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November 7, 2026 12:02 am

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मुख्यमंत्री के दौरे केवल पॉलिटिकल ड्रामा, अंतिम समय का दान भी नहीं आएगा काम : रणधीर शर्मा

आपदा राहत के हजारों करोड़ में भ्रष्टाचार और बंदरबांट के गंभीर आरोप, कांग्रेस सरकार जारी करे श्वेत पत्र : रणधीर शर्मा

शिमला, 6 नवंबर। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं श्री नैना देवी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रणधीर शर्मा ने शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्रों के दौरे और करोड़ों रुपये की घोषणाएं केवल राजनीतिक ड्रामा हैं। उन्होंने कहा, “तीन साल तक मुख्यमंत्री को जनता की याद नहीं आई और अब चुनाव नजदीक आते ही जनता के बीच जाकर घोषणाओं की झड़ी लगाई जा रही है। लेकिन मुख्यमंत्री याद रखें, अंतिम समय का दान भी काम नहीं आता।”
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के पास सड़कों की मरम्मत, एचआरटीसी की बसों के टायर बदलने, खराब मशीनरी ठीक करवाने और विधायक निधि जारी करने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि करोड़ों रुपये की नई घोषणाओं के लिए बजट कहां से आएगा? उन्होंने कहा कि जनता के बीच स्थानीय वेशभूषा पहनकर नाचने और भोजन करने से भाजपा को कोई आपत्ति नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री को अपनी सरकार की नाकामियों का जवाब भी देना चाहिए।
शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर आपदा राहत राशि के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ, एसडीएमएफ, एनडीआरएफ और पीडीएनए सहित विभिन्न मदों में हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी है। उन्होंने दावा किया कि पीडीएनए के अंतर्गत ₹2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत हुई, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹1,504.80 करोड़ है। उनके अनुसार जुलाई और दिसंबर 2025 में ₹1,053.36 करोड़ जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावितों के नाम पर आया पैसा कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पीडीएनए केअंतर्गत स्वीकृत कार्यों से हटकर धन खर्च करने, भाजपा विधायकों के क्षेत्रों की उपेक्षा करने और कांग्रेस नेताओं के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के आरोप भी उन्होंने लगाए।
शर्मा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग में ऑफलाइन टेंडर की सीमा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने तथा बड़े कार्यों को छोटे हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने बिना काम किए भुगतान होने के आरोपों की भी जांच की मांग की।
रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो तत्काल श्वेत पत्र जारी करे। इसमें केंद्र से प्राप्त प्रत्येक किस्त, विभागवार आवंटन, विधानसभा क्षेत्रवार खर्च, ठेकेदारों के नाम और भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को ₹1,500, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और रोजगार जैसे वादों पर भी सरकार जवाब दे। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार के 2,200 से अधिक संस्थान बंद किए और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित किया।शर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री जितना चाहें राजनीतिक ड्रामा कर लें, लेकिन जनता उनसे अधूरे वादों, आपदा राहत के खर्च और नई घोषणाओं के बजट का हिसाब जरूर मांगेगी। अंतिम समय का दान भी काम नहीं आएगा।” उन्होंने कहा कि भाजपा इन मुद्दों को जनता के सामने उठाती रहेगी और कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखेगी।
बीबीएमबी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामूहिक प्रयासों का परिणाम, मुख्यमंत्री श्रेय लेने की राजनीति बंद करें : रणधीर शर्मा

शिमला, 6 नवंबर। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) मामले में सुप्रीम कोर्ट के हिमाचल प्रदेश के हित में आए फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश को बिजली में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी एवं अन्य आर्थिक लाभ मिलने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय है। हालांकि फैसले की विस्तृत प्रति आने के बाद ही इसके सभी पहलू स्पष्ट होंगे।
रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस फैसले का एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति न करें। यह मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहा है और इस दौरान सभी सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों की पैरवी की है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार के प्रयासों से हिमाचल को जलविद्युतपरियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार मिला था। भाजपा सदैव प्रदेश के हितों की रक्षा करती आई है।
शर्मा ने पीटरहॉफ अतिथिगृह को पीपीपी मोड पर देने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने पीटरहॉफ की बुकिंग बंद करने के निर्णय तथा अन्य सरकारी होटलों के निजीकरण की आशंकाओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।