सबकी खबर , पैनी नज़र

August 25, 2026 7:29 pm

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अनिल विज के नेतृत्व में हरियाणा रोडवेज में आएगी इलेक्ट्रिक क्रांति, डीजल बसों पर घटेगी निर्भरता

अनिल विज की पहल से हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन होगा आधुनिक और प्रदूषण मुक्त, 2030 का लक्ष्य तय

चंडीगढ़:पवन चोपड़ा, हरियाणा में सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। परिवहन मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में राज्य सरकार रोडवेज व्यवस्था को पारंपरिक डीजल आधारित संचालन से निकालकर स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक की ओर ले जाने पर जोर दे रही है। सरकार की योजना केवल नई इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ बस डिपो, चार्जिंग नेटवर्क, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल निगरानी को भी नए सिरे से विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार की दीर्घकालिक सोच वर्ष 2030 तक सार्वजनिक परिवहन को गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित तकनीक से जोड़ने की है। इलेक्ट्रिक बसों के साथ भविष्य में हाइड्रोजन और फ्यूल सेल जैसी तकनीकों को भी परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है। ऐसे में आने वाले वर्षों में हरियाणा रोडवेज का स्वरूप मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग दिखाई देने की संभावना है।
डीजल से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ेगा रोडवेज
हरियाणा के बड़े शहरों में लगातार बढ़ते यातायात और प्रदूषण के बीच सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाना सरकार के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।
ई-बसों का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इनके संचालन के दौरान पारंपरिक डीजल बसों की तरह सीधे धुएं का उत्सर्जन नहीं होगा। इससे शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। साथ ही इलेक्ट्रिक बसें अपेक्षाकृत कम शोर करती हैं, जिससे भीड़भाड़ वाले शहरों में ध्वनि प्रदूषण कम करने में सहायता मिलेगी।
परिवहन मंत्री अनिल विज की पहल में इसलिए केवल बसों की संख्या बढ़ाने के बजाय पूरे परिवहन तंत्र को स्वच्छ और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिखाई दे रहा है।
925 नई ई-बसों से बढ़ेगा सार्वजनिक परिवहन का दायरा
हरियाणा के प्रमुख शहरों में ई-बस सेवा के विस्तार के लिए बड़ी संख्या में नई बसें शामिल करने की तैयारी है। क्लीन एयर रणनीति के तहत 925 इलेक्ट्रिक बसों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें से बड़ी संख्या में बसों के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे प्रमुख शहरों में इन बसों का विस्तार किया जाना प्रस्तावित है। इन शहरों में ई-बसों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को निजी वाहनों के विकल्प के रूप में बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिल सकता है।
सरकार का प्रयास है कि सार्वजनिक परिवहन जितना सुविधाजनक और भरोसेमंद होगा, उतना ही लोग निजी वाहनों की जगह बस सेवा को प्राथमिकता देंगे।
जिला मुख्यालयों तक पहुंचेगी आधुनिक बस सेवा
ई-बस योजना को केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रखने की रणनीति बनाई गई है। प्रदेश के जिला मुख्यालयों में भी इलेक्ट्रिक सिटी बसों का विस्तार किया जा रहा है।
भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, सिरसा और हांसी सहित कई शहरों में प्रारंभिक स्तर पर इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इससे छोटे और मध्यम शहरों में भी सार्वजनिक परिवहन का स्तर बेहतर होगा।
दैनिक यात्रियों के साथ विद्यार्थियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है। छोटे शहरों में बेहतर सिटी बस सेवा शुरू होने से स्थानीय स्तर पर आवागमन की समस्या भी कम हो सकती है।
ई-बसों के साथ चार्जिंग नेटवर्क सबसे बड़ी प्राथमिकता
इलेक्ट्रिक बसों की सफलता केवल बस खरीदने से संभव नहीं होगी। इसके लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क सबसे आवश्यक आधारभूत ढांचा है। सरकार ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर चार्जिंग सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई है।
कई जिला मुख्यालयों के बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। इसके अलावा दिल्ली-चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर पर भी चार्जिंग हब विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर निर्धारित दूरी के अंतराल पर चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने की योजना लंबी दूरी की ई-बस सेवा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बसों को बीच रास्ते चार्जिंग की समस्या से बचाया जा सकेगा और रूट प्लानिंग भी अधिक प्रभावी होगी।
