सबकी खबर , पैनी नज़र

June 24, 2026 6:07 pm

सबकी खबर, पैनी नज़र

सबकी खबर, पैनी नज़र

June 24, 2026 6:07 pm

एचपीयू में प्रो-वाईस चांसलर पद समाप्त किया जाए, छात्रों पर फीस का बोझ डालकर प्रशासनिक खर्च नहीं चलाया जा सकता : एसएफआई* 

शिमला: 24 जून 2026, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय में प्रो-वाईस चांसलर के पद को समाप्त करने तथा वर्तमान कार्यकाल के बाद इस पद पर नई नियुक्ति न करने की मांग उठाई है। इस संबंध में संगठन ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार वित्तीय संकट का हवाला देकर छात्रों पर फीस वृद्धि का बोझ डाल रहा है, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक खर्चों में कटौती की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। संगठन का मानना है कि प्रो-वाईस चांसलर जैसे उच्च प्रशासनिक पद पर वेतन, भत्तों, वाहन, स्टाफ और अन्य सुविधाओं पर बड़ी राशि खर्च होती है, जिसकी वर्तमान परिस्थितियों में समीक्षा आवश्यक है।

संगठन ने कहा कि इस प्रकार की फिजूलखर्ची और अनावश्यक प्रशासनिक खर्चों का सीधा बोझ छात्रों पर फीस वृद्धि के रूप में डाला जा रहा है। एक ओर विश्वविद्यालय वित्तीय संकट का हवाला देकर छात्रों से अधिक फीस वसूल रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे पदों और सुविधाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं जिनकी आवश्यकता और उपयोगिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय की अधिकांश प्रशासनिक शक्तियां कुलपति के पास निहित हैं तथा लंबे समय तक प्रो-वाईस चांसलर का पद रिक्त रहने के बावजूद विश्वविद्यालय का कार्य सुचारू रूप से चलता रहा है। इसके अलावा सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी की स्थापना के बाद एचपीयू का प्रशासनिक दायरा भी पहले की तुलना में कम हुआ है, इसलिए प्रशासनिक ढांचे का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सीमित संसाधनों के बेहतर उपयोग और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए है। संगठन का कहना है कि इस पद पर होने वाले खर्च को छात्रवृत्तियों, पुस्तकालयों, शोध सुविधाओं, छात्रावासों तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं पर लगाया जा सकता है।

एसएफआई ने आरोप लगाया कि कुलपति द्वारा इस मुद्दे पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है और 4 जून को कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वर्तमान प्रो-वाईस चांसलर फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं तथा उन्हें गाड़ी, आवास और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। संगठन ने कहा कि यह स्थिति पूरी तरह गैर-कानूनी प्रतीत होती है और इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।

एसएफआई एचपीयू ने कुलपति और प्रदेश सरकार के समक्ष स्पष्ट मांग रखी है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रो-वाईस चांसलर पद पर कोई नई नियुक्ति न की जाए तथा विश्वविद्यालय की प्रशासनिक आवश्यकताओं का अध्ययन कर इस पद को समाप्त करने पर विचार किया जाए।

परिसर सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान नहीं लेते हैं, तो एसएफआई एचपीयू छात्रों को साथ लेकर उग्र आंदोलन शुरू करेगी।