा और उनकी टीम; डीन स्टूडेंट वेलफेयर टीम और YKC लाइब्रेरी टीम के सदस्यों – जिनमें लाइब्रेरियन राकेश शर्मा, नीलम ठाकुर, नेहा ठाकुर, विनोद शर्मा, दीपक वर्मा और अर्चना शामिल हैं – का विशेष धन्यवाद कियागया, जिन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सहयोग और प्रयास किया।
आयोजकों ने सस्टेनेबिलिटी डायरेक्टर पूनम नंदा के योगदान को भी सराहा, जिनके सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के विचार से ही इस पहल को प्रेरणा मिली। स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन की श्रीमती प्रभा सुब्रमण्यम और स्कूल ऑफ़ मीडिया एंड कम्युनिकेशन्स के प्रो. चरणजीत सिंह का भी उनके बहुमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद किया गया।शूलिनी यूनिवर्सिटी की हेड लाइब्रेरियन डॉ. पूजा ठाकुर ने कहा कि ‘बुक नुक’ पहल छात्रों और स्टाफ़ को किताबें पढ़ने, उनका आदान-प्रदान करने और दान करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, साथ ही कैंपस में ज्ञान साझा करने और सस्टेनेबल तौर-तरीकों की संस्कृति को मज़बूत करेगी।
डॉ. ठाकुर ने आगे कहा, “यूनिवर्सिटी आने वाले महीनों में इस पहल को और जगहों तक फैलाने की योजना बना रही है, ताकि शूलिनी समुदाय के लिए पढ़ने की सुलभ जगहों का एक बड़ा नेटवर्क बनाया जा सके।”