आधुनिक ई-बस डिपो बदलेंगे रोडवेज का संचालन
इलेक्ट्रिक बसों के लिए पारंपरिक डिपो की तुलना में अलग तरह के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में ई-बस डिपो विकसित किए जा रहे हैं।
पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, हिसार, यमुनानगर और रेवाड़ी जैसे जिलों को इस दिशा में महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है।
इन डिपो में बसों की पार्किंग से लेकर चार्जिंग, बिजली आपूर्ति और दैनिक संचालन तक की व्यवस्थाओं को एकीकृत किया जाएगा। इससे बसों के संचालन में समय की बचत होने के साथ चार्जिंग और रखरखाव की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा।
यात्रियों की सुरक्षा को तकनीक से जोड़ा जाएगा
नई ई-बस व्यवस्था में यात्री सुविधाओं के साथ सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बसों में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और पैनिक बटन जैसी तकनीकी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
बसों की लोकेशन और संचालन पर केंद्रीय स्तर से नजर रखी जा सकेगी। किसी आपात स्थिति में पैनिक बटन यात्रियों और चालक-परिचालक के लिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में उपयोगी हो सकता है।
इससे रोडवेज संचालन में जवाबदेही बढ़ाने और यात्रियों के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
विद्यार्थियों को भी मिलेगा सीधा फायदा
ई-बसों का विस्तार केवल पर्यावरणीय बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा लाभ आम यात्रियों को भी मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के लिए रोडवेज बस पास की सुविधा ई-बसों में भी लागू रखने की व्यवस्था की जा रही है।
इससे स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ मिलेगा। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों से रोजाना शिक्षण संस्थानों तक आने-जाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से तेज होगा विस्तार
ई-बसों के संचालन में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल को भी महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। इस व्यवस्था में निजी ऑपरेटर बसें और संबंधित संचालन सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, जबकि सरकार निर्धारित आधार पर भुगतान करती है।
इस मॉडल से सरकार पर एक साथ बड़ी संख्या में बसें खरीदने और उनके रखरखाव का पूरा वित्तीय बोझ कम किया जा सकता है। साथ ही निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का उपयोग करके ई-बस सेवा का तेजी से विस्तार संभव हो सकता है।
स्थानीय विनिर्माण और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
ई-बसों की बढ़ती मांग का असर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। भारत में निर्मित और निर्धारित विनिर्माण मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को प्राथमिकता देने से स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इसके साथ बैटरी के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार के सामने चुनौती यह है कि इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार के साथ बैटरी कचरे से जुड़ी पर्यावरणीय समस्या को भी प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जाए।
2030 तक लक्ष्य हासिल करना होगी बड़ी चुनौती
हरियाणा में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का विस्तार निश्चित रूप से बड़ा बदलाव है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए कई स्तरों पर लगातार काम करना होगा। बसों की उपलब्धता के साथ पर्याप्त बिजली, चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक डिपो, प्रशिक्षित कर्मचारी, तकनीकी रखरखाव और बैटरी प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था जरूरी होगी।
परिवहन मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यदि ई-बसों के विस्तार के साथ आधारभूत ढांचा भी समयबद्ध तरीके से तैयार होता है तो 2030 तक हरियाणा रोडवेज का बड़ा हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन में बदल सकता है।
यह बदलाव केवल रोडवेज के बेड़े में परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि शहरों की हवा, यात्रियों की सुविधा और सार्वजनिक परिवहन की कार्यप्रणाली पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। आने वाले वर्षों में हरियाणा की सड़कों पर डीजल बसों की जगह शांत, आधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाली बसों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में एक नई तस्वीर पेश कर सकती है।