सबकी खबर , पैनी नज़र

November 5, 2026 9:19 pm

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विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर गरजे पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज और विधायक रणधीर शर्मा – बोले,

“स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं, विश्वविद्यालय ही लोकतंत्र की आत्मा हैं”
• सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में दी बड़ी चेतावनी
• स्वायत्तता बहाली के लिए राजभवन तक करेंगे पैदल मार्च

शिमला, 5 नवंबर 2026:_ हिमाचल प्रदेश में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शिक्षकों तथा गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं हि.प्र. विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र श्री सुरेश भारद्वाज जी तथा विधायक एवं हि.प्र. विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र श्री रणधीर शर्मा जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा:

> “विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाली दुकान नहीं है, यह ज्ञान, शोध और लोकतंत्र की आत्मा है।”
> “विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, यह हमारे विद्यार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।”
> “विश्वविद्यालयों को अपनी शैक्षणिक नीतियों, शोध और संस्थागत निर्णयों में पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इस पर किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा।”
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का संरक्षण केवल शिक्षकों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पूरे समाज के हित से जुड़ा है।
विधायक रणधीर शर्मा ने कहा:
> “विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता ही उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की गरिमा की पहचान है।”
> “हर विश्वविद्यालय की अपनी अकादमिक परंपरा, अपनी पहचान और निर्णय लेने की अपनी व्यवस्था होती है, इसका संरक्षण होना ही चाहिए।”
> “विश्वविद्यालय स्वतंत्र रहेंगे, तभी शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में सही मायने में योगदान दे पाएंगे।”
> “इस महत्वपूर्ण विषय पर विश्वविद्यालय समुदाय के विचारों और चिंताओं को महत्व देना होगा और सभी पक्षों के बीच सार्थक संवाद बना रहना चाहिए।”
कार्यक्रम में प्रो. देव दत्त शर्मा, संस्थापक कुलपति, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी तथा प्रो. चंद्रमोहन परशीरा, अध्यक्ष, एलुमनाई एसोसिएशन, हि.प्र. विश्वविद्यालय ने भी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गरिमा और स्वायत्त पहचान के संरक्षण पर अपने विचार रखे।
इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला; सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी; चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर; डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी सहित प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ की गई, तो शिक्षक समुदाय राजभवन तक पैदल मार्च करेगा।
विचार-विमर्श में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विश्वविद्यालयों को अपनी अकादमिक प्राथमिकताओं, पाठ्यक्रमों, शोध और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में उचित स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। किसी भी प्रस्तावित बदलाव का मूल्यांकन विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जोगिंदर सकलानी, डॉ. अंजलि शर्मा और डॉ. राजेश शर्मा द्वारा किया गया। अंत में डॉ. अंकुश भारद्वाज, सचिव, HPUTWA ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समग्र संदेश यही रहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता केवल प्रशासनिक अधिकारों का विषय नहीं, बल्कि शैक्षणिक स्वतंत्रता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला है।