सोलन, 11 मई 2026, शूलिनी विश्वविद्यालय के प्रोटोस्फीयर 2026 कार्यक्रम में छात्रों ने अपने नए विचारों को असली स्टार्टअप और प्रोटोटाइप में बदलकर बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्यक्रम में 70 टीमों के लगभग 400 छात्रों ने हिस्सा लिया। पांच छात्र स्टार्टअप को पहले ही ₹30,000-₹30,000 की सीड फंडिंग मिल चुकी है, जबकि एक टीम को बिहार सरकार से ₹1 लाख निवेश का प्रस्ताव मिला है।
यह कार्यक्रम छात्र अनुसंधान परिषद (SRC) द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को अपने रिसर्च और आइडिया को व्यवसाय और स्टार्टअप में बदलने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम कापहला चरण 2 अप्रैल से शुरू होकर 30 अप्रैल तक चला, जबकि दूसरा चरण अभी जारी है।
कुलपति प्रो. अतुल खोसला ने कहा कि इस पहल का मकसद छात्रों में नवाचार और उद्यमिता की भावना विकसित करना है ताकि वे भविष्य में नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकें।
प्रो-चांसलर और संस्थापक विशाल आनंद ने कहा कि प्रोटोस्फीयर 2026 शूलिनी विश्वविद्यालय से यूनिकॉर्न स्टार्टअप बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि छात्र नए विचारों के साथ आगे बढ़ें और विकसित भारत 2047 के निर्माण में योगदान दें।
अंतिम चरण से पहले ही पांच छात्र स्टार्टअप को फंडिंग और कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए विश्वविद्यालय का सहयोग मिल चुका है। एक टीम को बिहार सरकार से 5 प्रतिशत इक्विटी और 2 प्रतिशत सलाहकार शेयरों के बदले ₹1 लाख निवेश का प्रस्ताव भी मिला है, जो शुरुआती स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।इस कार्यक्रम का संचालन एसआरसी की संस्थापक सहायक प्रोफेसर अनित्या गुप्ता और योगानंद स्कूल ऑफ एआई, कंप्यूटर्स एंड डेटा साइंस के प्रमुख एवं एसआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. पंकज वैद्य ने किया। उन्होंने छात्रों को हर चरण में मार्गदर्शन दिया और उनके विचारों को बेहतर बनाने में मदद की।
एसआरसी को उम्मीद है कि अंतिम चरण के बाद 14 स्टार्टअप को औपचारिक रूप से इनक्यूबेट किया जाएगा और उन्हें निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।







