सबकी खबर , पैनी नज़र

November 7, 2026 12:08 am

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को निरस्त करने की उठाई मांग

विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के लिए शिक्षक समुदाय एकजुट; मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग।

शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन, हपुटवा की ओर से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कुलपति से आग्रह किया गया कि हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को निरस्त करने के संबंध में मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार तक विश्वविद्यालय परिवार की मांग पहुंचाई जाए।
एसोसिएशन ने ज्ञापन में कहा कि विधानसभा में पारित हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी वर्ग शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करवा रहा है। लंबे समय से जारी इस विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार अथवा प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं किया गया है और न ही इस संबंध में कोई ठोस आश्वासन दिया गया है।
ज्ञापन में 5 नवंबर, 2026 को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित आम जनसभा का भी उल्लेख किया गया। इस जनसभा में प्रदेश के पांचों विश्वविद्यालयों के अध्यापक संघों के प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों, विश्वविद्यालय कार्यकारिणी परिषद के पूर्व सदस्यों, पूर्व कुलपतियों, पूर्व कुलसचिवों, पूर्व विद्यार्थियों, विधि विशेषज्ञों, मीडिया प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों तथा शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
जनसभा में उपस्थित वक्ताओं ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता एवं संस्थागत गरिमा प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही, विधेयक के प्रावधानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा निर्धारित नियमों एवं मानकों के संदर्भ में भी चिंताजनक बताया गया।
एसोसिएशन ने माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की गरिमा, अस्मिता एवं स्वायत्तता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे निरस्त करने पर पुनर्विचार किया जाए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिवार की चिंताओं एवं मांगों पर विचार करने के लिए सरकार और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के बीच शीघ्र वार्ता आयोजित करने की मांग भी की गई।
ज्ञापन के अंत में एसोसिएशन ने आशा व्यक्त की कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय के हितों, शैक्षणिक परंपराओं और स्वायत्त स्वरूप को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक एवं संवेदनशील निर्णय लेगी।
जारीकर्ता
डॉ नितिन व्यास ।
अध्यक्ष – हपुटवा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला।