सबकी खबर , पैनी नज़र

July 6, 2026 10:55 pm

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भट्टी एग्रीटेक, जालंधर के कर्मचारियों हेतु केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, में क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

शिमला। आलू उत्पादन को सुदृढ़ बनाने तथा उ‌द्योग एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उ‌द्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा भट्टी एग्रीटेक प्रा. लि., जालंधर (पंजाब) के कर्मचारियों के लिए “आलू की किस्मों की पहचान एवं कीट प्रबंधन विषय पर तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण 6 से 8 जुलाई, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उ‌द्देश्य प्रतिभागियों को आलू की किस्मों की वैज्ञानिक पहचान, समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) तथा गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन से संबंधित वैज्ञानिक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। जिससे वे कंपनी के विस्तारित अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) खेती कार्यक्रम से जुड़े आलू उत्पादक किसानों को अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक परामर्श प्रदान कर सकेंगे।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. आलोक कुमार, अध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान प्रभाग, ने किसानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने वाले कृषि विशेषज्ञों के लिए निरंतर क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण को प्रतिभागियों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार किया गया है। साथ ही संवादात्मक सत्र, क्षेत्रीय प्रदर्शन एवं विचार-विमर्श के माध्यम से खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान पर भी चर्चा की जाएगी।

डॉ. ब्रजेश सिंह, निदेशक, ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में आलू क्षेत्र का भविष्य अनुसंधान संस्थानों, निजी कंपनियों तथा किसानों के बीच मजबूत साझेदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागी स्थान-विशिष्ट वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, उत्पादन बढ़ाने, खेती के जोखिमों को कम करने तथा संगठित अनुबंध खेती प्रणाली के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे संस्थान की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर वैज्ञानिक तकनीकों को सरल एवं व्यवहारिक रूप में किसानों तक पहुंचाने वाले प्रभावी प्रौ‌द्योगिकी दूत बनें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. पिनबियनलांग एवं डॉ. पी. लोकेश बाबू ने बताया कि आलू की किस्मों की सही पहचान किस्मीय शुद्धता बनाए रखने, प्रसंस्करण गुणवत्ता में सुधार करने तथा विभिन्न बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि समेकित कीट प्रबंधन अपनाकर फसल हानि को कम किया जा सकता है तथा रासायनिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता घटाकर पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ आलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

इस अवसर पर डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सोम दत, श्री अमनदीप पुनिया, श्री धर्मेंद्र गुप्ता, श्री डी.पी. गौतम, श्री राकेश कुमार एवं श्रीमती निर्मल चौहान भी उपस्थित रहे। उपस्थित वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने कर्मचारियों के व्यावसायिक कौशल विकास में निवेश करने की भट्टी एग्रीटेक प्रा. लि. की पहल की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम

भारत की आलू मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने, वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार को गति देने तथा किसानों की आय में वृ‌द्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान संस्थान के वैज्ञानिक, प्रतिभागियों को व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण आलू किस्मों की पहचान, प्रमुख कीटों की पहचान एवं प्रबंधन, कीट निगरानी तकनीक, समेकित कीट प्रबंधन रणनीतियां, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन तथा आलू संरक्षण की नवीनतम तकनीकों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।