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March 27, 2026 5:40 pm

एसएफआई ने नामांकित एससीए के खिलाफ छात्र संघ चुनावों की बहाली के लिए जिला की प्रत्येक इकाई में जोरदार धरना प्रदर्शन किया,

शिमला: 18 सितंबर 2025, एसएफआई शिमला जिला ने नामांकित एससीए के खिलाफ  और छात्र संघ चुनावों की बहाली के लिए जिला की प्रत्येक इकाई में जोरदार धरना प्रदर्शन किया,
यह प्रदर्शन न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि देश भर के छात्र समुदाय के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं को उजागर करने के लिए भी किया गया।
एसएफआई ने इस प्रदर्शन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया, जिनमें शिक्षा का निजीकरण, अत्यधिक शुल्क वृद्धि, छात्रवृत्ति में कटौती, शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन शामिल हैं। संगठन ने विशेष रूप से नामांकित एससीए को छात्रों की आवाज को दबाने का एक असंवैधानिक कदम करार दिया और मांग की कि छात्र संघ चुनावों को तत्काल बहाल किया जाए ताकि छात्र अपने प्रतिनिधियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से चुन सकें।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई शिमला जिला अध्यक्ष विवेक नेहरा ने कहा, नामांकित एससीए छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के इशारे पर काम करती है, जिससे छात्रों की वास्तविक समस्याओं को अनदेखा किया जाता है। हम मांग करते हैं कि छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल किए जाएं और छात्रों को उनकी आवाज उठाने का पूरा अधिकार दिया जाए।  हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2013 में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव हुए थे, उसके बाद देखने को मिलता  है कि किस प्रकार से सरकार और प्रशासन का लगातार तानाशाही भरा रवैया अपनाए हुए है और छात्र समुदाय की आवाज़ को दबाने का काम किया जा रहा है,SCA छात्र समुदाय का एकमात्र जरिया था अपने बात को प्रशासन तक पहुंचाने का और जब से छात्र संघ चुनाव बंद हुए है उसके बाद लगातार प्रदेश की राजनीति के स्तर में गिरावट आईं है और सरकार छात्र विरोधी नीतियों को लाने का काम कर रही है , मानसून सत्र में विधानसभा के अंदर कांग्रेस के विधायक छात्र संघ चुनाव को लेकर जो नकारात्मक रवैया दिखा रहे थे वह निंदनीय है जबकि हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुक्खू समेत  लगभग 58 विधायक छात्र राजनीति से निकल कर आए है।
उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को मूलभूत सुविधाओं, जैसे कि पुस्तकालय, हॉस्टल, स्वच्छ पेयजल, और इंटरनेट की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने नारेबाजी और बैनर-पोस्टर के माध्यम से अपनी मांगों को सामने रखा। उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि शिक्षा को और अधिक सुलभ और किफायती बनाया जाए, छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाई जाए, और कैंपस में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जाए।
इसके अलावा, एसएफआई ने देश भर में बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे व्यावसायीकरण के खिलाफ भी आवाज उठाई।              एसएफआई शिमला जिला  के सचिव पवन ने कहा, “छात्र समाज का भविष्य  और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना देश के भविष्य को खतरे में डालना है छात्र समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करना लोकतंत्र की हत्या है। प्रदेश के छात्रों को न केवल शैक्षणिक बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नामांकित एससीए ने छात्रों की आवाज को दबाने का काम किया है। हम मांग करते हैं कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत छात्र संघ चुनाव बहाल करें और हिमाचल के शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करें।” उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल के कई कॉलेजों में छात्रवृत्ति की राशि समय पर उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भारी परेशानी हो रही है। हम सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हैं कि यदि हमारी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो हम अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें अनसुनी रहीं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
एसएफआई ने यह भी घोषणा की कि वह आने वाले दिनों में और अधिक जागरूकता अभियान और प्रदर्शन आयोजित करेगी ताकि छात्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके।
संगठन ने सभी छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल हों और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ें।