दिनांक -: 25/08/2026
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया
संजौली इकाई (SFI) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बढ़ाई गई फीस, छात्र संघ चुनावों (SCA) की बहाली और विश्वविद्यालय में हुई 186 अवैध प्रोफेसर भर्तियों के विरोध में एक जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रदेश सरकार और HPU के कुलपति प्रोफेसर महावीर वर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विश्वविद्यालय वाइस चांसलर महावीर वर्मा का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान कैंपस उपाध्यक्ष समीर ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी प्रशासनिक एवं वित्तीय नाकामियों का बोझ आम छात्रों पर फीस वृद्धि के रूप में थोपने का काम कर रहा है।
समीर ने CAG (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 186 प्रोफेसरों की भर्तियां गैर-कानूनी तरीके से की गईं। इन अवैध नियुक्तियों के कारण विश्वविद्यालय पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ा है और अब उन प्रोफेसरों के वेतन का भुगतान करने के लिए आम छात्रों की फीस बढ़ाकर इस घाटे की भरपाई की जा रही है। प्रशासन के इस रवैये से उच्च शिक्षा गरीब और सामान्य वर्ग के छात्रों की पहुंच से दूर होती जा रही है। समीर ने कहा कि जब से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बंद हुए हैं, तब से अकादमिक भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। छात्रों के पास अपनी समस्याओं और अधिकारों को उठाने के लिए कोई लोकतांत्रिक या साझा मंच नहीं बचा है, जिसका फायदा उठाकर प्रशासन लगातार छात्र-विरोधी निर्णय ले रहा है। SFI द्वारा विश्वविद्याल में आम छात्रों को लामबद्ध करते हुए जो आंदोलन किया गया है उसके दबाव के चलते प्रशासन छात्रों के सामने झुका है जिसमें बहुत सी बढ़ी हुई फीसों को वापिस भी लिया गया है परंतु SFI का साफ मानना है कि कुछ प्रतिशत वृद्धि में कटौती से छात्रों का उत्थान नहीं होगा बल्कि इससे आम छात्रों को विश्वविद्यालय में पढ़ना और मुश्किल हो जाएगा और छात्र आर्थिक बोझ के चलते प्रवेश लेना बंद कर देंगे जिससे उच्च शिक्षा में छात्रों की पहले से कम हो रहा नामांकन और कम होगा । इसलिए SFI इस आंदोलन को प्रदेश भर में हर शिक्षण संस्थान के अंदर तब तक लड़ेगी जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई फीस वृद्धि को पूरी तरह वापिस नहीं ले लिया जाता । SFI प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द बढ़ाई गई फीस वापस नहीं ली गई, अवैध भर्तियों पर कार्रवाई नहीं हुई और छात्रों के जनवादी अधिकार (छात्र संघ चुनाव) बहाल नहीं किए गए, तो SFI पूरे प्रदेश में एक उग्र और व्यापक आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।






